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भगवान BUDH ने कहा खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना।

Vipassana Meditation भगवान BUDH की अनमोल विदया

भगवान BUDH जिन्हें हम भगवान विष्णु का Avatar मानते हें लेकिन उनके विचारों से काफी डरते हें अब आप सोचते होंगे ऐसे कोनसे विचार हें वेसे आप लोग जानते ही होंगे अधिकतर लोग ये ही समझते हें की भगवान बुध के विचारों के अनुसार इस दुनिया में इश्वर का कोई अस्तित्व हे ही नही जब की ऐसा नही हे भगवान बुध ने कहा खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना। जन्हा तक मेने उनको पढ़ा और समझा हे और उनकी शिक्षा को जाना हे उनकी बाते बिलकुल सही हे क्योंकि एक योगी इस संसार का सारा रहस्य जनता हे और वो ये भी जनता हे की किसी को केसे अध्यात्म में आगे लेजाना हे

2500 वर्ष पहले बुध ने वो खोजा जो आज भी सार्थक मालूम पड़ेगा और जो आने वाली सदियों तक सार्थक रहेगा बुध ने विश्लेष्ण दिया और जेसा सूक्ष्म विश्लेष्ण उन्होंने दिया कभी किसी ने न दिया था और फिर दुबारा ऐसा विश्लेष्ण कोई न दे पाया उन्होंने जीवन की समस्या के उत्तर शास्त्र से नही दिए विश्लेष्ण की प्रक्रिया से दिए वो धर्म के पहले वैज्ञानिक हें बुध ये नही कहते की भरोषा करलो वो कहते हें की सोचो विचारो विश्लेष्ण करो खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना

दुनिया के सारे सम्प्रदायों ने भरोसे को पहले रखा हे सिर्फ बुध को छोड़ कर दुनिया के सारे धर्मों में श्रधा प्राथमिक हे बुध ने कहा अनुभव प्राथमिक हे बुध कहते हे आस्था की कोई जरूरत नही हे अनुभव से खुद ही आस्था आ ही जाएगी बिना अनुभव के जो आस्था आयेगी उसमे शंका ज्यादा होगी इसलिए पहले ध्यान करो और जानो सत्ये को इश्वर को सत्ये मानने से पहले अनुभव करो ध्यान के द्वारा जब तुम अनुभव के द्वारा इश्वर को जानलोगे तो इश्वर के प्रति सच्चा प्रेम खुद ही जाग्रत हो जायेगा
 
चलिए में आपको एक छोटा सा उधाहर्ण देता हूँ अगर में आपको ये बताउं की मुझको भगवान श्री राम ने दर्शन दिए तो क्या आप यकीं करलेंगे कोई यकीन नही करेगा और अगर कोई यकीन करभी ले तो वो भ्रांतियों में ही फसा रहेगा और इसी शं से अंध विश्वास शुरू होता हे जब आप खुद साधना करेंगे और अध्यात्म की उस ऊंचाई तक पोहचेंगे तो खुद ही जानलेंगे की कोई इश्वर हे या नही और जो आपने जाना वो आपके लिए सत्ये हे और किसी के लिए नही क्योंकि सुनने वाले ने नही जाना अपनी अनुभूति पर नही उतारा इसलिए अगर वो यकीन करता हे तो उसको जीवन भर ये ही शख रहेगा की पता नही इश्वर हे भी या नही इसलिए भगवान बुध की बातों को माने और पहले साधना करें तभी सच 
जान पाएंगे । 

भगवान बुध के विचार बिलकुल वैज्ञानिक विचार हें इसी लिए आज के सम्यें में सभी पढ़े लिखे लोग भगवान बुध की बातों को ज्यादा मानते हें विज्ञानं भी यही कहता हे पहले खोजो जानो फिर यकीन करो वेसे विज्ञानं अध्यात्म से काफी पिच्छे हे क्योंकि विज्ञानं ने आज जो भी कुछ खोज की हे वो ही खोज की हे जो पहले से ही हमारे देश के योगी जान चुके थे क्योंकि एक योगी ही पुरे संसार का सच जानता हे

अगर आप भगवान बुध की विपश्ना विधि से ध्यान करते हें तो आप जान ही जायेंगे इस संसार का सत्ये वेसे ध्यान की और भी काफी सारी विधियाँ हे आप चाहें किसी भी विधि से ध्यान करें पूरी श्रधा से करें तो सत्ये आपसे दूर नही
विपश्यना सत्र्स के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ  http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/ 

Vipassana Meditation जिसे खोजा था भगवान महत्मा बुध ने,

Vipassana साधना के आचार्य पूज्य श्री S.N. Goenka *स्त्येनारायण गोयनका जी* भारत में १९६९ से Meditation की इस विद्या का प्रसिक्षण दे रहे हें । उन्होंने यह साधना विधि ब्रहादेश में पूज्य Sayagyi U Ba Khin  से सीखी और बहूत लाभान्वित हुए । तदंतर अपने गुरु के कुशल मार्ग दर्शन में निरन्तर अभ्याश करते हुए इस विद्या में पारंगत हुए । यह विद्या सार्वदेशिक, सर्वजन्नी, और सर्वकालिक हे — देश जाती और समय की सीमा से सर्वथा मुक्त इसमें सम्पूर्ण मानव जाती का कल्याण समाया देख पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी ने निरन्यें लिया की वो अब business से निर्व्रती लेकर अपना शेष जीवन इसी के शिक्षण कार्य में लगायेंगे उनके इस सुभ संकल्प में उनके पूज्य गुरुदेव का प्रोत्सहन और आग्रेह निहित था


 ध्यान की यह विधि भारत की पुरानी और अनमोल विद्या हे जो आज से लगभग २५०० वर्ष पूर्व भगवान बुध ने खोज निकाली थी किन्ही कारणों से यह हमारे देश से विलुप्त हो गई पड़ोसी ब्र्हंदेश ने गुरु शिष्य परमपरा द्वारा इसे सुरक्षित रखा और अब अपने देश की इस अनमोल धरोहर को वापश लाने का श्रय पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी को हे


हम धर्म शब्द का सही अर्थ भूल गये और सम्प्रदाए को ही धर्म मानने लगे हें आज जबकि धर्म के नाम पर इतनी अराजकता फेली हुई हे यह स्म्प्रदायेकता विहीन विद्या घोर अंधकार में प्रकाश सद्र्श स्तम्भ हे

आज का मनुष्ये तनाव, वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि विकारों से ग्रसित हे विपश्ना एक ऐसी विद्या हे जो हमारी इन सांसारिक विपदाओं को खतम करने में साहयक हे इसके आलावा यह विद्या हमें अध्यात्म के ऊँचे से ऊँचे धरातल तक ले जाने में पूर्णता सक्षम हे इस विधि से हमारे विकार वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि पूर्णता नष्ट होते च्लेजाते हें और कुशल विर्तियाँ मैत्री, करुणा, शमा, शील, सेवा, आदि अंकुरित होती हें और फलती फूलती हे । 

सोभाग्येवश ऐसी दुर्लभ विद्या आज सुलभ हे और इसके द्वारा हमे अपना मंगल साधने की प्रेरणा मिले इसलिए ये विद्या फिर से भारत से पुरे विश्व में फेल रही हे   । 

विपश्यना ध्यान सिखने के लिए दस दिन के शिविर में भाग लेना जरूरी हे इन दस दिनों के दोरान शिविर स्थल पर ही रहना होता हे जन्हा भोजन और आवास की सम्पूर्ण व्येव्स्था रहती हे शिक्षण आवास सहित सम्पूर्ण सुविधा का कोई शुल्क नही लिया जाता । 

ध्यान की यह विधि सिखने के लिए हर सम्प्रदाए के लोग आते हें चाहे वो मुस्लिम, हिन्दू, सिख, बुध , जेन, इसाई सभी आते हें अत्यंत धन सम्पन भी आते हें और बिलकुल धनहिन भी किसी भी विपश्यना शिविर में समाज के हर वर्ग का यह अनूठा संगम देखा जा सकता हे 

इस विद्या के माध्यम से धर्म धारण कर अधिक से अधिक लोग अपना और अपने परिवारजनों का मंगल साध सकें ये ही मंगल कामना हे  ।  

विपश्यना सत्र्स के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/