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NASA नासा और AI ने मिलकर ढूंड निकाला 8 ग्रहों वाला सोलर सिस्टम

NASA नासा के साथ मिलकर AI ने ढूंढ निकाला अपने सौरमंडल जैसा 8 ग्रहों  वाला एक सोलर सिस्टम

नासा के केपलर टेलीस्कोप ने काफी अच्छी सफलता हासिल की है नासा के केपलर ने हमारे जैसा ही एक सोलर सिस्टम खोज निकाला है अब उसके आठवे ग्रह की भी खोज कर ली गई है

इस नए सोलर सिस्टम का नाम केपलर-90 रखा गया है और इस सोलर सिस्टम की तुलना हमारे सौरमंडल से की जा सकती है

NASA नासा AI ने ढूंढ निकाला 8 ग्रहों वाला एक सोलर सिस्टम

इस खोज में गूगल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली गई है यह सिस्टम इंसानों के रहने लायक ग्रह की खोज करने में काफी मदद करता है

NASA नासा और AI ने मिलकर ढूंड निकला 8 ग्रहों वाला सोलर सिस्टम

नई सोलर सिस्टम केपलर 90 के नए ग्रह का नाम केपलर 90i रखा गया है नासा और Google के इस प्रोजेक्ट से अभी इस बात की संभावना काफी ज्यादा बढ़ गई है कि हमारे इस ब्रम्हांड में ऐसे अनेकों ग्रह हो सकते हैं ऐसे अनेकों ग्रह है जहां पर उन्नत सभ्यताएं या फिर जीव रह सकते हैं और रह रहे हैं नासा ने कहा कि इस खोज से यह साबित होता है कि कहीं दूर सोलर सिस्टम में हमारे जैसे ही परिवार रह रहे हैं जो कि हम जैसे ही हैं और नया सौरमंडल खोजा गया है इसकी दूरी हमारे से करीब 2545 प्रकाश वर्ष है Amazing Facts about NASA in Hindi

नासा ने बताया है कि जो नया ग्रह खोजा गया है इस सोलर सिस्टम का पृथ्वी से करीब 30 फ़ीसदी ज्यादा बढ़ा है लेकिन यह सा ग्रह नहीं है जहां पर रहना चाहिए यह सा ग्रह है जो कि नर्क से भी बदतर है यहां पर काफी ज्यादा चट्टानें ही चट्टानें हैं और यंहा का वातावरण भी भुत अधिक घना है

शुक्र ग्रह रात में आसमान का सबसे चमकीला ग्रह

इस ग्रह की सतह का तापमान बहुत बहुत अधिक है यहां पर यदि कोई मनुष्य जाएगा तो वह झुलस जाएगा नासा और AI के मुताबिक यहां का तापमान 800 डिग्री फारेनहाइट है

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शुक्र ग्रेह (venus)

शुक्र ग्रह रात में आसमान का सबसे चमकीला ग्रह 

शुक्र ग्रह सूर्य से दूसरे नम्बर का (सबसे नज़दीक) ग्रह हे तथा यह सूर्य का एक चक्कर लगाने में 224.7 पृथ्वी दिवस लेता है । रात के समय आसमान में यह चन्द्रमा के बाद सबसे ज्यादा चमकने वाला पिण्ड है । यह सूर्यं से ज्यादा दूर नहीं होता है । शुक्र ग्रह का चमकीलापन अपनी इष्टत्तम् सीमा में सूर्योदय के पहले अथवा सूर्यास्त के बाद पहुँचता हे । इसलिए इसे कभी-कभी प्रात:कालीन स्टार अथवा सांयकालीन स्टार के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है
टेरिस्ट्रियल ग्रह के रूप में कभी-कभी इसे पृथ्वी का सिस्टर ग्रेह भी कहते हें, कारण यह हे कि शुक्र ग्रह और पृथ्वी दोनो में आकार और संरचना में काफी समानताएँ हैं । शुक्र ग्रह अत्यधिक परावर्तक बादलों की अपारदर्शी परत से ढका रहता है तथा इसकी सतह अन्तरिक्ष से दृष्टिगोचर प्रकाश में दिखाई नहीं पड़ती है इसी कारण से यह काफी अर्से तक विचित्रताओं से भरा हुआ विषय जाना जाता रहा । बीसवीं सदी में ग्रहीय विज्ञानं के विकास के बाद इसके अनेक गोपनीय तथ्यों को जाना जा सका । सभी टेरिस्ट्रियल ग्रहों में शुक्र ग्रह का वायुमण्डल सबसे घना है जिसमें अधिकांश रूप से कार्बन डाइआक्साइड होती है तथा इस ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दाब पृथ्वी की सतह के वायुमण्डलीय दाब की तुलना में 90 गुना अधिक है
शुक्र ग्रह की सतह का वृहत रूप में मानचित्रण पिछले बीस सालों में किया गया है । इसकी सतह में ज्वालामुखी परवर्ती कॉफी पायी गयी है तथा इसके कुछ ज्वालामुखी आज़ भी सक्रिय हैं । ऐसा विश्वास किया जाता है कि शुक्र ग्रह “प्लेट टेक्टोनिक्स’ के दोर से कुछ निश्चित अवधियों के बीच से गुजरता है जिसके अन्तर्गत इसके कर्स्ट में परिवर्तन होते रहते हैं ।
शुक्र ग्रह का अंग्रेजी नामकरण रोम की प्यार की देवी वीनस’ के नाम के साथ रखा गया है और इसके साथ ही साथ इसकी सतह के अधिकांश लक्षण पौराणिक महिलाओं के नाम के साथ रखे गये हैं
शुक्र ग्रह की संरचना
शुक्र ग्रह चार टेरिस्ट्रियल ग्रहों में से एक है जिसका अर्थ यह कि पृथ्वी की भाति यह भी चट्टानी भागों से भरा हूआ है । आकार और भार से पृथ्वी के बहुत अधिक समतुल्य होने के कारण इसे पृथ्वी का ‘ट्विन’ भी कहते है । शुक्र ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास की तुलना में केवल 650 किमी. ही कम तथा इसका भार पृथ्वी के भार का 81.5 प्रतिशत है। इसके बावजूद शुक्र ग्रह की सतह पर परिस्थितियाँ पृथ्वी की सतह की तुलना में भिन्न है तथा इसका कारण इसका सघन कार्बन डाइआंक्साइड का वायुमंडल है।
वायुमंडल
शुक्र ग्रह का वायुमण्डल काफी सघन हैं और इसमें कार्बन डाइआक्साइड बहुतायत मे उपलब्ध है तथा नाइट्रोजन की बहुत अल्प मात्रा है । ग्रह की सतह में दाब का मान पृथ्वी की सतह की तुलना में 90 गुना अधिक होता है । कार्बन डाइआक्साइड की अधिकता एक तीव्र ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ पेदा करती है जो कि उसकी सतह के तापमान को 400•C बढा देता है । इसके कारण शुक्र ग्रह की सतह बुध ग्रह की सतह से भी अधिक गर्म हो जाती है जबकि शुक्र ग्रह की सूर्य से दूरी, सूर्ये-बुध ग्रह की दूरी का लगभग दो गुना है तथा शुक ग्रह में अधिग्रहित सौंर ऊर्जा बुध ग्रह की तुलना में केवल 25 प्रतिशत है

शुक्र ग्रह और पृथ्वी की तुलना
आकार , भार, घनत्व और आयतन की दृष्टि से शुक्र ग्रह और पृथ्वी आपस में काफी मिलते जुलते हैं । अनुमान है कि इन दोनों ग्रहों का निर्माण 4.5 मिलियन वर्ष पहले हुआ होगा । दोनों ग्रहों में सबसे विशाल अन्तर उनके रोटेशन में है । शुक्र ग्रह का अक्षीय झुकाव 177.36 डिग्री जबकी पृथ्वी का 23.5 डिग्री है । इसके अलावा शुक्र ग्रह पूर्व से पश्चिम की और घूमता है जिसके कारण इसमें सूर्योदय पश्चिम दिशा में तथा सूर्यास्त पूर्व दिशा में होता है । पृथ्वी में इसका विपरीत होता है ।

मस्तिष्क के रहस्यों की खोज

दिमाग की ताकत 

मस्तिष्क (mind) अपने भीतर बहुत सारी जानकारियां (Information) इकठ्ठी करके रखता है । उदाहरण के तोर पर किसी से मिलने जाना है, किसी को कोई वस्तु लौटानी है इस तरह और भी बहुत कुछ मस्तिष्क की गहराइयों में कहीँ इकट्ठा होता रहता है मेक्स प्लांक इंस्टीदृयूट आफ हयूमन कोग्निटिव (max planck institute of human development) एंड ब्रेन साइंसेस के वैज्ञानिक (scientist) जॉन डाइलेन हायन्स ने लंदन और टोकियो के शोधार्थियों के सहयोग से ‘ इस बात का पता लगाया है कि मस्तिष्क के भीतर एकत्र होने वाली ये जानकारियां कंहा और कैसे इकट्ठा होती हैं ।

फंगसनल मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग तकनीक और अत्याधुनिक कम्यूटर एल्गोरिथिज द्वारा शोधार्थी पहली बार यह बात जान पाये है प्रयोगों में मस्तिष्क की गतिविधियों दवारा शोधारती इन स्थानो का पता लगाने में सफल रहे जहां मस्तिष्क इन गुप्त जानकारियों को इकट्ठा करके रखता है
ये इच्छायें या जानकारिया तब तक गुप्त रहती हैं जब तक हम इन्हें कार्य में तब्दील नहीं करते । प्रयोग में वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों को जोड़ने या घटाने के लिये दो नम्बर दिये । लेकिन उनसे कहा गया अपने मस्तिष्क में ही रखें । तब मस्तिष्क की गतिविधियों को उपरोक्त तकनीक द्वारा पढ़ने पर यह पाया गया कि वैज्ञानिक उन लोगों की इच्छा को 70 फीसदी तक जानने में सफल रहे
वैज्ञानिकों के अनुसार मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कांट्रेक्स के विभिन्न हिस्से अलग-अलग कार्यकलापों को अंजाम देते हैं । बल्कि अपना दिमाग इच्छाओं या जानकारियों को तब तक इकटूठा रखता है जब तक उन पर एक्शन न लिया जाता है । मस्तिष्क का पिछला हिस्सा कार्य करता है जब प्राणी कार्य कर रहा होता है । और भविष्य के कार्यों को मस्तिष्क एक हिस्से से कॉपी करके दूसरे हिस्से में भेज देता है जहां से इनको कार्य में तब्दील किया जाना है
यह खोज दिमाग की बिमारियों के इलाज में लाभदायक सिद्ध होगी

बाँस की खेती हरा सोना

Bamboo (बाँस) प्राय: गरीब आदमी की लकडी,  सोना, Green Gold (हरा सोना)  आदि नामों से जाना जाता है तथा मनुष्य के जीवन में यह अहम भूमिका निभाता है । बांस एक Versatile (बहुमुखी) पौधे के रूप में हमारे जीवन मेँ पारिस्थितिकीय, आर्थिक तथा जीविका सुरक्षा प्रदान करता हे। अभी तक बांस ज्यादातर जंगली रूप में यानी समूचे वन क्षेत्र के 28 प्रतिशत भाग में उगाया जाता है तथा इसका करीब दो-तिहाई उत्पादन पूर्वोत्तर राज्यों में होता हैं। बांस औधोगिक और घरेलू उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में व्यापक रूप से प्रयोग क्रिया जाता है तथा हमारे देश में इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है ।
निरंतर बढ़ती हुई बास की मांग को देखकर इसकी Commercial farming (व्यावसायिक खेती) करना अत्यन्त आवश्यक हो गया है । यही नहीं बांस की व्यापक क्षमता का अभी तक पूर्ण रूप से दोहन भी नहीं किया गया है । इन सभी बातों को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने बांस के पूर्ण विकास से संबधित सभी मुद्दों पर अमल करते हुए राष्टीय बास मिशन प्रारंभ किया था । यह मिशन केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है जिसके अतर्गत केन्द्र सरकार की और से शतप्रतिशत योगदान दिया जाएगा। इस योजना को कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, नई दिल्ली के तहत बागवानी प्रभाग द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा
Green Gold Bamboo Mission मिशन के मुख्य उद्देशय
मिशन के प्रमुख उदेश्य निम्नलिखित है :
1. क्षेत्र पर अधारित आँचलिक रूप से विशिष्ट रणनीति दवारा बास क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करना;
2. क्षमतावान क्षेत्रों में बांस के तहत आने वाले क्षेत्र में वृद्धि के साथ-साथ पैदावार बढाने के लिए बांस की Advanced breed विकसित किस्मो का विकास करना;
3. बांस और बांस पर आधारित हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन को बढावा देना;
4. बास के विकास के लिए स्टेकहोल्डरों के बीच परिवर्त्तन और सहयोग कायम करना;
5. पारंपरिक ज्ञान और Modern scientific आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के प्रासंगिकता मिश्रण द्वारा विकास और प्रसार प्रौद्योगिकियों को बढावा देना,
6. कुशलं तथा अकुशल लोगों, विशेष रूप से बेरोजगार युवकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना
मिशन की रणनीति
उपरोक्त उद्देश्यों को हासिल करने के लिए मिशन की निम्नलिखित रणनीतियां हैं
1. उत्पादकों को उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन और विपणन को शामिल करते हुए समन्वित अवधारणा को अंगीकृत करना
2. उत्पादन बढाने के लिए उचित प्रजातियों और प्रौघोगिकियों के उत्कृष्ट आनुवंशिक क्लोन के अनुसंधान एवं विकास को बढावा देना
3. किस्म परिवर्तन और सुधरी कृषि-क्रियाओं द्वारा बांस के वनीय और गेर-वनीय क्षेत्रफल और उत्पादकता में वृद्धि करना,
4. सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के सभी स्तरों पर अनुसंधान एंव विकास तथा विपणन एजेसियों के बीच सहभागिता, परिवर्तन तथा सहयोग को बढावा देना
5. किसानों को पर्याप्त लाभ तथा सहयोग को सुनिश्चित करने के लिए उचित, सहकारी तथा स्वयं-सेवी दलों को बढावा देना
6. क्षमता निर्माण तथा मानव संसाधन विकास को बढावा देना

7. किसानों के Product उत्पाद के लिए पर्याप्त लाभ सुनिश्चित करने और मध्यस्थता को समाप्त करने के लिए राष्टीय, राज्य तथा उप-राज्य स्तर पर संगठनों का निर्माण करना

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जानें ओजोन छिद्र के बारे में

Ozone Hole

हम सभी सूर्य (Sun) की पूजा करते हें और हमारा अडिग विश्वास हे कि पृथ्वी पर जीवन प्रकृति को एक अदूभुत्त देन हे जिसमें सूर्य का योगदान प्रधान एवं अद्वितीय है। भारत में तो सूर्य को देवता (God) मान कर उसकी पूजा होती है और हम देखते हैँ कि स्नान एव ईश्वर का ध्यान कर प्राय: लोग सूर्य को जल चढाते हैँ । यह देखकर वैज्ञानिकों को हेरत तो अवश्य होतीं है, जेसा मैंने स्वयं देखा है । समाज का एक बहूत बड़ा भाग जो अपने विवेक से प्रकृति एव परमात्मा में अन्तर नहीं समझ पाना, उसका यह विश्वास होता है कि सूर्य भगवान है जो हम सभी को जीवन प्रदान करता है। यह एक गूढ़ प्रश्न हे जहां विज्ञान भी बौना हो जाता हे और वैज्ञानिक इस प्रश्न का उत्तर देकर भी अपने आप को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं। ऐसी दशा में इश्वर के प्रति आस्था और उसकी पूजा क संबंध में बड़े से बडा वैज्ञानिक (large scientist) भी अपने आप को असमर्थ पाता हे

हम सभी को ज्ञात हे कि सूर्यं जनित अनेक प्रकार की किरणे पृथ्वी के वायुमण्डल तक पहुंचती हैं। यदि ये किरणे बिना किसी रुकावट के पृथ्वी तक पहुंच जाएं तो जन-जीवन और पोधों का विनाश हो सकता है। यहीँ प्रकृति की विलक्षणता स्पष्ट दिखती है कि जन-जीवन की रक्षा के लिये ही ओजोन (0³)  (Ozone layer) नामक अवयव की संरचना हुई। ओजोन (0³) की परत दिनमे प्रबल हो जाती हे जोकि सूर्यं के विनाशकारी विकिरण (Destructive radiation) को सोख लेती है। इस प्रकार पृथ्वी की सतह पर जन-जीवन एंव वनस्पति जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पढ़ता है। यह सचमुच एक अद्वितीय उदाहरण हे की पृथ्वी एंव सूर्य किस प्रकार हमारी रक्षा करते हैं। पृथ्वी की सतह पर जीवन रक्षक पदार्थों की संरचना एंव इसका अनुपात कुछ इस प्रकार का बनता रहता हे कि जीवन के विकास में कोई बाधा न डालकर जीवन का सामयिक विकास करता रहता हे  इन पदार्थों के अनुपात में किस प्रकार के परिवर्तन से पृथ्वी पर जनजीवन असमान्य हो जाता हे और फसलों का विनाश हो जाता है। यह पृथ्वी क वायुमंडल पर चतुर्दिक प्रभाव डालता हे परन्तु इसका प्रभाव सूर्य की स्थिति एंव दशा पर निर्भर करता हे दुनिया भर में सूर्य के विकीर्ण एंव पृथ्वी पर सूर्य की किरणों के आगमन का अध्यन होता रहता हे
जोकि मौसम की भविष्यवाणी के रूप मेँ उदूघोषित हुआ करता है और आने वाले समय के लिये इसकी भविष्यवाणी होती रहतीं है। आजकल भविष्यवाणी काफी हद तक सही सिद्ध होती हे जबकि कुछ समय पूर्व इस भविष्यवाणी पर कोई विश्वाश नहीं करता था और इसे मजाक के रूप मेँ लिया जाता था। अब मौसम की भविष्यवाणी पर विश्वाश कर किसान अपनी खेती करते हैँ और सदीं-गर्मी से बचाव का प्रबंधन भी समयानुसार करते रहते हैँ।
मौसम बिज्ञान की यह सफलता बडी लाभकारी सिद्ध हुई है।
वेज्ञानिक निष्कर्ष / scientist findings
(Science) विज्ञान के क्षेत्र में (ozone layer hole) ‘ओजोन होल’ यानी ‘ओजोन छिद्र’ एक सामयिक विषय है जिस पर वैज्ञानिकों की चर्चा हुआ करती है। यद्यपि इसके विषय में आज भी वैज्ञानिक पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त नहीं कर सके हैं I विज्ञान के छात्रो एंव दूसरे इच्छुक व्यक्तियों के लिये यह लेख लिखा गया है, आशा हे इसे पढ़ने कं पश्चात् पाठकगण अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे