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Gau mata के गोबर और मूत्र से पूरे गाँव को निशुल्क गैस


Gau mata के गोबर और मूत्र का उपयोग करके दिलावर सिंह जी दे रहे है पूरे गाँव को निशुल्क गैस ……राजीव दीक्षित Rajiv Dixit


120 गायों से दूध की डेयरी चलाने वाले दिलावर सिंह ने गोबर और मूत्र से Gobar Gas (गोबर गैस) को पूरे गाँव में पाइप लाइन के जरिये भेजकर पूरे गाँव को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया /…. और उन्हें 
gas cylinder के दाम बढ़ने का डर भी नहीं सताता

ये कार्य अगर हर गाँव में हो जाये तो हमें रसोई गैस के लिए अरब देशो के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा

गऊ माँ के लिए…….अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया

अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया अपने बच्चे से भी छीना पर तुमको मैंने दूध दिया. रूखी सूखी खाती थी मैं कभी न किसीको सताती थी मैं कोने में पड़ जाती थी मैं दूध नहीं दे सकती अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं मेरे उपलों की आग से तूने भोजन अपना पकाया था गोबर गैस से रोशन कर के तेरा घर उजलाया था क्यों मुझको बेच रहा रे उस कसाई के हाथों में ? पड़ी रहूंगी इक कोने में मत कर लालच माँ हूँ मैं. मर कर भी है कीमत मेरी खाल भी तेरे काम आए मेरी हड्डी की कुछ कीमत शायद तू ही घर लाए मैं हूँ तेरे क्रष्ण की प्यारी वह कहता था जग से न्यारी उसकी बंसी की धुन पर मैं भूली थी यह दुनिया सारी मत कर बेटा तू यह पाप अपनी माँ को न बेच आप रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसीको नहीं सताऊँगी मैं तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं. (मन भर आया हो तो शेयर करे, मेरे लिए नहीं अपनी माँ के लिए, गऊ माँ के लिए……..!