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Thoughts For Students In Hindi विद्यार्थी और विद्याप्राप्ति

Thoughts 

ज्यादातर लोग कहते हैं कि लोहे के चने चबाना तो बड़ा ही आसान है परंतु विद्याध्ययन करना कठिन हैThoughts

और यह बात सच भी है विद्या प्राप्ति के लिए जो विद्यार्थी हैं जो शिष्य हैं उनको एक कठिन तपस्या करनी पड़ती है

Thoughts in hindi on education

thoughts in hindi on educationमहाभारत में भी कहा गया है जिनको सुख चाहिए जो सुख चाहते हैं वह विद्या को प्राप्त नहीं कर सकते और जो विद्याध्ययन चाहते हैं उन्हें सब सब प्रकार के सुखों का त्याग करना जरूरी हो जाता है। यदि आप यह चाहते हैं कि विद्याध्ययन के समय वह सब प्रकार के सुख प्राप्त कर लें और साथ ही विद्या भी पढ़ ले ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता विद्या और सुख का तो वायु और मच्छर के समान स्वाभाविक बैर है। Thoughts in hindi

Thoughts in hindi

आज मैं आपको छोटी सी कहानी सुनाता हूं जिसको सुनकर आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा।

एक बार कुछ मच्छर न्यायालय में जाकर निवेदन करने लगे कि वायु हमें बहुत कष्ट देता है जज ने कहा कि मैं वायु को बुलाकर पूछता हूं जैसे ही वायु आया मच्छर इधर उधर उड़ गए। वो वायु के सामने ठहर नहीं सके विद्या और सुख का भी ऐसा ही संबंध है।

विद्या प्राप्ति के लिए विद्यार्थी अनेक प्रकार के कष्ट उठाते हैं पेट भर भोजन भी नहीं करते जी भर कर सो नहीं पाते यदि विद्यार्थी खूब पेट भर कर खाएगा तो उसे नींद सताएगी और वह पढ़ नहीं सकेगा इसलिए जो विद्यार्थी विद्या प्राप्त करना चाहते हैं वह सदा ही थोड़ा खाते हैं जिसके कारण उनकी जो जीवन सकती है नष्ट ना होने पाए और वह विद्या प्राप्त कर सकें। Thoughts for school

पढ़ने वाला विद्यार्थी देर तक सोता भी नहीं वह सोने में भी समय का थोड़ा ही भाग लगाता है शेष विद्याभ्यास में लगाता है।

अनेक प्रकार के खिलौने खेल और मनोरंजन उसे विद्यार्थी दूर ही रहता है वहीं सब सुखों को छोड़ देता है।

सदा याद रखो यदि कोई विद्यार्थी विद्याध्ययन के समय सुख के लिए प्रयत्न करता है तो वह विद्या नहीं प्राप्त कर सकता वह मूर्ख ही रह जाएगा और जीवन भर दुख ही उठाता रहेगा। hindi thoughts on success

यदि विद्यार्थी विद्याध्ययन के समय अनेक प्रकार के कष्टों को उठाकर भी विद्या प्राप्त करेगा तो वह जीवन पर्यंत सुखी पायेगा। Motivational Stories For Students

Brahmacharya रक्षा के उपाय Students के लिए 

शिक्षा- इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वह एकाग्रचित होकर पढ़ें जो भी गुण वह जिससे भी प्राप्त कर सके उन्हें उन से ही प्राप्त करने का यतन करना चाहिए। विद्यार्थियों का सदा यही लक्ष्य होना चाहिए कि हम विद्वान बन जाएं यह विचारकर ही विधार्थी अपना जीवन सफल कर सकते हैं इससे ही उसका उसके परिवार का और उसके देश का यश बढ़ेगा

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ब्रह्मचर्य रक्षा के उपाय बच्चों के लिए brahmacharya benefits

Naitik shiksha ka mahatva कितना है ये सभी माता पिता जानते हैं ।  यदि आप अपने बच्चो के भविष्य को naitik shiksha brahmacharya benefits in hindiसंवारना चाहते हैं तो Naitik shiksha बच्चो को देनी अधिक जरूरी हो जाती है । आज हम यंहा एक एसी ही Naitik shiksha के बारे में बात करेंगे जिसको आप brahmacharya के नामसे जानते है । यदि आप अपने बच्चों को brahmacharya की Naitik shiksha देंगे तो आपके बच्चे इस देश और आप को गोरव का एहसास करवाएँगे क्योंकि brahmacharya yoga में वो शक्ति है जो और किसी में नही ।

Naitik shiksha brahmacharya

पहले अपने इस आर्यव्रत भूमि जिसे आज भारत वर्ष कहते हैं । यंहा बच्चों की इस Naitik shiksha brahmacharya  की सिख का ख़ास ध्यान रखा जाता था। तभी अपना भारतवर्ष विश्व सम्राट और विश्व गुरु था । लेकिन आज हम ब्रह्मचर्य के फायदे को भूल चुके हैं । ब्रह्मचर्य के नियम पहले सभी गुरुकुल में पढने वाले students के लिए जरूरी होते थे ।

क्योंकि उन्हें ही इस भारतवर्ष की डोर सम्भालनी होती थी । और जब से बच्चो को ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें ये बताना बंद किया तब से हमारा पतन होना शुरू हो गया इसलिए आप माता पिता निसंकोच होकर अपने बच्चो को ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें इसकी  Naitik shiksha जरुर दें । और इस मात्रभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभाएं ।

 माता-पिता झूठी लज्जा से बालकों को जननेन्द्रियों के यथार्थ उपयोग के विषय में कुछ नहीं बताते । इसका परिणाम यह होता है कि आपके बालक दूसरे अयोग्य लोगों से बुरी और हानिकारक बातें सीख लेते हैँ l जननेन्द्रियों के उचित उपयोग का ज्ञान न होने से वे अनेक प्रकार के भयंकर रोगों मेँ फंस जाते हैँ । इसलिए माता-पिता और अध्यापक को चाहिए कि सात आठ वर्ष की आयु में ही बच्चों को इस विषय का उचित ज्ञान करा दें

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गर्भ तथा सन्तानोत्पत्ति के विषय में वनस्पति-विद्या के अनुसार फूलों, फलों और बीजों के बनने तथा पशु…पक्षियों में सन्तानोत्पत्ति की क्रिया दिखाकर बड़े गम्भीर भाव से यह समझाओ कि  फलों, बीजों, पशुओं, और पक्षियों सब के माता पिता होते हैं। माता पिता के प्रेम से ही सन्तान का जनम होता है। तुम्हे भी माता ने 9 महीने तक पेट में रखा है। इन बातों को समझाते समय आपमें लज्जा या संकोच का भव नही होना चाहिए।

थोड़े से स्पष्ट और सार्ग्म्भिरत शब्दों में स्त्री और पुरुष की जननेन्द्रियों का यथार्थ उपयोग उन्हें समझा दो । बच्चे आप की बात को ऐसे समझें जैसे उनका कोई परम मित्र उनके हित के लिए उन्हें कोई परम उपयोगी रहस्य बता रहा है

वीर्य के विषय में उन्हें भली भांति विश्वास करां दो कि वीर्य ही जीवन हैँ I बीर्यहीन मनुष्य रोगों से दुख भोगता हुआ शीघ्र ही नष्ट हो जाता है । भीष्म पितामह, हनुमान और ऋषि दयानन्द आदि अखंड ब्रह्मचारियों के अदभुत कार्यकलाप का वर्णन करके बच्चों में ब्रह्मचारी बनने की रूचि बढाओ I

मनुस्मृति, सत्यार्थप्रकाश और आयुर्वेद के ग्रन्धों में ब्रह्मचारी के लिए जो -जो बातें लिखी हैं वे उन्हें बताओ और उन ‘पर चलने मैं उन्हें सहायता दो । ब्रह्मचर्य का उपदेश देते हुए एसे भाव से बाते करो, जैसे मेडिकल कालेज में कोई प्रोफेसर
शास्त्र पर व्याख्यान देते हुए करता है । इसमें निर्लज्जता मूर्खता है ।

देखिए, योगिराज श्री कृष्णचन्द्र केसे स्पष्ट शब्दों में अर्जुन से कहते हैं…

सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तय: सम्भवन्ति या: ।
तासां ब्रहा महघोनिरंह बीजप्रद: पिता । ।

बच्चे को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए जिससे उसका विवहा के सम्बन्ध में आदर्श बहुत ऊँचा हो जाए । वह विवाह को विषयभोग की सामग्री नहीं, बल्कि उतम सन्तान उत्पन्न करने का, देश जाति तथा धर्म की सेवा का और वंश-बृद्धि का एक साधन समझें । विवाह हो पर भी वह रितुगामी रहे और विषयासक्त न हो l

माता-पिता अपनी सन्तान के अत्यन्त अन्तरंग मित्र होने चाहिए जिससे आपकी सन्तान सदेव भीतरी बातों मेँ आपसे सदा आपसे ही केवल आप से ही सलहा लेती रहेl

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