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Hindi Kahani कोए हिरण गीदड़ की कहानी , बेगुनाह गीध Part 2

यदि आप इस Hindi Kahani पर सीधे आये है तो इसका पहला भाग पहले पढ़िए तभी आप आगे की Kahani समझ सकेंगे यंहा क्लिक करे  Part1

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नदी के तट पर एक बड़े वृक्ष के ऊपर 1 बूढा गीध रहता था जवानी के दिनों में उसका इस जंगल में बहुत दबदबा था छोटे-मोटे जाकर तो उसकी शकल देखकर ही भाग जाया करते हैं जवानी के दिनों में हर जीव को एक ऐसा नशा होता है कि वह बुढ़ापे को भूल कर भी याद नहीं करता Hindi Story

यही कारण है कि जवानी के दिन बहुत हंसी खुशी में व्यतीत हो जाते हैं और बुढ़ापा?

बुढ़ापे की आयु में आकर इस गीध के नाखून टूट कर गिर गए आंखों का प्रकाश बहुत ही कम हो गया अपनी बेबसी और मजबूरी पर आंसू बहाता यह गीध इस वृक्ष पर बैठा रहताऔर शेष पक्षियों को हंसते खेलते देखता रहता

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इसी वृक्ष पर और पक्षी अपने अपने घोसलों में रहते थे इस बूढ़े गीध की हालत देखकर उन्हें भी दया आ जाती यह सब के सब अपने भोजन में से थोड़ा थोड़ा उसे भी खाने को दे देते

hindi story for class 2जिससे वह गीध अपना पेट भर लेता इस भोजन के बदले में गीध सारा दिन पक्षियों के बच्चों की रक्षा करता एक दिन कोई बिलाव उधर से गुजरा बड़े वृक्ष पर बहुत से पक्षियों के बच्चों की आवाज सुनकर वह वहीं रुक गया

उस वृक्ष पर रहने वाले पक्षियों के बच्चों ने जब बिलाव को देखा तो वो जोर जोर से चीखने लगे चिल्लाने लगे गीध ने जब बच्चों के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनी तो वह समझ गया अवश्य ही से कोई खतरा है

शायद कोई शत्रु आक्रमण करने के लिए आया है इसीलिए वह गरजदार आवाज में बोला कौन है क्या करने आया है यहां पर

बिलाव ने जब गीध को देखा तो डर के मारे कांप उठा और मन ही मन कहने लगा हाय मैं मर गया थोड़ी देर तक शांत मन से सोचने के बाद बोला अरे उस समय तक डर काहे का जब तक शत्रु सामने ना जाए यदि वह सामने आ ही जाए तो बुद्धिमान को चाहिए कि उससे बचने का उपाय करें

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अब मैं इसके समक्ष भाग तो सकता नहीं अब तो जो कुछ होना है वह होकर ही रहेगा क्यों ना इस गीध को अपना मित्र बना लूं जो काम शत्रु बनकर नहीं निकलते हुए मित्रता से बन जाते हैं चालबाजी से ही दुनिया को लूटा जा सकता है

यही सोच कर वह बिलाव गीध के पास गया

अरे तुम कौन हो यहां पर क्या करने आए हो?

मैं एक ब्लॉग हूं आप से मित्रता करने चला आया हूं चाचा नहीं नहीं तुम यहां से चले जाओ इस वृक्ष से दूर चले जाओ इसी में तुम्हारी भलाई है hindi story for class 2

चाचा पहले बात तो सुन लो ऐसे नाराज क्यों हो रहे हो क्योंकि कहा गया है कि कोई जाति विशेष के कारण ही मारा जाता है पूजा जा सकता है बुद्धिमान प्राणी को चाहिए कि उसका स्वभाव और उसके व्यवहार को देखो यदि उसमें कोई बुराई दिखे तो उसे मार डालो यदि भलाई नजर आए तो मित्र बना लो

अच्छा पहले तो तुम यह बताओ कि यहां क्या करने आए हो? चाचा मैं यहां गंगा तट पर रहता हूं और हर रोज सुबह उठकर गंगा में स्नान करता हूं मैंने चंद्रायण व्रत लिया है इसीलिए मैंने मांस खाना छोड़ दिया है
बस आपके धर्मी होने की प्रशंसा सुनकर मैं चला आया किंतु आप तो घर में आए मेहमान को ही मारने के लिए आ दोड़े

गृहस्थी का धर्म पर इस प्रकार है कि घर आए मेहमान तो क्या शत्रु का भी उचित रूप में अतिथि सत्कार किया जाए आपने कंही देखा हे कि वृक्ष काटने आए लकड़हारे को अपने करीब आते देखकर वह अपनी छाया तो उसे नहीं हटा लेता यदि किसी भी देश के पास खिलाने पिलाने की सामग्री ना भी हो तो केवल मीठी बातों से घर आए मेहमान का पेट तो भर सकता है

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गीध बिलाव की बातों में पूरी तरह आ गया उसने बिलाव को अपने साथ रहने की अनुमति देदी कुछ दिन तक बिलाव बड़े प्यार और शराफत से इसी पेड़ के नीचे रहा वह घंटो बैठकर गीध के साथ ज्ञान की बातें करता रहता धीरे धीरे उसने अपना पूरा विश्वास गीध पर जमा लिया

कुछ ही दिनों के पश्चात वह अपने असली रुप में आने लगा वह हर रोज गीध की आंखों से बाच कर किसी न किसी पक्षी का बच्चा उठाकर ले जाता और पेड़ की जड़ों में बैठ जाता और आनंद से खाता

गीध बेचारा तो देख नहीं सकता था उसे क्या पता था यह विश्वासघाती धोखा कर रहा है कुछ ही दिनों के पश्चात पक्षियों को यह पता चलने लगा कि उनके बच्चे घोसलों में नहीं है जिनके बच्चे नहीं मिल रहे थे वह बिचारे चीखने चिल्लाने लगे रो-रो कर एक दूसरे से पूछते किंतु बच्चे थे ही कन्हा जो उन्हें मिलते बात ठंडी पड़ जाती तो दूसरे दिन फिर किसी ना किसी पक्षी का बच्चा गायब हो जाता है वह बेचारा रोने लगते hindi moral stories

अंत में सारे पक्षी यह बात समझ गए कि उनके बच्चे निरंतर गायब हो रहे हैं उनके बच्चे कहां जाते हैं?

चारों ओर से हंसो और उठ खड़ा हुआ कि यहां पर आवश्यक को हिंसक पक्षी आया है जो उनके बच्चों को खा रहा है इस सिलसिले में सब पक्षियों ने खोज आरंभ कर दी

बिलाव को पता चल गया कि आप की चोरी पकड़ी जाने वाली है सब पक्षी एकजुट होकर उसके पीछे लग गए हैं

अब तो जो कुछ खाना खा खा लिया अब तो यहां से भाग लेने में ही भलाई है नहीं तो यह लोग मुझे मार डालेंगे

बस रातोरात वह पापि वहां से भाग गया एक दिन जब सब पक्षी मिलकर अपने बच्चों के खूनी को धुंढ रहे थे तो उन्होंने पेड़ की जड़ों में बच्चों की हड्डिया पड़ी देखी

इस पेड़ पर तो गीध ही ऐसा पक्षी है जो हिंसक है और सारा दिन इस पेड़ पर बैठा रहता है हमने तो इसे अपने बच्चों की रखवाली के लिए रखा था यह दुष्ट तो हमारे बच्चों को ही खा गया इस दुष्ट को हम अपना भोजन भी खिलाते रहे

मारो मारो मारो यही है विश्वास घाती
इस पापी खूनी अधर्मी दुष्ट को मारो

सारे पक्षी इकट्ठे होकर उस बूढ़े गीध पर टूट पड़े वह तो पहले ही मरा हुआ था थोड़ी सी मार के पश्चात ही संसार से चला गया केवल इसलिए उसने अपने प्राण त्याग दिए क्योंकि उसने दुष्ट स्वभाव के प्राणी पर विश्वास कर लिया था

यह कहानी सुनाकर कोए ने कहा कि मैं तुम्हें इसलिए कहता हूं कि किसी भी दुष्ट प्राणी से मित्रता नहीं करनी चाहिए

इस Hindi Story का Part 3

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