Category Archives: भारत के वेज्ञानिक

bharat के 11 आश्चर्य जनक सत्य


1 :- pentiyam  chip  का अविष्कार ” विनोद धाम ” ने किया था (अब दुनिया में 90 % कंप्यूटर इसी से   चलते हें)
2 :- श्री सबीर भाटिया ने hotmail  बनाई (hotmail  दुनिया का no1 प्रोग्राम हे )
3 :- अमेरिका में 38 % डॉक्टर भारतीय हें
4 :- अमेरिका में 12 % वैज्ञानिक भारतीय हें
5 :- नासा में 36 % वैज्ञानिक भारतीय हें
6 :- मैक्रोसोफ्ट के 34 % कर्मचारी भारतीय हें
7 :- IBN के 28 % कर्मचारी भारतीय हें
8 :- INTEL के 17% वैज्ञानिक भारतीय हें
9 :- JIRKS के 13 % कर्मचारी भारतीय हें
10 :- प्रसिद्ध खेल Shatranj की खोज भारत में हुई
11 :- दुनिया के पहले Airplane  की खोज भारत के वैज्ञानिक शिवकर बापूजी तलपडे ने की  यदि यकीं नही होता तो इस लिंक को देखें http://www.bharatyogi.net/2013/04/write-brothers.html

जो लोग भारत देश को कम आकते हें उन्हें यह सोचना चाहिए


Plastic Surgery इसका अविष्कार भारत मे हुआ है|


अगर आप पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें: राजीव दीक्षित Rajiv Dixit
http://www.youtube.com/watch?v=ZO-bpE9NYUA

Plastic Surgery जो आज की Surgery की दुनिया मे आधुनिकतम विद्या है इसका अविष्कार भारत मे हुअ है| सर्जरी का अविष्कार तो हुआ ही  है Plastic Surgery का अविष्कार भी यहाँ हि हुआ है| प्लास्टिक सर्जरी मे कहीं की त्वचा  को काट के कहीं लगा देना और उसको इस तरह से लगा देना की पता हि न चले यह विद्या सबसे पहले दुनिया को भारत ने दी है|

1780 मे दक्षिण भारत के कर्णाटक राज्य के एक बड़े भू भाग का राजा था हयदर अली| 1780-84 के बीच मे अंग्रेजों ने हयदर अली के ऊपर कई बार हमले किये और एक हमले का जिक्र एक अंग्रेज की डायरी मे से मिला है| एक अंग्रेज का नाम था कोर्नेल कूट उसने हयदर अली पर हमला किया पर युद्ध मे अंग्रेज परास्त हो गए और हयदर अली ने कोर्नेल कूट की नाक काट दी|

कोर्नेल कूट अपनी डायरी मे लिखता है के “मैं पराजित हो गया, सैनिको ने मुझे बन्दी बना लिया, फिर मुझे हयदर अली के पास ले गए और उन्होंने मेरा नाक काट दिया|” फिर कोर्नेल कूट लिखता है के “मुझे घोडा दे दिया भागने के लिए नाक काट के हात मे दे दिया और कहा के भाग जाओ तो मैं घोड़े पे बैठ के भागा| भागते भागते मैं बेलगाँव मे आ गया, बेलगाँव मे एक वैद्य ने मुझे देखा और पूछा मेरी नाक कहाँ कट गयी? तो मैं झूट बोला के किसीने पत्थर मार दिया, तो वैद्य ने बोला के यह पत्थर मारी हुई नाक नही है यह तलवार से काटी हुई नाक है, मैं वैद्य हूँ मैं जानता हूँ| तो मैंने वैद्य से सच बोला के मेरी नाक काटी गयी है| वैद्य ने पूछा किसने काटी? मैंने बोला तुम्हारी राजा ने काटी| वैद्य ने पूछा क्यों काटी तो मैंने बोला के उनपर हमला किया इसलिए काटी| फिर वैद्य बोला के तुम यह काटी हुई नाक लेके क्या करोगे? इंग्लैंड जाओगे? तो मैंने बोला इच्छा तो नही है फिर भी जाना हि पड़ेगा|”

यह सब सुनके वो दयालु वैद्य कहता है के मैं तुम्हारी नाक जोड़ सकता हूँ, कोर्नेल कूट को पहले विस्वास नही हुआ, फिर बोला ठीक  है जोड़ दो तो वैद्य बोला तुम मेरे घर चलो| फिर वैद्य ने कोर्नेल को ले गया और उसका ऑपरेशन किया और इस ऑपरेशन का तिस पन्ने मे वर्णन है| ऑपरेशन सफलता पूर्वक संपन्न हो गया नाक उसकी जुड़ गयी, वैद्य जी ने उसको एक लेप दे दिया बनाके और कहा की यह लेप ले जाओ और रोज सुबह शाम लगाते रहना| वो लेप लेके चला गया और 15-17 दिन के बाद बिलकुल नाक उसकी जुड़ गयी और वो जहाज मे बैठ कर लन्दन चला गया|

फिर तिन महीने बाद ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे खड़ा हो कोर्नेल कूट भाषण दे रहा है और सबसे पहला सवाल पूछता है सबसे के आपको लगता है के मेरी नाक कटी हुई है? तो सब अंग्रेज हैरान होक कहते है अरे नही नही तुम्हारी नाक तो कटी हुई बिलकुल नही दिखती| फिर वो कहानी सुना रहा है ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे के मैंने हयदर अली पे हमला किया था मैं उसमे हार गया उसने मेरी नाक काटी फिर भारत के एक वैद्य ने मेरी नाक जोड़ी और भारत की वैद्यों के पास इतनी बड़ी हुनर है इतना बड़ा ज्ञान है की वो काटी हुई नाक को जोड़ सकते है|

फिर उस वैद्य जी की खोंज खबर ब्रिटिश पार्लियामेन्ट मे ली गयी, फिर अंग्रेजो का एक दल आया और बेलगाँव की उस वैद्य को मिला, तो उस वैद्य ने अंग्रेजो को बताया के यह काम तो भारत के लगभग हर गाँव मे होता है; मैं एकला नहीं हूँ ऐसा करने वाले हजारो लाखों लोग है| तो अंग्रेजों को हैरानी हुई के कोन सिखाता है आपको ? तो वैद्य जी कहने लगे के हमारे इसके गुरुकुल चलते है और गुरुकुलों मे सिखाया जाता है|

फिर अंग्रेजो ने उस गुरुकुलों मे गए उहाँ उन्होंने एडमिशन लिया, विद्यार्थी के रूप मे भारती हुए और सिखा, फिर सिखने के बाद इंग्लॅण्ड मे जाके उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी शुरू की| और जिन जिन अंग्रेजों ने भारत से प्लास्टिक सर्जरी सीखी है उनकी डायरियां हैं| एक अंग्रेज अपने डायरी मे लिखता है के ‘जब मैंने पहली बार प्लास्टिक सर्जरी सीखी, जिस गुरु से सीखी वो भारत का विशेष आदमी था और वो नाइ था जाती का| मने जाती का नाइ, जाती का चर्मकार या कोई और हमारे यहाँ ज्ञान और हुनर के बड़े पंडित थे| नाइ है, चर्मकार है इस आधार पर किसी गुरुकुल मे उनका प्रवेश वर्जित नही था, जाती के आधार पर हमारे गुरुकुलों मे प्रवेश नही हुआ है, और जाती के आधार पर हमारे यहाँ शिक्षा की भी व्यवस्था नही था| वर्ण व्यवस्था के आधार पर हमारे यहाँ सबकुछ चलता रहा| तो नाइ भी सर्जन है चर्मकार भी सर्जन है| और वो अंग्रेज लिखता है के चर्मकार जादा अच्छा  सर्जन इसलिए हो सकता है की उसको चमड़ा सिलना सबसे अच्छे तरीके से आता है|

एक अंग्रेज लिख रहा है के ‘मैंने जिस गुरु से सर्जरी सीखी वो जात का नाइ था और सिखाने के बाद उन्होंने मुझसे एक ऑपरेशन करवाया और उस ऑपरेशन की वर्णन है| 1792 की बात है एक मराठा सैनिक की दोनों हात युद्ध मे कट गए है और वो उस वैद्य गुरु के पास कटे हुए हात लेके आया है जोड़ने के लिए| तो गुरु ने वो ऑपरेशन उस अंग्रेज से करवाया जो सिख रहा था, और वो ऑपरेशन उस अंग्रेज ने गुरु के साथ मिलके बहुत सफलता के साथ पूरा किया| और वो अंग्रेज जिसका नाम डॉ थॉमस क्रूसो था अपनी डायरी मे कह रहा है के “मैंने मेरे जीवन मे इतना बड़ा ज्ञान किसी गुरु से सिखा और इस गुरु ने मुझसे एक पैसा नही लिया यह मैं बिलकुल अचम्भा मानता हूँ आश्चर्य मानता हूँ|” और थॉमस क्रूसो यह सिख के गया है और फिर उसने प्लास्टिक सेर्जेरी का स्कूल खोला, और उस स्कूल मे फिर अंग्रेज सीखे है, और दुनिया मे फैलाया है| दुर्भाग्य इस बात का है के सारी दुनिया मे Plastic Surgery का उस स्कूल का तो वर्णन है लेकिन इन वैद्यो का वर्णन अभी तक नही आया विश्व ग्रन्थ मे जिन्होंने अंग्रेजो को प्लास्टिक सेर्जेरी सिखाई थी|

आपने पूरी पोस्ट पढ़ी  इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद्
वन्देमातरम
भारत माता की जय

Anti-gravity की खोज के काफी नजदीक थे हमारे राजीव भाई

 
अगर आप पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ क्लिक करें: राजीव दीक्षित Rajiv Dixit
http://www.youtube.com/watch?v=1aX7PxhBAzE
 हमारे राजीव भाई CSIR (Center For Science & Industrial Research) के एक शोध कार्य मे काम किया था| वो शोध कार्य Fundamental Fifth Force के ऊपर था, आप जानते है ब्रह्माण्ड मे चार तरह के Fundamental Force है, पर एक कल्पना ऐसी है के कोई एकk Fifth Force भी है और वो Anti-gravity है| तो इसके लिए राजीव भाई ने Mathematical Foundations तक Develop किया, पहले तो Assumption थे फिर Foundations मे राजीव भाई गए फिर Experimental Verification का काम राजीव भाई अपने टीम के साथ शुरू किया|

तभी इस काम के बारे मे Germany के कुछ वैज्ञानिकों को खबर लग गयी, उहाँ पर एक Max Planck Research Institute है Munich नाम की शहर मे, उनको पता चल गया के हिन्दुस्तान मे ऐसा कुछ काम हो रहा है तो उन्होंने राजीव भाई की टीम को Offer कर दिया के अब तो आप यहाँ आ जाइये और इहाँ पे करिए, हम आपको Billions of Dollars Provide करेंगे| तो राजीव भाई ने काहा के ‘नही ये संभव नही है हम तो हमारे देश मे कुछ करना चाहते है’| तो कहने लगे आपके देश मे तो Facilities नही है, तब राजीव भाई ने काहा ‘नही है, तो क्या है ? आचार्य जगदीश चन्द्र बोसू ने जब काम किया था तब उनके पास भी Facilities नही थे तो क्या वो अमेरिका भाग गए थे शोध करने के लिए ? वो यही पे रहके काम करते थे|’ फिर उन लोगोने धमकी देना शुरु किया के ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे, Government of India को उन्होंने कहा के आप तो Pressurize करिए इन लोगोंको, माने एक ग्रुप के वैज्ञानिकों को जो राजीव भाई के साथ काम कर रहे थे| तो वो कहते थे इनको Pressurize करो पैसे की मदत से या किसी भी तरह से या तो Surrender कर दे यह पूरी शोध या यह तैय कर ले की Patent सिर्फ Germany लेगा माने Max Planck Research Institute.

राजीव भाई के मन मे कुछ ऐसे प्रतिक्रिया आ रही थी.. दो रास्ते थे उनके पास, एक के वो अपनी शोध (Research) को Surrender कर दे, कुछ पैसा उनको मिल जाये, करोड़ पति बन जाय, मज़े का जीवन बिताएं या Germany चला जाए| एक और रास्ता था के राजीव भाई उनसे झगड़ा करे, और कहें के कोई सवाल हि नही उठता यह उनका अपना है, वो खुद रखेंगे, तुमको International Court मे जाना है उहाँ चले जाओ, मैं फाइट करूँगा ऐसा करूँगा वैसा करूँगा| तीसरा और एक आखरी रास्ता है जो राजीव भाई को बहुत पसंद था वो था के शोध हि बंध कर दो| किस बात का झगड़ा लेना ? होगा क्या के राजीव भाई शोध करेंगे और Patent उनको हो जायेगा तो Technology वो बनायेंगे|

अब Technology कहाँ से आयेगी ? अब यह तैय हो जाये के Fundamental Fifth Force है और यह भी तैय हो जाये के वो Anti-gravity है तो यह जो Satellite Communications का Field है यह तो हमारे लिए बिलकुल खुल जायेगा, बहुत अपर सम्भावनाये इसमें हो जाएगी, और हम बहुत कम पैसे मे दुनिया के Master हो सकते है| राजीव भाई को लगता था के हम Satellite बनायेंगे तो हिन्दुस्तान के प्राकृतिक सम्पदा के बारे मे पता लगायेंगे, Star Wars तो नही करने वाले| अगर अमेरिका के पास यही Technology पोहुंच जाएगी तो वो इसको Star Wars इस्तेमाल करेंगे| इराक को बम मारेंगे, ईरान को बम मारेंगे, अफगानिस्तान को बम मारेंगे, उसको मारेंगे ..तो राजीव भाई के मन मे आया के यह काम बंध कर देना चाहिए क्योंकि भारत सरकार का कोई भरोसा नही है| पता नही कब भारत सरकार जर्मनी के सामने Surrender देंगे और कहेंगे के इतना बिलियन डॉलर मिलता है तो ले लो… तो सरकार पर कोई भरोसा नही और राजीव भाई को उनसे झगड़ा नही करना, तो एक रास्ता उन्होंने ढूंड लिया के इस प्रोजेक्ट को बंध कर दिया जाये| राजीव भाई के जो गाइड थे डॉ एम् पि कौशिक उन्होंने कहा के जब हमारी ताकत और हैसियत होगी तब हम फिर से शुरू करेंगे अभी फ़िलहाल बंध कर दो| तो राजीव भाई ने वो प्रोजेक्ट बंध कर दिया|

अब यह Concept की बात है, तो राजीव भाई के दिमाग मे जब भी इस बात को लेके विचार आते थे तो वो यही सोचते थे के उनका उस शोध का काम अगर वो प्रोयोग करेंगे, Technology के field मे जायेंगे तो उनको Satellite के field मे हिन्दुस्तान को कुछ आगे ले जाने की बात Self Sufficient करने की बात दीखता था| उनको क्या दीखता था ? के इसको हम प्रोयोग करके दुनिया पर हम राज करेंगे Star Wars के Masters हो जायेंगे हम Missiles को ऐसे डिजाईन करेंगे वैसे डिजाईन करेंगे|

तो यह जो Civilization Concept है यह Technology के Development मे बड़ी भूमिका निभाता है| हमारी Civilization की जो मान्यताएं है उसि के हिसाब से Technology बनाते है और हमारी जो मान्यतायों के विरुद्ध है वो Technology मे हम नही जाते| अब पिछले 20 सालों से क्या हो गया है के यूरोप की जो मान्यताये है Civilization की उसके आधार पर उन्होंने जो Technology का विकास किया है वो वकास के आधार पर उन्होंने ऐसी बहुत सारी Technology बनाई है जो दुनिया का नाश हि जादा करती है, फ़ायदा तो बहुत कम करती है| यूरोप और अमेरिका के पास इस समय जितनी भी Technology है अगर आप उसको classify करने की कौसिश करें to 70% se 80% Technology उनकी ऐसी है जो Mass Destruction की है| और इसमें Trillion of Dollar की Investment है| और हमने जो Technology बनाई है पिछले 50-55 साल मे वो ऐसा बिलकुल नही है| Technology अछि या बुरी नही होती कभी भी जैसे एक चाकू है ..ये अच्छा और बुरा कुछ नही होता प्रोयोग करने वाले के हात मे है के आप उसका क्या प्रोयोग करेंगे! आप चाकू से किसीका जेब काट सकते है किसीका पेट फाड़ सकते है, और उसि चाकू से आप केला काट सकते है, आलू काट सकते है, सब्जी बनाके खा सकते है| आप अगर यह पश्चिमी लोगों के हात मे दे दोगे तो वो पेट फाड़ने का सोचेंगे, जेब काटने का सोचेंगे और हिन्दुस्तानी या पूर्वी लोगोंके हात मे दोगें तो वे सब्जी काट के हि खायेंगे उससे|

तो यह डिबेट नही करना है के Technology अछि है या ख़राब! उनके लिए बहुत अछि हो सकती है पर मेरे लिए ख़राब| यह Relativity का सवाल है न के अपने लिए Star Wars का Concept बहुत ख़राब हो सकता है Atom Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Hydrogen Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Chemical Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Anthrax बहुत ख़राब हो सकता है लेकिन यूरोप, अमेरिका के लिए हो सकता है बहुत अच्छा हो, क्योंकि उन्हें अपना उदेश्य हासिल करने मे वो Technology की मदत मिलती हो तो वो करेंगे उनके लिए बहुत अछि हो सकती है|

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वन्देमातरम्

पहला हवाई जाहाज Write Brothers ने नही भारतीय वैज्ञानिक “शिवकर बापूजी तलपडे” ने बनाया

 Photo: अधिक जानकारी के लिए यहाँ Click करें: http://www.youtube.com/watch?v=AA6Mdy2dEQw  अगर आज किसीको पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया? तोह ले देके एक नाम लेते है Write Brothers नव बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पड़ते आये है के 17 डिसेम्बर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है|  पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|  जिस भारतीय वैगानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पड़ाई लिखाई की एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो “महर्षि भ्वरद्वाज” | महर्षि भ्वरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलभ्द है उसमे सबसे पुराणी पुस्तक 1500 साल पुराणी है और महर्षि भ्वरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|  शिवकर बापूजी तलपडे जी के हात मे महर्षि भ्वरद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –  > “इस पुस्तक के आट अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का हि वर्णन है” > “आट अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है” > “महर्षि भ्वरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है” एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भ्वरद्वाज ने मने 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के – > “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”  यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तोह महर्षि भ्वरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!  इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से, और पड़ पड़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे, तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुअ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और हयरानी की बात यह थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हात मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ| और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उहाँ पर उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये की|  तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत है, आर्थिक रूप से मेरी अछि स्थिति नही है| तो लोगोने इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन तभी उनके साथ एक धोका हुआ| अंग्रेजो की एक कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे जी ने कहा की उसका कारण बताइए, तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदत करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके पास पैसे की बहुत कमी है, हमारी कंपनी काफी पैसा इस काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप समझोता कर लीजिये, और इस विमान की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे जी भोले भाले सीधे साधे आदमी थे तो वो मन गए और कंपनी के साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli Brothers जो कंपनी थी उसने विमान का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह कंपनी लन्दन चली गयी और लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन फिर अमेरिका पोहुंच गयी| फिर अमेरिका मे Write Brothers के हात मे आ गयी फिर Write Brothers ने वो विमान बनाके अपने नाम से सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|  तलपडे जी की गलती क्या थी के उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास| राजीव भाई कहते है के भारत मे सबसे बड़ी समस्या 12-15 साल मे उनको जो समझ मे आयी है के “हमको सब ज्ञान आती है, सब तकनिकी आती है, सब आती है पर चालाकी नही आती; एक गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न सीखी होसियारी’ यह भारतवासी पर बिलकुल फिट है, और यह अंग्रेजो को अमेरिकिओंको कुछ नही आता सिर्फ चालाकी आती है| उनके पास न ज्ञान है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| किसीका दुनिया मे कुछ भी नया मिले वो चालाकी करके अपने पास ले लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”  शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुअ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे 17 दिसम्बर को उड़ाया पर इससे 8 साल पहले भारत मे विमान बन जुका था और देश के सामने वो दिखाया जा जुका था|  अब हमें इस बात के लिए लड़ाई करनी है अमेरिकिओं से और यूरोपियन लोगों से के यह तो हमारे नाम हि दर्ज होना चाहिए और Ralli Brothers कंपनी ने जो बैमानी और बदमासी की थी समझोते के बाद उसका उस कंपनी को हरजाना देना चाहिए क्योकि समझोता करने के बाद बैमानी की थी उन्होंने|  राजीव भाई आगे कहते है Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी| उनकी तो मृत्यु के बारे मे भी शंका है के उनकी हत्या की गयी और दर्ज कर दिया गया के उनकी मृत्यु हो गयी; और ऐसे व्यक्ति की हत्या करना बहुत स्वभाबिक है के जिसका नाम दुनिया मे इतना बड़ा अविष्कार होने की संभावना हो| तो अगर हम फिर उस पुराने दस्ताबेज खोले ढूंढें उस फाइल को, फिर से देखें तो पता चल जायेगा और दूध का दूध और पानी का पनी सारा सच दुनिया के सामने आ जायेगा|
अधिक जानकारी के लिए यहाँ Click करें:
http://www.youtube.com/watch?v=AA6Mdy2dEQw
 

अगर आज किसीको पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया? तोह ले देके एक नाम लेते है Write Brothers नव बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पड़ते आये है के 17 डिसेम्बर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है|

पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|

जिस भारतीय वैगानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पड़ाई लिखाई की एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो “महर्षि भ्वरद्वाज” | महर्षि भ्वरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलभ्द है उसमे सबसे पुराणी पुस्तक 1500 साल पुराणी है और महर्षि भ्वरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|

शिवकर बापूजी तलपडे जी के हात मे महर्षि भ्वरद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –

> “इस पुस्तक के आट अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का हि वर्णन है”
> “आट अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है”
> “महर्षि भ्वरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है”
एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भ्वरद्वाज ने मने 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के –
> “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”

यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तोह महर्षि भ्वरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!

इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से, और पड़ पड़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे, तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुअ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और हयरानी की बात यह थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हात मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ| और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उहाँ पर उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये की|

तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत है, आर्थिक रूप से मेरी अछि स्थिति नही है| तो लोगोने इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन तभी उनके साथ एक धोका हुआ| अंग्रेजो की एक कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे जी ने कहा की उसका कारण बताइए, तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदत करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके पास पैसे की बहुत कमी है, हमारी कंपनी काफी पैसा इस काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप समझोता कर लीजिये, और इस विमान की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे जी भोले भाले सीधे साधे आदमी थे तो वो मन गए और कंपनी के साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli Brothers जो कंपनी थी उसने विमान का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह कंपनी लन्दन चली गयी और लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन फिर अमेरिका पोहुंच गयी| फिर अमेरिका मे Write Brothers के हात मे आ गयी फिर Write Brothers ने वो विमान बनाके अपने नाम से सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|

तलपडे जी की गलती क्या थी के उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास| राजीव भाई कहते है के भारत मे सबसे बड़ी समस्या 12-15 साल मे उनको जो समझ मे आयी है के “हमको सब ज्ञान आती है, सब तकनिकी आती है, सब आती है पर चालाकी नही आती; एक गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न सीखी होसियारी’ यह भारतवासी पर बिलकुल फिट है, और यह अंग्रेजो को अमेरिकिओंको कुछ नही आता सिर्फ चालाकी आती है| उनके पास न ज्ञान है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| किसीका दुनिया मे कुछ भी नया मिले वो चालाकी करके अपने पास ले लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”

शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुअ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे 17 दिसम्बर को उड़ाया पर इससे 8 साल पहले भारत मे विमान बन जुका था और देश के सामने वो दिखाया जा जुका था|

अब हमें इस बात के लिए लड़ाई करनी है अमेरिकिओं से और यूरोपियन लोगों से के यह तो हमारे नाम हि दर्ज होना चाहिए और Ralli Brothers कंपनी ने जो बैमानी और बदमासी की थी समझोते के बाद उसका उस कंपनी को हरजाना देना चाहिए क्योकि समझोता करने के बाद बैमानी की थी उन्होंने|

राजीव भाई आगे कहते है Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी| उनकी तो मृत्यु के बारे मे भी शंका है के उनकी हत्या की गयी और दर्ज कर दिया गया के उनकी मृत्यु हो गयी; और ऐसे व्यक्ति की हत्या करना बहुत स्वभाबिक है के जिसका नाम दुनिया मे इतना बड़ा अविष्कार होने की संभावना हो| तो अगर हम फिर उस पुराने दस्ताबेज खोले ढूंढें उस फाइल को, फिर से देखें तो पता चल जायेगा और दूध का दूध और पानी का पनी सारा सच दुनिया के सामने आ जायेगा|

5000 साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में

५००० साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में  Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report  5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :  अफगानिस्तान में बड़ा क्षेत्र है जहाँ US Military का केम्प है। इस क्षेत्र में कभी कभी electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न होती थी जिससे मिलिट्री के कई जवान मारे गए या गायब हो गए।  इसकी तह तक पहुँचने के लिए अमेरिका 8 सील कमांडो अफगानिस्तान के उसी स्थान पार एक गुफा में गये तथा वहां उन्हें एक फंसा हुआ विमान दिखा जब वो उसेको निकालने प्रयास कर रहे थे। तभी वो अचानक गायब हो गए।  इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये। इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।  US Military scientists ने इसकी ने बताया की ये विमान ५००० हज़ार पुराना है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए थे। इसी क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए।  Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो सर्पिलाकार होता है हमारी आकाशगंगा की तरह।  Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया की ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है। और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्र में प्रकाश का उत्सर्जन होता है।  SVR report का कहना है यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई ये इतनी खतरनाक थी की इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs इसकी चपेट में आ गए।  US Army CH-47F Chinook हेलीकाप्टर जो ओसामा बिन लादेन को मरने के बाद बापस लौट रहा था ये हेलीकाप्टर इसी विमान की shockwaves चपेट में आ गया था।  http://www.wired.com/dangerroom/2011/05/aviation-geeks-scramble-to-i-d-osama-raids-mystery-copter/  http://www.whatdoesitmean.com/index1510.htm  http://www.youtube.com/watch?v=qBlwhVyZxmQ  http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache%3Ahttp%3A%2F%2Freinep.wordpress.com%2F2011%2F10%2F09%2F5000-year-old-viamana-craft-was-found-in-afghanistan%2F
 
५००० साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में

Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report

5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :

अफगानिस्तान में बड़ा क्षेत्र है जहाँ US Military का केम्प है। इस क्षेत्र में कभी कभी electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न होती थी जिससे मिलिट्री के कई जवान मारे गए या गायब हो गए।

इसकी तह तक पहुँचने के लिए अमेरिका 8 सील कमांडो अफगानिस्तान के उसी स्थान पार एक गुफा में गये तथा वहां उन्हें एक फंसा हुआ विमान दिखा जब वो उसेको निकालने प्रयास कर रहे थे। तभी वो अचानक गायब हो गए।

इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये।
इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।

US Military scientists ने इसकी ने बताया की ये विमान ५००० हज़ार पुराना है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए थे। इसी क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए।

Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो सर्पिलाकार होता है हमारी आकाशगंगा की तरह।

Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया की ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है। और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्र में प्रकाश का उत्सर्जन होता है।

SVR report का कहना है यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई ये इतनी खतरनाक थी की इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs इसकी चपेट में आ गए।

US Army CH-47F Chinook हेलीकाप्टर जो ओसामा बिन लादेन को मरने के बाद बापस लौट रहा था ये हेलीकाप्टर इसी विमान की shockwaves चपेट में आ गया था।

http://www.wired.com/dangerroom/2011/05/aviation-geeks-scramble-to-i-d-osama-raids-mystery-copter/

http://www.whatdoesitmean.com/index1510.htm

http://www.youtube.com/watch?v=qBlwhVyZxmQ

http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache%3Ahttp%3A%2F%2Freinep.wordpress.com%2F2011%2F10%2F09%2F5000-year-old-viamana-craft-was-found-in-afghanistan%2F

Bharat देश में चल रहे गुप्त षड्यंत्र को समझने के लिए कृपया पांच मिनट हमें दीजिए !

Bharat देश में चल रहे गुप्त षड्यंत्र को समझने के लिए कृपया पांच मिनट हमें दीजिए !
लेख से पहले आपको एक सच्ची कहानी सुनाना चाहता हूँ।

हमारे देश में एक महान scientist हुए हैं प्रो. श्री जगदीश चन्द्र बोस। भारत
को और हम भारत वासियों को उन पर बहुत गर्व है। इन्होने सबसे पहले

अपने शोध से यह निष्कर्ष निकाला कि मानव की तरह पेड़ पौधों में भी भावनाएं
होती हैं। वे भी हमारी तरह हँसते खिलखिलाते और रोते हैं। उन्हें भी

सुख दुःख का अनुभव होता है। और श्री बोस के इस अनुसंधान की तरह इसकी कहानी भी
बड़ी दिलचस्प है।

श्री बोस ने शोध के लिये कुछ गमले खरीदे और उनमे कुछ पौधे लगाए। अब इन्होने
गमलों को दो भागों में बांटकर आधे घर के एक कोने में तथा शेष

को किसी अन्य कोने में रख दिया। दोनों को नियमित रूप से पानी दिया, खाद डाली।
किन्तु एक भाग को श्री बोस रोज़ गालियाँ देते कि तुम बेकार हो,

निकम्मे हो, बदसूरत हो, किसी काम के नहीं हो, तुम धरती पर बोझ हो, तुम्हे तो
मर जाना चाहिए आदि आदि। और दूसरे भाग को रोज़ प्यार से

पुचकारते, उनकी तारीफ़ करते, उनके सम्मान में गाना गाते। मित्रों देखने से यह
घटना साधारण सी लगती है। किन्तु इसका प्रभाव यह हुआ कि जिन

पौधों को श्री बोस ने गालियाँ दी वे मुरझा गए और जिनकी तारीफ़ की वे खिले खिले
रहे, पुष्प भी अच्छे दिए।

तो मित्रों इस साधारण सी घटना से बोस ने यह सिद्ध कर दिया कि किस प्रकार से
गालियाँ खाने के बाद पेड़ पौधे नष्ट हो गए। अर्थात उनमे भी भावनाएं हैं।

मित्रों जब निर्जीव से दिखने वाले सजीव पेड़ पौधों पर अपमान का इतना
दुष्प्रभाव पड़ता है तो मनुष्य सजीव सदेह का क्या होता होगा?

वही होता है जो आज हमारे भारत देश का हो रहा है।

500 -700 वर्षों से हमें यही सिखाया पढाया जा रहा है कि तुम बेकार हो, खराब
हो, तुम जंगली हो, तुम तो हमेशा लड़ते रहते हो, तुम्हारे अन्दर सभ्यता

नहीं है, तुम्हारी कोई संस्कृती नहीं है, तुम्हारा कोई दर्शन नहीं है,
तुम्हारे पास कोई गौरवशाली इतिहास नहीं है, तुम्हारे पास कोई ज्ञान विज्ञान
नहीं है

आदि आदि। मित्रों अंग्रेजों के एक एक अधिकारी भारत आते गए और भारत व भारत
वासियों को कोसते गए। अंग्रजों से पहले ये गालियाँ हमें फ्रांसीसी

 देते थे, और फ्रांसीसियों से पहले ये गालियाँ हमें पुर्तगालियों ने दीं। इसी
क्रम में लॉर्ड मैकॉले का भी भारत में आगमन हुआ। किन्तु मैकॉले की नीति

कुछ अलग थी। उसका विचार था कि एक एक अंग्रेज़ अधिकारी भारत वासियों को कब तक
कोसता रहेगा?

कुछ ऐसी परमानेंट व्यवस्था करनी होगी

कि हमेशा भारत वासी खुद को नीचा ही देखें और हीन भावना से ग्रसित रहें।

इसलिए उसने जो व्यवस्था दी उसका नाम रखा Education System. सारा सिस्टम उसने
ऐसा रचा कि भारत वासियों को केवल वह सब कुछ पढ़ाया

जाए जिससे वे हमेशा गुलाम ही रहें। और उन्हें अपने धर्म संस्कृती से घृणा हो जाए।
 
इस शिक्षा में हमें यहाँ तक पढ़ाया कि भारत वासी सदियों से

गौमांस का भक्षण कर रहे हैं। ( जबकि गोमांस भक्षण योग में खेचरी मुद्रा को कहतें हें )
अब आप ही सोचे यदि भारत वासी सदियों से गाय का
मांस खाते थे तो आज के हिन्दू ऐसा क्यों नहीं करते?

और इनके द्वारा दी गयी सबसे गंदी गाली यह है कि हम भारत वासी आर्य बाहर से आये थे।
आर्यों ने भारत के मूल द्रविड़ों पर आक्रमण करके उन्हें दक्षिण तक

खदेड़ दिया और सम्पूर्ण भारत पर अपना कब्ज़ा ज़मा लिया। और हमारे देश के
वामपंथी चिन्तक आज भी इसे सच साबित करने के प्रयास में लगे हैं।

इतिहास में हमें यही पढ़ाया गया कि कैसे एक राजा ने दूसरे राजा पर आक्रमण
किया। इतिहास में केवल राजा ही राजा हैं प्रजा नदारद है, हमारे ऋषि

मुनि नदारद हैं। और राजाओं की भी बुराइयां ही हैं अच्छाइयां गायब हैं। आप जरा
सोचे कि अगर इतिहास में केवल युद्ध ही हुए तो भारत तो हज़ार साल

पहले ही ख़त्म हो गया होता।

और राजा भी कौन कौन से गजनी, तुगलक, ऐबक, लोदी,
तैमूर, बाबर, अकबर, सिकंदर जो कि भारतीय थे ही नहीं। ( सब के सब लुटेरे थे )

राजा विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान गायब हैं। इनका
ज़िक्र तो इनके आक्रान्ता के सम्बन्ध में आता है। जैसे सिकंदर की कहानी

में चन्द्रगुप्त का नाम है। चन्द्रगुप्त का कोई इतिहास नहीं पढ़ाया गया। और यह
सब आज तक हमारे पाठ्यक्रमों में है।

इसी प्रकार अर्थशास्त्र का विषय है। आज भी अर्थशास्त्र में पीएचडी करने वाले
बड़े बड़े विद्वान् विदेशी अर्थशास्त्रियों को ही पढ़ते हैं।

भारत का सबसे  बड़ा अर्थशास्त्री Chanakya तो कही है ही नहीं।
उनका एक भी सूत्र किसी स्कूल में भी बच्चों को नहीं पढ़ाया जाता।
जबकि उनसे बड़ा अर्थशास्त्री तो पूरी दुनिया
में कोई नहीं हुआ।

एक से एक प्रतिभाएं हें भारत में इकोफ्रेंडली चीजों का आविष्कार किया

 एक से एक प्रतिभाएं हें भारत में
पाठकों आज आपको मिट्टी की खुशबू से युक्त कुछ घरेलू उपयोग की चीजों के बारे में जानकारी दे रहा हूँ
| जी हाँ , गुजरात के एक शख्स हैं जिनका नाम मनसुख है |दर असल कक्षा दस में अनुत्तीर्ण
होने के बावजूद मनसुख ने हार नही मानी और एक साधारण परिवार से होते हुए भी इन सभी चीजों का आविष्कार किया | इनकी खासियत ये है की ये सभी चीजे इकोफ्रेंडली हैं |.इनका
पुरुषार्थ ही जिनकी बदौलत राष्ट्रपति ,मुख्यमंत्री व् कई अन्य संस्थाओ से भी ये जनाब
समानित हो चुकें है .अब ज्यादा न उलझाते हुय आपको उनसे परिचय करवा ही देता हूँ |


पहले बात करते हैं रेफ्रिजेटर की ..जी हाँ ये रेफ्रिजेटर बिना बिजली के चलता है| इसके उपर
एक पानी की छोटी टंकी बनी हुई है जिसमे पानी डाला जाता है | ये पानी पीने के काम
भी आ जाता है और इसका तापमान भी बनाये रखता है और इसकी खास बात ये हैं लगभग एक
सप्ताह तक इसमें फल व् सब्जियाँ खराब नही होती हैं |और दूध और अन्य पदार्थ 24 घंटे तक
खराब नही होते हैं |इसके साथ ही ये पूरी तरह इकोफ्रेंडली हैं | आज भी हमारे देश के ऐसे
सुदूर इलाके हैं जहां बिजली नही है और बहुत से ऐसे परिवार जो इतना सामर्थ्य नही रख पाते
है की वो इन सबका खर्चा उठा सकते हों |उनके लिय ये वरदान से कम नही हैंइकोफ्रेंडली
वाटर फिल्टर सिस्टम भी है …जिसको बिना किसी बिजली की सहायता से चलाया जाता है
और पानी की अशुदियाँ दूर होती हैं |
अगर आप इनके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो इस वेबसाइट के देखें www.mitticool.com
व् आपकी सुविधा के लिए मनसुख जी का नम्बर दे रहा हूँ …….09825177249