Category Archives: देश भगत राजीव भाई

गर्भ निरोधन तकनीक से महिलाओं को uterus मे cancer हो सकता हे

 मित्रो कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं !(Contraceptive)
कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं !
जैसे norplant,depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !

और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है ! ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन भारत मे लाकर बेच रही हैं !

जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधन के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं !

ये injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है !

कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और depo provera का injection लगा दिया ! जिससे उनको cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई !

इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है ! steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !

इसकी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है ! फिर एक यू क ले फ नाम की एक है फिर एक norplant है ! फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं ! उससे uterus की मांस पेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है ! और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई मताए बहने बिहोश हो जाती है ! लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये contraceptive दिया गया जिसके कारण से ये हुआ है ! और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !

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इसके इलवा अभी 3 -4 साल मे कंडोम का व्यपार विदेशी कंपनियो दावरा बहुत बढ़ गया है !! और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है !AIDS का बहाना लेकर TV मे अखबारो मे मैगजीनो मे एक ही बात क विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो !
ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो ! ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ !! वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ , बहन बेटी के साथ करो ,बस कंडोम का इस्तेमाल करो !! और इसका परिणाम पात क्या हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं ! 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी !
और इन कंपनियो का target ये है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए !!

और सरकार भी इस गलत कम मे AIDS का बहाना लेकर इनके साथ मिल गई है !
हमारे देश मे हर दिन कैंसर से ओसतन(avg) 1500 लोग मरते है !
सरकार को कोई चिंता नहीं

दमा , अस्थमा ,ट्यूबर क्लोसिस लगभग 1200 लोग रोज मरते हैं
सरकार को कोई चिंता नहीं

heart attack से हर दिन 800 से 1000 लोग मरते हैं !
सरकार को कोई चिंता नहीं !

क्या सरकार को सिर्फ AIDS की ही चिंता है ???? नहीं उनको कंपनियो का कंडोम अधिक से अधिक बिकवाना है !! किसी भी माँ,बहन के साथ करो ये संदेश हर युवा तक पहुंचाना है ! और भारतीय संस्कृति को नष्ट कर भारत को अमेरिका बनाना है !

https://www.youtube.com/watch?v=chl6QRAAKtU

आइये आज F D I के फायदे जाने,,,,,,,???

आइये आज ऍफ़ डी आई के फायदे जाने,,,,,,,  फायदा संख्या एक - कांग्रेस का काला धन जो स्विस बैंक में जमा है वापिस आकर सफ़ेद बन जाएगा ||  फायदा संख्या दो - भारत से गरीबी कम हो जायेगी ( गरीब आत्महत्या करना शुरू कर देगा तो गरीबी अपने आप कम हो जायेगी )  फायदा संख्या तीन - कामी लोगो को पाश्चात्य संस्कृति का नंगा नाच और अधिक देखने को मिलेगा ( आखिर ऍफ़ डी आई विदेशी सभ्यता का ही पालन करेगे )  फायदा संख्या चार - चाइनीज सस्ती वस्तुए पहले के मुकाबले और अधिक उपलब्ध होंगी ( जो यूज एंड थ्रो के लिए दुनिया भर में जानी जाती है ||  फायदा संख्या पांच - भारत का पैसा भारत से बाहर जाएगा तो डूबती हुयी वालमार्ट जैसी कम्पनियां फिर से खड़ी हो जायेगी | ( आखिर अमेरिका और चीन के डूबता जहाज को भारत जैसा दयावान देश ही सहारा दे सकता है )  फायदा संख्या छह - बड़ी बड़ी कम्पनियां आटा , डाल , चावल , सब्जी बेचेगी ( क्योकि यहाँ भारतीय यह काम नहीं कर पा रहे इसलिए भारत सरकार ने विदेशियों को इस काम के लिए चुना है याद रखे ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने आकर सबसे पहले मसाले बेचे थे )  फायदा संख्या सात - केवल मुनाफे के लिए किसानी करने वाले बड़े फार्मर्स और अधिक दवाइयों का प्रयोग कर हानिकारक सब्जियां और खाद्य प्रदार्थों की उत्पत्ति करेगे ( एक इंजेक्शन से १६ लोकी १३ घंटे ने ऊँगली से हाथ जितनी बड़ी बन जाती है )  फायदा संख्या आठ - अधिक कीटनाशक और अधिक हानिकारक तत्वों के प्रयोग से किसानो की जमीने जल्द ही बंजर हो जायेगी और भारत विदेशी खाद्यों पर निर्भर होने को मजबूर हो जाएगा ( जैसा ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने लाल आटा जो रबड़ का दूसरा रूप होता था हम भारतियों को खाने के लिए मजबूर कर दिया था और हमारा गेहूं वो विदेश भेज देते थे )  फायदा संख्या नौ - मुलायम , मायावती जैसे मौका परस्त नेताओं की सत्ता में दखल बढेगी ( क्योकि जब कभी भी राष्ट्र विरोधी कानून और जनता विरोधी नीतियाँ लागू होंगी कांग्रेस इन जैसे सहयोगियों के संसद से भागने की वजह से वोटिंग आदि जीत जायेगी )  फायदा संख्या दस - सबसे अच्छी और बड़ी बात भारत की निर्मल और पावन धरा से नामक अभिशाप कभी नष्ट नहीं हो पायेगा और भारत पुनः गुलामी की ओर अग्रसर हो जाएगा ( भारत ९९ साल की लीज पर है और ६५ वर्ष पूर्ण हो चुके है अगले ३३ वर्षों में भारतियों को पाश्चात्य संस्कृति और विदेशी सामान की ऐसी लत लगा दी जायेगी की भारत आर्थिक गुलाम बन जाएगा )  गे हो सेकुलर इण्डिया के सेकुलर लोगो की , अपनी माँ बहनों के दलालों की गे हो , भारत माँ को बेचने का सपना बुनने वाले सूअरों की गे हो ||  जागो हिन्दुओं जागो सेकुलर नहीं सनातनी बनो , इन्डियन नहीं भारतीय बनो ||  कसम खाओ की अगर दुर्भाग्यवश ऍफ़ डी आई आई है तो एक रुपये का भी व्यापार उनको नहीं देंगे और दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगे और जो भी राष्ट्रवादी संगठन ऍफ़ डी आई का विरोध करेगा उसका साथ जमीन पर उतर कर देंगे || याद रखे राष्ट्रवादी संगठन , अवसरवादी संगठन नहीं ||  जय जय सियाराम ,, जय जय महाकाल ,, जय जय माँ भारती ||  पोस्ट को शेयर जिससे आपके मित्रो को भी इस बारे में जानकारी मिले करें और अपने मित्रो को भी जागरूक करें--

फायदा संख्या एक – कांग्रेस का काला धन जो स्विस बैंक में जमा है वापिस आकर
सफ़ेद बन जाएगा ||

फायदा संख्या दो – भारत से गरीबी कम हो जायेगी ( गरीब आत्महत्या करना शुरू कर
देगा तो गरीबी अपने आप कम हो जायेगी )

फायदा संख्या तीन – कामी लोगो को पाश्चात्य संस्कृति का नंगा नाच और अधिक
देखने को मिलेगा ( आखिर ऍफ़ डी आई विदेशी सभ्यता का ही पालन करेगे )

फायदा संख्या चार – चाइनीज सस्ती वस्तुए पहले के मुकाबले और अधिक
उपलब्ध होंगी ( जो यूज एंड थ्रो के लिए दुनिया भर में जानी जाती है ||

फायदा संख्या पांच – भारत का पैसा भारत से बाहर जाएगा तो डूबती हुयी वालमार्ट
जैसी कम्पनियां फिर से खड़ी हो जायेगी | ( आखिर अमेरिका और चीन के डूबता जहाज
को भारत जैसा दयावान देश ही सहारा दे सकता है )

फायदा संख्या छह – बड़ी बड़ी कम्पनियां आटा , डाल , चावल , सब्जी बेचेगी (
क्योकि यहाँ भारतीय यह काम नहीं कर पा रहे इसलिए भारत सरकार ने विदेशियों को
इस काम के लिए चुना है याद रखे ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने आकर सबसे पहले मसाले
बेचे थे )

फायदा संख्या सात – केवल मुनाफे के लिए किसानी करने वाले बड़े फार्मर्स और
अधिक दवाइयों का प्रयोग कर हानिकारक सब्जियां और खाद्य प्रदार्थों की उत्पत्ति
करेगे ( एक इंजेक्शन से १६ लोकी १३ घंटे ने ऊँगली से हाथ जितनी बड़ी बन जाती
है )

फायदा संख्या आठ – अधिक कीटनाशक और अधिक हानिकारक तत्वों के प्रयोग से किसानो
की जमीने जल्द ही बंजर हो जायेगी और भारत विदेशी खाद्यों पर निर्भर होने को
मजबूर हो जाएगा ( जैसा ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने लाल आटा जो रबड़ का दूसरा रूप
होता था हम भारतियों को खाने के लिए मजबूर कर दिया था और हमारा गेहूं वो विदेश
भेज देते थे )

फायदा संख्या नौ – मुलायम , मायावती जैसे मौका परस्त नेताओं की सत्ता में दखल
बढेगी ( क्योकि जब कभी भी राष्ट्र विरोधी कानून और जनता विरोधी नीतियाँ लागू
होंगी कांग्रेस इन जैसे सहयोगियों के संसद से भागने की वजह से वोटिंग आदि जीत
जायेगी )

फायदा संख्या दस – सबसे अच्छी और बड़ी बात भारत की निर्मल और पावन धरा से नामक
अभिशाप कभी नष्ट नहीं हो पायेगा और भारत पुनः गुलामी की ओर अग्रसर हो जाएगा (
भारत ९९ साल की लीज पर है और ६५ वर्ष पूर्ण हो चुके है अगले ३३ वर्षों में
भारतियों को पाश्चात्य संस्कृति और विदेशी सामान की ऐसी लत लगा दी जायेगी की
भारत आर्थिक गुलाम बन जाएगा )

 

जये हो सेकुलर इण्डिया के सेकुलर लोगो की , अपनी माँ बहनों के दलालों की

जये हो भारत माँ को बेचने का सपना बुनने वाले सूअरों की गे हो ||


जागो हिन्दुओं जागो सेकुलर नहीं सनातनी बनो , इन्डियन नहीं भारतीय बनो ||

कसम खाओ की अगर दुर्भाग्यवश ऍफ़ डी आई आई है तो एक रुपये का भी व्यापार उनको
नहीं देंगे और दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगे और जो भी
राष्ट्रवादी संगठन ऍफ़ डी आई का विरोध करेगा उसका साथ जमीन पर उतर कर देंगे ||
याद रखे राष्ट्रवादी संगठन , अवसरवादी संगठन नहीं ||

जय जय सियाराम ,, जय जय महाकाल ,, जय जय माँ भारती ||

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मित्रो को भी जागरूक करें–

Ayurveda..उरद की दाल से बना दही वड़ा ।

उरद की दाल से बना दही वड़ा । ______________________  मित्रो आयूर्वेद के अनुसार कभी भी दो विरुद्ध वस्तूये एक साथ नहीं खानी चाहिए ।  विरुद्ध वस्तुओ से अभिप्राय ऐसी वस्तूए जिनका गुण - धर्म अलग हो ।  ऐसी कुछ 103 चीज़े आयूर्वेद में बाताई गई है । जो एक साथ कभी नहीं खानी चाहिए ।    उदाहरण के लिये प्याज और दूध कभी एक साथ न खाये ।  एक दुसरे के जानी दुशमन हैं । इसको खाने से सबसे ज्यादा चमड़ी के रोग आपको होगें दाद,खाज ,खुजली,एगसिमा ,सोराईसिस, आदि ।  ऐसी ही कटहल (jack fruit )और दूध कभी न खाये । ये भी जानी दुश्मन हैं ।  ऐसे ही खट्टे फ़ल जिनमे सिट्रिक ऐसिड होता है कभी न खायें । एक सिट्रिक ऐसिड तो इनसान का बनाया है एक भगवान का बनाया है । जैसे संतरा । कभी दूध के साथ न खाये ।  आयुर्वेद के अनुसार अगर कोई खट्‌टा फ़ल दूध के साथ खाने वाला है वो एक ही है आवला । आवला दूध के साथ जरुर खाये ।  इसी तरह शहद और घी कभी भी एक साथ न खायें ।  आम की दोस्ती दूध से जबरद्स्त हैं लेकिन खट्टे आम की नहीं |इसलिये मैग़ो शेक पी रहे है तो ध्यान रखे आम खट्‌टा ना हो । ।  ऐसी ही उरद की दाल और दही एक दुसरे के जानी दुशमन हैं । उरद की दाल पर भारत में जितनी रिसर्च हो चुकी हैं तो ये पता लगा ये दालो की राजा है । हमेशा अकेले ही खाये दही के साथ तो भूल कर भी ना खाये ।   आप इसका अपने शरीर पर परिकक्षण करे । एक खाने से पहले अपना b.P चैक करें । फ़िर उरद की दाल और दही खाये । आप पायेगें 22 से 25 % आपका B.P बढ़ा हुआ होगा । अर्थात ये अगर रोज रोज आप उरद की दाल , दही खा रहें है तो 5,6 महीने में हार्ट अटैक आ ही जायेगा ।  इसका मतलब (दही वाड़ा ) कभी नहीं । क्योंके दही वाड़ा मे अगर वाड़ा उरद की दाल का बना हैं । और आप उसे दही के साथ खा रहें है तो बहुत तकलीफ़ करने वाला है ।  हां अगर आपको खाना है तो जरुर खायें लेकिन दही के साथ नहीं चटनी के साथ खायें ।   इस लिये अगर घर में विवाह है तो मीनो बनाते समय जरुर ध्यान रखें । उरद की दाल का वड़ा दही के साथ परोस कर दोहरे पाप के भागी न बने । क्योंके आतिथि देवो भव । मेहमान भगवान का रुप हैं । उसके हनिकारक वास्तुये न खिलाये ।  या वो वड़ा मूंग की दाल का बनवाये । उरद की दाल का है तो दही के साथ नहीं चटनी के साथ खाये ।  धन्यवाद जरुर शेयर करें ।  must must click here !!  http://www.youtube.com/watch?v=YI5XgzMvSU0  वन्देमातरम !!!
उरद की दाल से बना दही वड़ा ।
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मित्रो Ayurveda के अनुसार कभी भी दो विरुद्ध वस्तूये एक साथ नहीं खानी चाहिए ।

विरुद्ध वस्तुओ से अभिप्राय ऐसी वस्तूए जिनका गुण – धर्म अलग हो ।

ऐसी कुछ 103 चीज़े आयूर्वेद में बाताई गई है । जो एक साथ कभी नहीं खानी चाहिए ।

उदाहरण के लिये प्याज और दूध कभी एक साथ न खाये ।

एक दुसरे के जानी दुशमन हैं । इसको खाने से सबसे ज्यादा चमड़ी के रोग आपको
होगें दाद,खाज ,खुजली,एगसिमा ,सोराईसिस, आदि ।

ऐसी ही कटहल (jack fruit )और दूध कभी न खाये । ये भी जानी दुश्मन हैं ।

ऐसे ही खट्टे फ़ल जिनमे सिट्रिक ऐसिड होता है कभी न खायें । एक सिट्रिक
ऐसिड तो इनसान का बनाया है एक भगवान का बनाया है । जैसे संतरा । कभी दूध
के साथ न खाये ।

आयुर्वेद के अनुसार अगर कोई खट्‌टा फ़ल दूध के साथ खाने वाला है वो एक
ही है आवला । आवला दूध के साथ जरुर खाये ।

इसी तरह शहद और घी कभी भी एक साथ न खायें ।

आम की दोस्ती दूध से जबरद्स्त हैं लेकिन खट्टे आम की नहीं |इसलिये मैग़ो
शेक पी रहे है तो ध्यान रखे आम खट्‌टा ना हो । ।

ऐसी ही उरद की दाल और दही एक दुसरे के जानी दुशमन हैं ।
उरद की दाल पर भारत में जितनी रिसर्च हो चुकी हैं तो ये पता लगा ये दालो
की राजा है । हमेशा अकेले ही खाये दही के साथ तो भूल कर भी ना खाये ।

आप इसका अपने शरीर पर परिकक्षण करे । एक खाने से पहले अपना b.P चैक करें
। फ़िर उरद की दाल और दही खाये । आप पायेगें 22 से 25 % आपका B.P बढ़ा हुआ
होगा । अर्थात ये अगर रोज रोज आप उरद की दाल , दही खा रहें है तो 5,6
महीने में हार्ट अटैक आ ही जायेगा ।

इसका मतलब (दही वाड़ा ) कभी नहीं ।
क्योंके दही वाड़ा मे अगर वाड़ा उरद की दाल का बना हैं । और आप उसे दही के
साथ खा रहें है तो बहुत तकलीफ़ करने वाला है ।

हां अगर आपको खाना है तो जरुर खायें लेकिन दही के साथ नहीं चटनी के साथ खायें ।

इस लिये अगर घर में विवाह है तो मीनो बनाते समय जरुर ध्यान रखें । उरद की
दाल का वड़ा दही के साथ परोस कर दोहरे पाप के भागी न बने ।
क्योंके आतिथि देवो भव । मेहमान भगवान का रुप हैं । उसके हनिकारक
वास्तुये न खिलाये ।

या वो वड़ा मूंग की दाल का बनवाये । उरद की दाल का है तो दही के साथ नहीं
चटनी के साथ खाये ।

धन्यवाद जरुर शेयर करें ।

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वन्देमातरम !!!

POLICE ….क्या आपको पता हे police के हाथ में डंडा क्यों होता हे

Like ✔ Comment✔ Tag ✔ Share ✔ @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit] अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पे जाके विडियो देखे : http://www.youtube.com/watch?v=lCQPy6AL5uk  पुलिस है डंडा लेके घुमती है। आप किसी पुलिस ऑफिसर्स से पूछिए के डंडा क्यों है तुम्हारे हात में या किसी कांस्टेबल से पूछिए के तुम ये डंडा ठक ठक करके घूमते हो ... क्यों डंडा है तुम्हारे हात में ? किसी और अधिकारी के हात में आपने डंडा देखा है ? पुलिस की ही हात में डंडा क्यों? बड़ा ऑफिसर है तो छोटा रूल लेके चलेगा और छोटा अधिकारी है तो लम्बा सा डंडा लेके चलेगा। क्यों ?? कोई भेड़ बखरीओं को चराने जाना है क्या ? गाँव का कोई लकडहारा भेड़ बखरीओं को चराने जाता है तो डंडा लेके जाता है, तो भाई डंडे से भैंस को हांकता है बखरी को हांकता है तो ठीक है लेकिन तुम पुलिसवाले ये डंडा लेके क्यों ठक ठक करते हो ?  पुलिस मैन्युअल में ये लिखा हुआ है के हर पुलिस ऑफिसर को डंडा लेना ही पड़ेगा। 1860 का कानून है Indian Police Act , उस कानून में ये लिखा हुआ है के पुलिस जो है वो अंग्रेजो का है और डंडा जिस पर चलेगा वो भारतीय लोग है, तो अंग्रेजो की पुलिस के हर एक व्यक्ति के हात में डंडा होना चाहिए ताकि वो भारतीय लोगों को जब चाहे तब पिट सके। तो Indian Police Act के हिसाब से हर अंग्रेज पुलिस ऑफिसर को एक अधिकार दिया गया है जिसको अंग्रेजी में कहते है Right to Offence और भारतवासी जिसकी पिटाई हो रही है उसको कोई अधिकार नही है Right to Defense आपको अपने Defense करने का कोई अधिकार नही है। अगर पुलिस ऑफिसर ने डंडा चलाया और आपने उसका डंडा पकड़ लिया तो केस आपके ऊपर बनेगा नाकि ऑफिसर के ऊपर के आपने एक पुलिस ऑफिसर को उसकी ड्यूटी करने से रोका।  यह कानून 1860 का बनाया हुआ आज भी चल रहा है और पुरे देश में लाबू है, उसमे कहीं कोई बदलाव नही हुआ है। @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit]
अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए लिंक पे जाके विडियो देखे :
http://www.youtube.com/watch?v=lCQPy6AL5uk

police है डंडा लेके घुमती है। आप किसी पुलिस ऑफिसर्स से पूछिए के डंडा क्यों है तुम्हारे हात में या किसी कांस्टेबल से पूछिए के तुम ये डंडा ठक ठक करके घूमते हो … क्यों डंडा है तुम्हारे हात में ? किसी और अधिकारी के हात में आपने डंडा देखा है ? पुलिस की ही हात में डंडा क्यों? बड़ा ऑफिसर है तो छोटा रूल लेके चलेगा और छोटा अधिकारी है तो लम्बा सा डंडा लेके चलेगा। क्यों ?? कोई भेड़ बखरीओं को चराने जाना है क्या ? गाँव का कोई लकडहारा भेड़ बखरीओं को चराने जाता है तो डंडा लेके जाता है, तो भाई डंडे से भैंस को हांकता है बखरी को हांकता है तो ठीक है लेकिन तुम पुलिसवाले ये डंडा लेके क्यों ठक ठक करते हो ?

पुलिस मैन्युअल में ये लिखा हुआ है के हर पुलिस ऑफिसर को डंडा लेना ही पड़ेगा। 1860 का कानून है Indian Police Act , उस कानून में ये लिखा हुआ है के पुलिस जो है वो अंग्रेजो का है और डंडा जिस पर चलेगा वो भारतीय लोग है, तो अंग्रेजो की पुलिस के हर एक व्यक्ति के हात में डंडा होना चाहिए ताकि वो भारतीय लोगों को जब चाहे तब पिट सके। तो Indian Police Act के हिसाब से हर अंग्रेज पुलिस ऑफिसर को एक अधिकार दिया गया है जिसको अंग्रेजी में कहते है Right to Offence और भारतवासी जिसकी पिटाई हो रही है उसको कोई अधिकार नही है Right to Defense आपको अपने Defense करने का कोई अधिकार नही है। अगर पुलिस ऑफिसर ने डंडा चलाया और आपने उसका डंडा पकड़ लिया तो केस आपके ऊपर बनेगा नाकि ऑफिसर के ऊपर के आपने एक पुलिस ऑफिसर को उसकी ड्यूटी करने से रोका।

यह कानून 1860 का बनाया हुआ आज भी चल रहा है और पुरे देश में लाबू है, उसमे कहीं कोई बदलाव नही हुआ है।
राजीव दीक्षित Rajiv Dixit

परशुराम का फरशा .. सबसे आश्चर्य की बात कि इसमें कभी जंग नहीं लगता।

हमारे शास्त्रों में वर्णन किया गया है परशुराम जी अमर है,सहस्त्रबाहु का वध करने के बाद परशुराम ने महर्षि कश्यप के सानिध्य में अश्वमेघ यज्ञ किया था।।तथा सारी धरती को जीत कर कश्यप को दान में दे दी थी।।परशुराम जी के कुछ निशान झारखंड में आज भी मौजूद है .

त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने जनकपुर में आयोजित सीता माता के स्वयंवर में शिव जी का धनुष तोड़ा तो वहां पहुंचे भगवान परशुराम काफी क्रोधित हो गए। इस दौरान लक्ष्मण से उनकी लंबी बहस हुई।

बहस के बीच में ही जब परशुराम को पता चला कि भगवान श्रीराम स्वयं नारायण ही हैं तो उन्हें बड़ी आत्मग्लानि हुई। शर्म के मारे वे वहां से निकल गए और पश्चाताप करने के लिए घने जंगलों के बीच एक पर्वत श्रृंखला में आ गए। यहां वे भगवान शिव की स्थापना कर आराधना करने लगे। बगल में उन्होंने अपना परशु अर्थात फरसे को गाड़ दिया।

परशुराम ने जिस जगह फरसे को गाड़ कर शिव जी की अराधना की वह झारखंड प्रांत के गुमला जिले में स्थित डुमरी प्रखंड के मझगांव में स्थित है। झारखंड में फरसा को टांगी कहा जाता है, इसलिए इस स्थान का नाम टांगीनाथ धाम पड़ गया। धाम में आज भी भगवान परशुराम के पद चिह्न मौजूद हैं।

कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान परशुराम ने लंबा समय बिताया। टांगीनाथ धाम, इसका पश्चिम भाग छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिला व सरगुजा से सटा हुआ है। वहीं उत्तरी भाग पलामू जिले व नेतरहाट की तराई से घिरा हुआ है। छोटानागपुर के पठार का यह उच्चतम भाग है, जो सखुवा के हरे भरे वनों से आच्छादित है।

जमीन में 17 फीट धंसे इस फरसे की ऊपरी आकृति कुछ त्रिशूल से मिलती-जुलती है। इसलिए स्थानीय लोग इसे त्रिशूल भी कहते हैं। सबसे आश्चर्य की बात कि इसमें कभी जंग नहीं लगता। खुले आसमान के नीचे धूप, छांव, बरसात, ठंड का कोई असर इस त्रिशूल पर नहीं पड़ता है। अपने इसी चमत्कार के कारण यह विश्वविख्यात है।

कहा जाता है टांगीनाथ धाम में साक्षात भगवान शिव निवास करते हैं। सावन व महाशिवरात्रि में यहां हजारों की संख्या में शिवभक्त आते हैं इसके पीछे भी एक बड़ी ही रोचक कथा है। कहते हैं शिव इस क्षेत्र के पुरातन जातियों से संबंधित थे। शनिदेव के किसी अपराध के लिए शिव ने त्रिशूल फेंक कर वार किया। त्रिशूल डुमरी प्रखंड के मझगांव की चोटी पर आ धंसा। लेकिन उसका अग्र भाग जमीन के ऊपर रह गया। त्रिशूल जमीन के नीचे कितना गड़ा है, यह कोई नहीं जानता। 17 फीट एक अनुमान ही है।

टांगीनाथ धाम में कई पुरातात्विक व ऐतिहासिक धरोहर हैं। यहां की कलाकृतियां व नक्काशियां देवकाल की कहानी बयां करती है। साथ ही कई ऐसे स्रोत हैं, जो त्रेता युग में ले जाते हैं। इन स्रोतों का अध्ययन किया जाए, तो गुमला जिले को एक अलग पहचान मिल सकती है।

1989 ई. में पुरातत्व विभाग ने टांगीनाथ धाम के रहस्यों से पर्दा हटाने के लिए अध्ययन किया था। यहां जमीन की भी खुदाई की गई थी। उस समय भारी मात्रा में सोने व चांदी के आभूषण सहित कई बहुमूल्य वस्तुएं मिली थीं। लेकिन कतिपय कारणों से खुदाई पर रोक लगा दिया गया। इसके बाद टांगीनाथ धाम के पुरातात्विक धरोहर को खंगालने के लिए किसी ने पहल नहीं की।

खुदाई से हीरा जड़ा मुकुट, चांदी का सिक्का (अद्र्ध गोलाकार), सोना का कड़ा, कान की बाली सोना का, तांबा का टिफिन जिसमें काला तिल व चावल मिला था, जो आज भी डुमरी थाना के मालखाना में रखे हुए हैं।

टांगीनाथ धामों में यत्र तत्र सैकंडों की संख्या में शिवलिंग है। बताया जाता है कि यह मंदिर शाश्वत है। स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने टांगीनाथ धाम की रचना की थी। वर्तमान में यह खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां की बनावट, शिवलिंग व अन्य स्रोतों को देखने से ऐसा लगता भी है कि इसे आम आदमी नहीं बना सकता है।

त्रिशूल के अग्र भाग को मझगांव के लोहरा जाति के लोगों ने काटने का प्रयास किया था। त्रिशूल कटा नहीं, पर कुछ निशान हो गए। इसकी कीमत लोहरा जाति को उठानी पड़ी। आज भी इस इलाके में 10 से 15 किमी की परिधि में इस जाति का कोई व्यक्ति निवास नहीं करता। अगर कोई निवास करने का प्रयास करता है, तो उसकी मृत्यु को हो जाती है। टांगीनाथ धाम में विश्रामागार नहीं है। लाइट की व्यवस्था, चलने लायक सड़क नहीं है।
राजीव दीक्षित Rajiv Dixit

 

snake bite treatment at home साप के काटने का इलाज

snake bite सांप काटने का सबसे सस्ता और बढ़िया इलाज जरुर पढ़ें 

दोस्तो सबसे पहले snake bite के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये ! कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के snake है ! जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है ! ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं ! इनमे से मुश्किल से 10 snake है जो जहरीले है सिर्फ 10 ! बाकी सब non poisonous है! इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा !! बिलकुल चिंता मत करिए !




snake bite first aid in hindi

लेकिन साँप के काटने का डर snake bite इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) की कई बार आदमी heart attack से मर जाता है !जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है ! तो डर इतना है मन मे ! तो ये डर निकलना चाहिए !

वो डर कैसे निकलेगा ????


जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है और डराने पर या अचानक सांप काट लेता है snake bite लेकिन ज्यादा चिंता की कोई बात नही उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं ! जिनके काटने snake bite से कोई मरता है ! इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है !

russell viper ! उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra ! king cobra जिसको आप कहते है काला नाग !! ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमे से किसी ने काट लिया तो 99 % chances है कि death होगी !

लेकिन अगर आप थोड़ी होशियारी दिखाये तो आप रोगी को बचा सकते हैं होशियारी क्या दिखनी है ???
आपने देखा होगा साँप जब भी काटता (snake bite) है तो उसके दो दाँत है जिनमे जहर है जो शरीर के मास के अंदर घुस जाते हैं ! और खून मे वो अपना जहर छोड़ देता है

तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है ! मान लीजिये हाथ पर साँप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया (snake bite) तो फिर ऊपर की और heart तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा ! कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा ! और पूरे शरीर मे उसे पहुँचने मे 3 घंटे लगेंगे !

मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा ! जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुँच जाएगा तभी उसकी death होगी otherwise नहीं होगी ! तो 3 घंटे का time है रोगी को (snake bite) से बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है ! 

क्या कर सकते हैं ?? ???

rattlesnake bite treatment tips in hindi

घर मे कोई पुराना इंजेक्शन (injection) हो तो उसे ले और आगे जहां सुई(needle) लगी होती है वहाँ से काटे ! सुई(needle) जिस पलास्टिक मे फिट होती है उस प्लास्टिक वाले हिस्से को काटे !! जैसे ही आप सुई के पीछे लगे पलास्टिक वाले हिस्से को काटेंगे तो वो injection एक सक्षम पाईप की तरह हो जाएगा ! बिलकुल वैसा ही जैसा होली के दिनो मे बच्चो की पिचकारी होती है !

उसके बाद आप रोगी के शरीर पर जहां साँप ने काटा (snake bite) है वो निशान ढूँढे ! बिलकुल आसानी से मिल जाएगा क्यूंकि जहां साँप काटता है वहाँ कुछ सूजन आ जाती है और दो निशान जिन पर हल्का खून लगा होता है आपको मिल जाएँगे ! अब आपको वो injection( जिसका सुई वाला हिस्सा आपने काट दिया है) लेना है और उन दो निशान मे से पहले एक निशान पर रख कर उसको खीचना है ! जैसे आप निशान पर injection रखेंगे वो निशान पर चिपक जाएगा तो उसमे vacuum crate हो जाएगा ! और आप खींचेगे तो खून उस injection मे भर जाएगा !

बिलकुल वैसे ही जैसे बच्चे पिचकारी से पानी भरते हैं ! तो आप इंजेक्शन से खींचते रहिए !और आप first time निकालेंगे तो देखेंगे कि उस खून का रंग हल्का blackish होगा या dark होगा तो समझ लीजिये उसमे जहर मिक्स हो गया है !

तो जब तक वो dark और blackish रंग blood निकलता रहे आप खिंचीये ! तो वो सारा निकल आएगा ! क्यूंकि साँप जो काटता (snake bite) है उसमे जहर ज्यादा नहीं होता है

0.5 मिलीग्राम के आस पास होता है क्यूंकि इससे ज्यादा उसके दाँतो मे रह ही नहीं सकता ! तो 0.5 ,0.6 मिलीग्राम है दो तीन बार मे आपने खीच लिया तो बाहर आ जाएगा ! और जैसे ही बाहर आएगा आप देखेंगे कि रोगी मे कुछ बदलाव आ रहा है थोड़ी consciousness (चेतना) आ जाएगी ! साँप काटने से व्यकित unconsciousness हो जाता है या semi consciousness हो जाता है और जहर को बाहर खींचने से चेतना आ जाती है ! consciousness आ गई तो वो मरेगा नहीं !

तो ये आप उसके लिए first aid (प्राथमिक सहायता) (snake bite) कर सकते हैं !

इसी injection को आप बीच से कट कर दीजिये बिलकुल बीच कट कर दीजिये 50% इधर 50% उधर ! तो आगे का जो छेद है उसका आकार और बढ़ जाएगा और खून और जल्दी से उसमे भरेगा ! तो ये आप रोगी के लिए first aid (प्राथमिक सहायता) (snake bite) के लिए ये कर सकते हैं !

copperhead snake bite facts

दूसरा एक medicine आप चाहें तो (snake bite) के लिए हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है homeopathy मे आती है ! उसका नाम है NAJA (N A J A ) ! homeopathy medicine है किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी potency है 200 ! आप दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो ! तो दुकानदार आपको दे देगा ! ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा (snake bite) में इससे 100 लोगो की जान इससे बच जाएगी !

और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 70 से 80 रुपए की उससे (snake bite) में आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा(snake bite) है !

और ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक ! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा (snake bite) तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! 

medicine भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं ! आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है !(snake bite)

तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब (snake bite) में देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये

1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे !! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है !

और राजीव भाई video मे बताते है कि (snake bite) ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने (snake bite) के एलोपेथी मे जो injection है वो आम अस्तप्तालों मे नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !!

और जो ये एलोपेथी वालो के पास injection है इसकी कीमत 10 से 15 हजार रुपए है ! और अगर मिल जाएँ तो डाक्टर एक साथ 8 से -10 injection ठोक देता है !

कभी कभी 15 तक ठोक देता है मतलब लाख-डेड लाख तो आपका एक बार मे साफ !! और यहाँ सिर्फ 10 रुपए की medicine से आप उसकी जान बचा सकते हैं !

और राजीव भाई इस video मे बताते है कि injection जितना effective है मैं इस दवा(NAJA) की गारंटी लेता हूँ ये दवा एलोपेथी के injection से 100 गुना (times) ज्यादा effective है !

तो अंत आप याद रखिए घर मे किसी को साँप काटे (snake bite) और अगर दवा(NAJA) घर मे न हो ! फटाफट कहीं से injection लेकर first aid (प्राथमिक सहायता) के लिए आप injection वाला उपाय शुरू करे ! और अगर दवा है तो फटाफट पहले दवा पिला दे और उधर से injection वाला उपचार भी करते रहे ! दवा injection वाले उपचार से ज्यादा जरूरी है !!
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तो ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ जाए ! या पड़ोसी के जीवन मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये NAJA 200 hoeopathy दवा ! 10 – 10 मिनट बाद 1 – 1 बूंद तीन बार रोगी की जान बचा सकती है !!

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देश की सुरक्षा खतर में …. चाइनीज पेन ड्राइव से

मित्रो ये हमारे लिए बड़े शर्म की बात है की हम एक छोटी सी पेन ड्राइव भी दुसरे देश से मंगनी पड़ती है और इसी चीज़ का फायेदा चीन ने उठाया है जिससे हमारे देश की सुरक्षा तक खतरे में पड़ गयी है आपको यकीं नहीं होगा अगर इस समय युद्थ हो गया तो तो चीन हमे कुछ दिन में ही पंगु कर देगा.. क्योकि जो भी हम रणनीति बनायेगे वो तुरंत ही चीन में पहुच जाएगी.. इसका कारण है ये छोटी सी पेन ड्राइव.. पेन ड्राइव एक ऐसा छोटा सा उपकरण है जिसमें कोई भी जानकारी रख सकते है तथा इसे किसी भी समय कहीं पर भी ले जाया जा सकता है। प्रतिबंध के बावजूद सुरक्षा बलों में पेन ड्राइव एक प्रमुख खतरे के रूप में सामने आए हैं, क्योंकि तीनों सैन्य सेवाओं में हुई सुरक्षा चूकों के 70 प्रतिशत मामलों में यही उपकरण जिम्मेदार है। आज कल चीन जो पेन ड्राइव भारत में भेज रहा है उसमे एक चीप लगी आ रही है जो नेट कांनेट कंप्यूटर में लगते ही कंप्यूटर का सारा डाटा भेजने लगती है हमारे सैन्य अधिकारियो के कंप्यूटर में उपस्तिथ देश की सुरक्षा का पूरा डाटा एक बार कनेक्ट होते ही ये पेन ड्राइव सारा का सारा डाटा दुश्मन के हाथ में भेज सकती है..  सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में पेन ड्राइव का इस्तेमाल बढ़ गया है, क्योंकि यह सूचना भंडारण और उन्हें आसानी से कहीं भी ले जाने वाला उपकरण है। आंतरिक रपटों में इस बात की पुष्टि हुई है कि सशस्त्र सेनाओं में 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा चूकें इसके अनधिकृत उपयोग के कारण हुईं। उन्होंने कहा कि पेन ड्राइव, जिनमें से अधिकतर चीन में बनी होती है, अगर सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो देश राम भरोसे है... @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit]
मित्रो ये हमारे लिए बड़े शर्म की बात है की हम एक
छोटी सी पेन ड्राइव भी दुसरे देश से मंगनी पड़ती है
और इसी चीज़ का फायेदा चीन ने उठाया है
जिससे हमारे देश की सुरक्षा तक खतरे में पड़ गयी है
आपको यकीं नहीं होगा अगर इस समय युद्थ हो गया तो
तो चीन हमे कुछ दिन में ही पंगु कर देगा..
क्योकि जो भी हम रणनीति बनायेगे वो तुरंत ही
चीन में पहुच जाएगी..
इसका कारण है ये छोटी सी पेन ड्राइव..
पेन ड्राइव एक ऐसा छोटा सा उपकरण है जिसमें कोई भी जानकारी रख सकते है तथा इसे किसी भी समय कहीं पर भी ले जाया जा सकता है। प्रतिबंध के बावजूद सुरक्षा बलों में पेन ड्राइव एक प्रमुख खतरे के रूप में सामने आए हैं, क्योंकि तीनों सैन्य सेवाओं में हुई सुरक्षा चूकों के 70 प्रतिशत मामलों में यही उपकरण जिम्मेदार है।
आज कल चीन जो पेन ड्राइव भारत में भेज रहा है उसमे एक चीप लगी आ रही है जो नेट कांनेट कंप्यूटर में लगते ही कंप्यूटर का सारा डाटा भेजने लगती है हमारे सैन्य अधिकारियो के कंप्यूटर में उपस्तिथ देश की सुरक्षा का पूरा डाटा
एक बार कनेक्ट होते ही ये पेन ड्राइव सारा का सारा डाटा दुश्मन के हाथ में भेज सकती है..

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में पेन ड्राइव का इस्तेमाल बढ़ गया है, क्योंकि यह सूचना भंडारण और उन्हें आसानी से कहीं भी ले जाने वाला उपकरण है। आंतरिक रपटों में इस बात की पुष्टि हुई है कि सशस्त्र सेनाओं में 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा चूकें इसके अनधिकृत उपयोग के कारण हुईं। उन्होंने कहा कि पेन ड्राइव, जिनमें से अधिकतर चीन में बनी होती है,
अगर सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया
तो देश राम भरोसे है…

valentine’s day की कहानी::!


ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और अपने मित्रो को बताए Like ✔ Comment✔ Tag ✔ Share ✔  @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit]  वैलेंटाइन डे की कहानी::! पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे ! http://www.youtube.com/watch?v=J7JqnWcj6RM  मित्रो यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ | आपने एक शब्द सुना होगा "Live in Relationship" ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अिभजात्य वगर् में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि "बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना" | तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है,  खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि "मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है" अरस्तु भी यही कहता है, देकातेर् भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि "एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It's Highly Impossible" | तो वहां एक पत्नि जैसा कुछ होता नहीं | और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि "स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती" "स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये " | तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद |  उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि "हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो" ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर |  संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि "आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दशर्न का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो", तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |  जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, क्लौड़ीयस ने कहा कि "ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है", तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि "जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ ", तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये |  क्लौड़ीयस नेवैलेंटाइन से कहा कि "ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधमर् फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो" तो वैलेंटाइन ने कहा कि "मुझे लगता है कि ये ठीक है" , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दिया गया |  पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी | तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |  अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं | और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है " Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है "क्या आप मुझसे शादी करेंगे" | मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये ही कार्ड वो दे देते हैं |  और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुआधार प्रचार कर दिया | ये सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों ??????   आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !! एक बार यहाँ जरूर click करे !! http://www.youtube.com/watch?v=J7JqnWcj6RM  अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय ! @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit] वन्देमातरम 
 
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मित्रो यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ | आपने एक शब्द सुना होगा “Live in Relationship” ये शब्द आज कल हमारे
देश में भी नव-अिभजात्य वगर् में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि “बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना” | तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है,

खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि “मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है” अरस्तु भी यही कहता है, देकातेर् भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि “एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It’s Highly Impossible” | तो वहां एक पत्नि जैसा कुछ होता नहीं | और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि “स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती” “स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये ” | तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था – वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद |

उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि “हम लोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो” ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर |

संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि “आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दशर्न का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो”, तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |

जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, क्लौड़ीयस ने कहा कि “ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है”, तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि “जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ “, तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये |

क्लौड़ीयस नेवैलेंटाइन से कहा कि “ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधमर् फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो” तो वैलेंटाइन ने कहा कि “मुझे लगता है कि ये ठीक है” , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी को फाँसी दे दिया गया |

पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तक खुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी | तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे
मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फ़िरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |

अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं | और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है ” Would You Be My Valentine” जिसका मतलब होता है “क्या आप मुझसे शादी करेंगे” | मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये
ही कार्ड वो दे देते हैं |

और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुआधार प्रचार कर दिया | ये सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों ??????

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !!
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bharat देश की बुनीयाद को बर्बाद करने की साजिश सफल हो गई, जाने 1823 से पहले की कहनी

 Indian Education Act – 1858 VS GURUKUL
 **Indian Education Act -* 1858 में Indian Education Act बनाया गया*

इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकोले ने की थी
लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W.Litnar और दूसरा था T…homas Munro, दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था , 1823 के आसपास की बात है ये Litnar , जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100 % साक्षरता है, और उस समय जब भारत में इतनी साक्षरता है  और मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे, और मैकोले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है 
“कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह 
जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी
 शिक्षा व्यवस्था लानी होगी “
इसलिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया, जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज के तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी, फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया, और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमे आग लगा दी, उसमे पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा-पीटा, जेल में डाला 
1850 तक इस देश में 7 लाख 32 हजार गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे 7 लाख 50 हजार, मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में Higher Learning Institute हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था, और ये गुरुकुल समाज के लोग मिल के चलाते थे न कि राजा, महाराजा, और इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे फ्री स्कूल कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं और मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमे वो लिखता है कि “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी ” और उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ?
शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी ………………….

*जिस यूरोप को हम आधुनिक व खुले विचारो वाला मानते हैं, आज से ५०० वर्ष पहले वहाँ सामान्य व्यक्ति ‘मैरेज’ भी नहीं कर सकता था क्योंकि उनके बहुत बड़े’ दार्शनिक’ अरस्तू का मानना था की आम जनता मैरेज करेगी तो उनका परिवार होगा, परिवार होगा तो उनका समाज होगा, समाज होगा तो समाज शक्तिशाली बनेगा, *
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*शक्ति शाली हो गया तो राजपरिवार के लिए खतरा बन जाएगा । इसलिए आम जनता को मैरेज न करने दिया जाय । बिना मैरेज के जो बच्चे पैदा खोते थे, उन्हें पता न चले की कौन उनके माँ-बाप हैं, इसलिए उन्हें एक सांप्रदायिक संस्था में रखा जाता था, जिसे वे कोन्बेंट कहते थे उस संस्था के प्रमुख को ही माँ बाप समझे इसलिए उन्हें फादर, मदर, सिस्टर कहा जाने लगा ।* 


क्या आप Bharat Mata के इस सच्चे सपूत को जानते हें अगर नही तो जाने वन्दे मातरम

राजीव भाई का परिचय

राजीव भाई की शहादत

Swadeshi के प्रखर प्रवक्ता, चिंतक, जुझारू, निर्भीक व सत्य को दृढ़ता से रखने के लिए पहचाने जाने वाले भाई राजीव दीक्षित जी 30 नवम्बर 2010 को भिलाई (छत्तीसगढ़) में शहीद हो गए | वे भारत स्वाभिमान और आज के स्वदेशी आंदोलन के पहले शहीद है| राजीव भाई भारत स्वाभिमान यात्रा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे | यह परमात्मा का अजीब संयोग ही कहा जायेगा कि श्री राजीव जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को रात्रि 12:20 पर हुआ था और उनका देहावसान भी 30 नवम्बर 2010 को रात्रि 12 बजे के बाद ही हुआ। 1 दिसम्बर 2010 को अंतिम दर्शन के लिए उनको पतंजलि योगपीठ में रखा गया था| राजीव भाई के अनुज प्रदीप दीक्षित और परम पूज्य स्वामी रामदेव जी ने उन्हे मुखाग्नि दी| परमपूज्य Swami Ramdev ji महाराज व आचार्य बालकृष्ण जी ने राजीव भाई के निधन पर गहरा दुःख वयक्त किया है| सम्पूर्ण देश में 1 दिसम्बर को दोपहर 3 बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया|

राजीव भाई का जीवन परिचय

स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता एवं भारत स्वाभिमान के राष्ट्रीय सचिव भाई राजीव दीक्षित जी का जन्म उप्र अलीगढ़ जनपद के अनरौली तहलीस के नाह गांव में तीस नवम्बर 1967 में हुआ । राजीव जी की इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई । राधेश्याम दीक्षित के घर में जन्मे श्री राजीव जी का अधिकांश समय वर्धा में व्यतीत हुआ। राजीव भाई के जीवन में सरलता और नम्रता थी। वे संयमी, सदाचारी ब्रह्मचारी तथा बलिदानी थे। वे निरन्तर साधना की जिन्दगी जीते थे। 1999 में राजीव जी के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने देश में धूम मचा दी थी। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार गाँव गाँव शहर शहर घूमकर भारत के उत्थान के लिए और देश विरोधी ताकतों और भ्रष्टाचारियों को पराजित करने के लिए जन जाग्रति पैदा कर रहे थे.

राजीव भाई के बारे में

राजीव भाई पिछले 20 वर्षों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद के खिलाफ तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे| वे भारत को पुर्नगुलामी से बचाना चाहते थे| वे उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ जिले के नाह गाँव में जन्मे थे| उनकी प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा फ़िरोज़ाबाद में हुई उसके बाद 1994 में उच्च शिक्षा के लिए वे इलाहबाद गए| वे सेटेलाइट टेलेकम्युनिकेशन में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे लेकिन अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ कर देश को विदेशी कंपनियों की लूट से मुक्त कराने और भारत को स्वदेशी बनाने के आंदोलन में कूद पड़े| शुरू में भगतसिंह, उधमसिंह और चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे महान क्रांतिकारियों से प्रभावित रहे| बाद में जब गांधीजी को पढ़ा तो उनसे भी प्रभावित हुए|

भारत को स्वदेशी बनाने में उनका योगदान

पिछले 20 वर्षों में राजीव भाई ने भारतीय इतिहास से जो कुछ सिखा उसके बारे में लोगों को जागृत किया| अंग्रेज़ भारत क्यों आए थे, उन्होने हमें गुलाम क्यों बनाया, अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता, हमारी शिक्षा और उद्योगों को क्यों नष्ट किया, और किस तरह नष्ट किया इस पर विस्तार से जानकारी दी ताकि हम पुनः गुलाम न बन सकें| इन 20 वर्षों में राजीव भाई ने लगभग 15000 से अधिक व्याख्यान दिये जिनमे से कुछ हमारे पास उपलब्ध है| आज भारत में 5000 से अधिक विदेशी कंपनियाँ व्यापार करके हमें लूट रही है, उनके खिलाफ राजीव भाई ने स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की| देश में सबसे पहली स्वदेशी-विदेशी की सूची तैयार करके स्वदेशी अपनाने का आग्रह प्रस्तुत किया| 1991 में डंकल प्रस्तावों के खिलाफ घूम-घूम कर जन-जागृति की और रेलियाँ निकाली| कोका कोला और पेप्सी जैसे पेयों के खिलाफ अभियान चलाया और कानूनी कार्यवाही की|
1991-92 में राजस्थान के अलवर जिले में केडीया कंपनी के शराब कारखानों को बंद करवाने में भूमिका निभाई| 1995-96 में टिहरी बांध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चा और संघर्ष किया जहां भयंकर लाठी चार्ज में काफी चोटें आई| उसके बाद 1997 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात गांधीवादी इतिहासकार श्री धर्मपाल जी के सानिध्य में अंग्रेजों के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके देश को जागृत करने का काम किया| पिछले 10 वर्षों से परमपुज्य स्वामी रामदेव जी के संपर्क में रहने के बाद 9 जनवरी 2009 को परमपुज्य स्वामी रामदेव जी के नेतृत्व में भारत स्वाभिमान का जिम्मा अपने कंधों पर ले जाते हुए 30 नवम्बर 2010 को छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में भारत स्वाभिमान की रणभूमि में शहीद हुए|

राजीव भाई के नाम ‘ राजीव भवन ’

वे सच्चे अर्थों में गांधीवादी थे. उन्होंने मरते दम तक बिना अहंकार, स्वार्थ और स्व लाभ के देश और इसके निवासियों कि सेवा करते हुए अपना जीवन अर्पण कर दिया. उनके अंतिम संस्कार के समय परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी ने घोषणा की है कि उनके जन्म दिन ३० नवम्बर को स्वदेशी दिवस के रूप में मनाया जाएगा. साथ ही पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में बन रहे भारत स्वाभिमान भवन का नाम “राजीव भवन” रखा जाएगा.

राजीव भाई को सच्ची श्रद्धांजलि

हालांकि वे अब हमारे बीच नहीं रहे, परन्तु उनका जीवन ही हमारे लिए प्रेरणा बनकर राह दिखाता रहेगा । हमें उनके द्वारा देखे गए स्वप्न के अनुरूप भारत का निर्माण करना है । इसके लिए हमें भारत स्वाभिमान आन्दोलन को और तीव्रता देनी होगी । आज हम संकल्प ले की विदेशी वस्तुओ को त्याग कर स्वदेशी वस्तुओ और स्वदेशी कंपनियो को बढावा देगे । यही हमारी भाई राजीव दीक्षित जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी

 अधिक जानकारी के लिए देखे

http://www.rajivdixit.in/About.aspx

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