Category Archives: जेय माँ भारती

bharat के 11 आश्चर्य जनक सत्य


1 :- pentiyam  chip  का अविष्कार ” विनोद धाम ” ने किया था (अब दुनिया में 90 % कंप्यूटर इसी से   चलते हें)
2 :- श्री सबीर भाटिया ने hotmail  बनाई (hotmail  दुनिया का no1 प्रोग्राम हे )
3 :- अमेरिका में 38 % डॉक्टर भारतीय हें
4 :- अमेरिका में 12 % वैज्ञानिक भारतीय हें
5 :- नासा में 36 % वैज्ञानिक भारतीय हें
6 :- मैक्रोसोफ्ट के 34 % कर्मचारी भारतीय हें
7 :- IBN के 28 % कर्मचारी भारतीय हें
8 :- INTEL के 17% वैज्ञानिक भारतीय हें
9 :- JIRKS के 13 % कर्मचारी भारतीय हें
10 :- प्रसिद्ध खेल Shatranj की खोज भारत में हुई
11 :- दुनिया के पहले Airplane  की खोज भारत के वैज्ञानिक शिवकर बापूजी तलपडे ने की  यदि यकीं नही होता तो इस लिंक को देखें http://www.bharatyogi.net/2013/04/write-brothers.html

जो लोग भारत देश को कम आकते हें उन्हें यह सोचना चाहिए


वह धनबाद में तस्करों के लिए खौफ का कारण बनी रहीं।

पिता को बताए बिना यूपीएससी की परीक्षा दी और पास होकर आईपीएस बन गईं।  अगले नौ महीने इंसास, थ्री नॉट थ्री, पिस्टल आदि हथियारों से जमकर फायरिंग की प्रैक्टिस की।  सुमन की पहली पोस्टिंग हुई गया के नक्सली इलाके में,  जहां थोड़े ही समय पहले नरसंहार हुआ था।  वह टीम के साथ मौके पर पहुंची तो हिंसक भीड़ ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी।  सुमन ने जवाबी फायरिंग की। कुछ ही समय में भीड़ तीतर-बितर हो गई।   इसके बाद एक अन्य घटना में जंगल में नक्सली घात लगाकर बैठे थे। सुमन की टीम पर हमला हुआ तो साथी अफसर पीछे हटने लगे,  लेकिन वह आगे बढ़ती रहीं। अंधेरा होने के कारण आवाज की दिशा में फायरिंग की। मुठभेड़ में कुछ नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी मिली।  वह कहती हैं धनबाद में कोई पुरुष अधिकारी भी पोस्टिंग लेने से कतराता था, तब भी वह धनबाद में तस्करों के लिए खौफ का कारण बनी रहीं।   महिला दिवस की शुभकामनाएं ....   Via : @[212771912128701:274:स्वर्णिम हिंद का स्वर्णिम स्वप्न]  @[249847668462241:274:शंखनाद धर्म और राजनीति]

पिता को बताए बिना यूपीएससी की परीक्षा दी और पास होकर आईपीएस बन गईं।
अगले नौ महीने इंसास, थ्री नॉट थ्री, पिस्टल आदि हथियारों से जमकर फायरिंग की प्रैक्टिस की।

सुमन की पहली पोस्टिंग हुई गया के नक्सली इलाके में,
जहां थोड़े ही समय पहले नरसंहार हुआ था।
वह टीम के साथ मौके पर पहुंची तो हिंसक भीड़ ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी।
सुमन ने जवाबी फायरिंग की। कुछ ही समय में भीड़ तीतर-बितर हो गई।

इसके बाद एक अन्य घटना में जंगल में नक्सली घात लगाकर बैठे थे। सुमन की टीम पर हमला हुआ तो साथी अफसर पीछे हटने लगे,
लेकिन वह आगे बढ़ती रहीं। अंधेरा होने के कारण आवाज की दिशा में फायरिंग की। मुठभेड़ में कुछ नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी मिली।
वह कहती हैं धनबाद में कोई पुरुष अधिकारी भी पोस्टिंग लेने से कतराता था,
तब भी वह धनबाद में तस्करों के लिए खौफ का कारण बनी रहीं।

5000 साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में

५००० साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में  Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report  5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :  अफगानिस्तान में बड़ा क्षेत्र है जहाँ US Military का केम्प है। इस क्षेत्र में कभी कभी electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न होती थी जिससे मिलिट्री के कई जवान मारे गए या गायब हो गए।  इसकी तह तक पहुँचने के लिए अमेरिका 8 सील कमांडो अफगानिस्तान के उसी स्थान पार एक गुफा में गये तथा वहां उन्हें एक फंसा हुआ विमान दिखा जब वो उसेको निकालने प्रयास कर रहे थे। तभी वो अचानक गायब हो गए।  इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये। इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।  US Military scientists ने इसकी ने बताया की ये विमान ५००० हज़ार पुराना है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए थे। इसी क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए।  Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो सर्पिलाकार होता है हमारी आकाशगंगा की तरह।  Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया की ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है। और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्र में प्रकाश का उत्सर्जन होता है।  SVR report का कहना है यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई ये इतनी खतरनाक थी की इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs इसकी चपेट में आ गए।  US Army CH-47F Chinook हेलीकाप्टर जो ओसामा बिन लादेन को मरने के बाद बापस लौट रहा था ये हेलीकाप्टर इसी विमान की shockwaves चपेट में आ गया था।  http://www.wired.com/dangerroom/2011/05/aviation-geeks-scramble-to-i-d-osama-raids-mystery-copter/  http://www.whatdoesitmean.com/index1510.htm  http://www.youtube.com/watch?v=qBlwhVyZxmQ  http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache%3Ahttp%3A%2F%2Freinep.wordpress.com%2F2011%2F10%2F09%2F5000-year-old-viamana-craft-was-found-in-afghanistan%2F
 
५००० साल पुराना असली विमान मिला अफगानिस्तान में

Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report

5000 year old Viamana craft was found in Afghanistan :

अफगानिस्तान में बड़ा क्षेत्र है जहाँ US Military का केम्प है। इस क्षेत्र में कभी कभी electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न होती थी जिससे मिलिट्री के कई जवान मारे गए या गायब हो गए।

इसकी तह तक पहुँचने के लिए अमेरिका 8 सील कमांडो अफगानिस्तान के उसी स्थान पार एक गुफा में गये तथा वहां उन्हें एक फंसा हुआ विमान दिखा जब वो उसेको निकालने प्रयास कर रहे थे। तभी वो अचानक गायब हो गए।

इस बारे में Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी की जिसमे बताया ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये जवान मारे गये या गायब हो गये।
इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा।

US Military scientists ने इसकी ने बताया की ये विमान ५००० हज़ार पुराना है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए थे। इसी क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए।

Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो सर्पिलाकार होता है हमारी आकाशगंगा की तरह।

Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया की ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है। और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्र में प्रकाश का उत्सर्जन होता है।

SVR report का कहना है यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था electromagnetic shockwave यानि खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई ये इतनी खतरनाक थी की इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs इसकी चपेट में आ गए।

US Army CH-47F Chinook हेलीकाप्टर जो ओसामा बिन लादेन को मरने के बाद बापस लौट रहा था ये हेलीकाप्टर इसी विमान की shockwaves चपेट में आ गया था।

http://www.wired.com/dangerroom/2011/05/aviation-geeks-scramble-to-i-d-osama-raids-mystery-copter/

http://www.whatdoesitmean.com/index1510.htm

http://www.youtube.com/watch?v=qBlwhVyZxmQ

http://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache%3Ahttp%3A%2F%2Freinep.wordpress.com%2F2011%2F10%2F09%2F5000-year-old-viamana-craft-was-found-in-afghanistan%2F

महाकुंभ में इन दिनों एक पत्थर पूरे मेलें में सुर्खियां बटोर रहा है। इस अद्भुत पत्थर पर प्रभु राम का नाम भी लिखा गया है।

अदभुत

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महाकुंभ में इन दिनों एक पत्थर पूरे मेलें में सुर्खियां बटोर रहा है।
इसे लाने वाले महात्मा की मानें तो यह वही पत्थर है, जिन्हें समुद्र पर सेतु बनाने के लिए भगवान राम की सेना ने इस्तेमाल किया गया था।
कुंभ नगरी के जूना अखाड़े में एक बड़े से कुंड में यह विशेष पत्थर रखा गया है। कुंड में पत्थर डालने पर वह डूबता नहीं, बल्कि फूल की तरह तैरने लगता हैं। भक्तों को यकीन है कि इसके पीछे भगवान राम की लीला है।
जूना अखाड़ा में रखे इस पत्थर को देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
हर रोज़ सैंकड़ों लोग इस विशेष पत्थर को देखने के लिए पहुँच रहें है।
मंदिर के महंत की मानें तों यह वही पत्थर जिस का इस्तेमाल नल और नील ने प्रभु राम के आदेश के बाद सेतु निर्माण के लिए किया था। फिलहाल इस पत्थर को एक बड़े से बर्तन में रखा गया है।
बर्तन में पानी भरा हुआ है और उस पानी में यह पत्थर आसानी से तैर रहा है और इस अद्भुत पत्थर पर प्रभु राम का नाम भी लिखा गया है।
महंत हरि गिरि महाराज का कहना है कि इस पत्थर को उन के गुरु के गुरु, अपने गुरु से कई सौ साल पहले लेकर आए और अब यह जूना अखाड़े की संपत्ति है।
अगर इस बड़े से पत्थर को पानी से बाहर निकाला जाए, तब इस के असली वजन का एहसास होता है।
करीब 25 किलो वजन का यह पत्थर पानी में डालते ही तैरने लगता है। हर दिन इस अद्भुत पत्थर को देखने के लिए भक्त आ रहे है। पानी में तैरने वाली नाव की तरह तैर रहे इस पत्थर को जूना अखाड़े के ठीक द्वार पर लगाया गया है। राम नाम के इस पत्थर को लोग चमत्कार के रूप में देख रहे हैं।
पत्थर को देखने के साथ ही कई लोग उस पर पैसे भी चढ़ा रहे हैं। कई श्रद्धालु इस पत्थर की पूजा भी कर रहे हैं। कौतूहल वश इसे छूते हैं और डूबाने की कोशिश भी करते हैं लेकिन पत्थर बर्तन के तल में जाकर तत्काल फिर ऊपर आ जाता है

bharat देश की बुनीयाद को बर्बाद करने की साजिश सफल हो गई, जाने 1823 से पहले की कहनी

 Indian Education Act – 1858 VS GURUKUL
 **Indian Education Act -* 1858 में Indian Education Act बनाया गया*

इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकोले ने की थी
लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W.Litnar और दूसरा था T…homas Munro, दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था , 1823 के आसपास की बात है ये Litnar , जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा है कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100 % साक्षरता है, और उस समय जब भारत में इतनी साक्षरता है  और मैकोले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है तो इसकी देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा और उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी और तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे, और मैकोले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा है 
“कि जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह 
जोत दिया जाता है वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी
 शिक्षा व्यवस्था लानी होगी “
इसलिए उसने सबसे पहले गुरुकुलों को गैरकानूनी घोषित किया, जब गुरुकुल गैरकानूनी हो गए तो उनको मिलने वाली सहायता जो समाज के तरफ से होती थी वो गैरकानूनी हो गयी, फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया, और इस देश के गुरुकुलों को घूम घूम कर ख़त्म कर दिया उनमे आग लगा दी, उसमे पढ़ाने वाले गुरुओं को उसने मारा-पीटा, जेल में डाला 
1850 तक इस देश में 7 लाख 32 हजार गुरुकुल हुआ करते थे और उस समय इस देश में गाँव थे 7 लाख 50 हजार, मतलब हर गाँव में औसतन एक गुरुकुल और ये जो गुरुकुल होते थे वो सब के सब आज की भाषा में Higher Learning Institute हुआ करते थे उन सबमे 18 विषय पढाया जाता था, और ये गुरुकुल समाज के लोग मिल के चलाते थे न कि राजा, महाराजा, और इन गुरुकुलों में शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी इस तरह से सारे गुरुकुलों को ख़त्म किया गया और फिर अंग्रेजी शिक्षा को कानूनी घोषित किया गया और कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे फ्री स्कूल कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं और मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है वो, उसमे वो लिखता है कि “इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी ” और उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे हम तो खुद में हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आ रही है, दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ?
शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकोले की रणनीति थी ………………….

*जिस यूरोप को हम आधुनिक व खुले विचारो वाला मानते हैं, आज से ५०० वर्ष पहले वहाँ सामान्य व्यक्ति ‘मैरेज’ भी नहीं कर सकता था क्योंकि उनके बहुत बड़े’ दार्शनिक’ अरस्तू का मानना था की आम जनता मैरेज करेगी तो उनका परिवार होगा, परिवार होगा तो उनका समाज होगा, समाज होगा तो समाज शक्तिशाली बनेगा, *
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*शक्ति शाली हो गया तो राजपरिवार के लिए खतरा बन जाएगा । इसलिए आम जनता को मैरेज न करने दिया जाय । बिना मैरेज के जो बच्चे पैदा खोते थे, उन्हें पता न चले की कौन उनके माँ-बाप हैं, इसलिए उन्हें एक सांप्रदायिक संस्था में रखा जाता था, जिसे वे कोन्बेंट कहते थे उस संस्था के प्रमुख को ही माँ बाप समझे इसलिए उन्हें फादर, मदर, सिस्टर कहा जाने लगा ।*