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hindi kahani short with moral इश्वर सर्वव्यापक है

hindi kahani तो आपने काफी पढ़ी होंगी लेकिन एसी motivational hindi kahani आपने नही पढ़ी होगी इस hindi kahani को पढ़ आपको कुछ नया सिखने को मिलेगा, तो चलिए इस short hindi kahani को पूरा पढ़ते हें।
 
 
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एक गुरु के पास दो मनुष्य शिष्य होने के लिए आए। 
 
गुरुजी ने कहा-” हम तुम दोनों को एक…एक खिलौना देते हैँ, तुम ये खिलौना लेकर ऐसी जगह पर जाकर जहाँ कोई न हो, तोड लाओ; तब हम तुमको अपना चेला बना लेंगे। ” दोनों अपना-अपना खिलौना लेकर चले।
 
एक चेले ने तो गुरुजी के मकान के पीछे जाकर चारों तरफ देखा कि’ अब कोई नहीं है और खिलौना तोड़ लाकर रख दिया 
 
और दुसरे ने खिलोने को लेकर सारा संसार, ऊँची से ऊँची पाहाड की चोटियाँ, गहरी से गहरी समुद्र की सतहँ, एकान्त से एकान्त अंधेरी कोठरियाँ तथा बड़े बड़े भयानक वन खोज डाले,
 
परन्तु उसे कंही ऐसा स्थान न मिला, जहाँ खिलौना तोड़ता, अत: दूसरे ने खिलौना वैसा ही लाकर रख दिया।
 
गुरु ने पहले से प्रश्न किया…” क्योजी, आपको कहॉ ऐसा स्थान मिला, जहाँ से खिलौना तोड़ लाए? ” उसने कहा गुरुजी. मैं आपके मकान के पीछे गया। वहाँ कोई न था। बस, वन्ही खिलौना तोड़ आपके आगे लाकर रख दिया।
 
दूसरे से कहा…”क्यों भाई तुम्हें कोई ऐसा स्थान नहीं मिला, जहाँ से खिलौना तोड़ लाते? तुमने लाकर वैसा ही रख दिया? ” 
 
दूसरे ने उत्तर दिया ” महाराज मैंने ऊँचे से ऊँचे पहाडों की चोटी, गहरे से गहरे समुन्द्र की सतह, अंधेरी से अँधेरी एकान्त कोठरियाँ और बड़े-बड़े भयानक जंगल में घुमा परन्तु मुझे कहीं ऐसा स्थान न मिला’ जहाँ वो ना था अर्थात् परमेश्वर न था।
 
महाराज, इसलिए नहीं तोडा।” महात्मा ने इसे ही अपना चेला बनाया और दूसरे से कहा…तुम इस योग्य नही की मेरे शिष्य बन सको
 
शिक्षा : परमेश्वर सर्वव्यापक है, अत: एकान्त समझ कर भी पाप ना करें , हमेसा पाप करने से बचें।
 
दोस्तों आपने ये motivational hindi kahani पूरी पढ़ी इसके लिए आपका धन्यवाद उमीद करता हु ये hindi kahani आपको पसंद आई होगी।
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hindi kahani तो आपने काफी पढ़ी होंगी और हर बार कुछ नया सिखने को मिला होगा इस हिंदी कहानी को भी मैने इसी उदेश्य से डाला है की आपके जीवन में कुछ परिवर्तन आए 
 
एक गांव में दो रईस रहा करते थे। उनमें से एक तो बड़े मालदार-यहाँ तक कि दस-बीस गाँव और करोडों के मालिक थे और दूसरे साहाब के पास किसी गाव में सिर्फ कुछ हिस्सा था।
 
वहि मालदार साहब को सदैव यह चेष्ठा रहती की लोग पहिले हमसे दुआ, बंदी, सलाम करें। इसलिए आप गाल फुलाए जैसे रहते थे। 
 
कभी अपने आप किसी दूसरे से हाथ जोड़ प्रणाम नहीं किया करते थे और न बैठने-उठने में ही ‘ आइय , ‘पधारिए’ कहते थे बल्कि जहाँ बैठे होते थे वहीं कुर्सी या आराम-कुर्सी पर बैठे रहते थे। आस पास चारपाइयाँ पडी रहती थी , 
 
उन पर आने वाले की तबीयत चाहै तो बैठ जाये और तबीयत चाहे चला जाये! इतना ही नहीं; वरन दो-चार आदमियों के बैठे रहने पर भी घर से मिठाई मंगवाई या कोई और वस्तु आई, तो और किसी से पूछना-पाछना नहीं । 
 
आप ही खाने लगते थे यही दशा आप की पान-पत्ते और इलायची में रहती थी। पास के बैठने वाले मुंह ताका करते थे और आप पान, इलायची मुंह में भरे बड़े शोक से बातचीत किया करते। यही दशा इनको अपनी रियासत से बाहर जाने पर भी साथ के आदमियों से या अन्यो से भी रहा करती थी।
 
दूसरे साहब जो इनके सामने कुछ भी नहीँ थे, और केवल एक गांव के कुछ हिस्सेदार ही थे, उनकी यह दशा थी कि सबसे प्रथम अभिवादन करते। 
 
”अपनी शक्ति भर कभी दूसरे को यह मौका न देते थे कि वह प्रथम अभिवादन करे। यों धोखे से चाहे कोई प्रथम भले ही कर ले। दूसरे को देखते ही उठ पड़ते थे और अपने से उच्च आसन दिया करते थे। पर फिर भी लोग जो जैसा होता था वैसा ही बैठा करते थे। 
 
इसके अतिरिक्त कभी किसी वस्तु की एकाएकी मांगने की चेष्टा नहीं करते थे, किन्तु यह औरों को खिला-पिला देते थे और आप वैसे ही रह जाते थे।
 
दूसरे के दुख पर जहॉ वह किसी के दरवाजे नहीं जानते थे, वहीं से बिना बुलाए ही दुखी के दरवाजे प्रत्येक दुखी – सुखी के दुख सुख में शामिल हुआ करते थे  परिणाम यह निकला कि उन बडे मालदार की की माँ मर गई, और उनके यहाँ एक आदमी भी न पहुँचा, विशेषकर उनकी प्रजा भी न गई। केवल नौकर और आप थे 
 
और इस एक ग्राम के हिस्सेवाले की स्त्री के मरने के समय पाँच सौ आदमी साथ थे केवल एक काम यही नहीं, बल्कि उस एक ग्राम के हिस्सेवाले के यहाँ यदि कुछ भी काम होता था, तो सैकडों आदमी जमा हो जाते थे 
 
और दूसरी तरफ उस बड़े रहिस के यंहा कोई झाँकने भी ना जाता था। 
 
और एक ग्राम के हिस्सेदार की लोग सर्वथा हर प्रकार से इज्जत किया करते थे और इनको देखकर उठते भी न थे। निदान इन्होंने अपनी यह बेइज्जती देख सैंकडों पर झूठे मुकदमे, तहसील-वसूली में सख्ती आदि हर प्रकार के प्रपंच रचे, परन्तु लोगों ने इनकी इज्जत न की।
 
शिक्षा – अगर तुम अपनी इज्जत कराना चाहते हो, तो पहले दूसरों की इज्जत करना शुरू करो, क्योंकि दुनिया आइना के समान है। यथा, आइने के सामने जैसी शकल होगी उसमें वैसी ही शकल दिखेगी इसी तरहां दुनिया के साथ जैसा बर्ताव आप करेंगे दुनिया भी आपके साथ वैसा ही बर्ताव करेगी।  
 
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Motivational story in hindi

Secret To Success story in hindiएक सेठजी की अपनी दुकान थी। बही मेहनत से अपने कारोबार को बढाया। अच्छी-खासी कमाई भी होती थी।
सेठजी का इकलौता पुत्र था। लेकिन वह माहाआलसी , कामचोर और निखट्टू भी था। सेठजी के लाख समझाने पर भी वह काम न करता था। सेठजी को अपने कारोबार को देख चिन्ता होती रहती की इसको यह कैसे सम्भाल पाएगा। आखिरकार सेठजी के मन में एक idea आया।
 
 
सेठजी ने अपने लड़के को कहा, “बेटे आज अपनी मेहनत का कुछ कमाकर लाओ तभी भोजन मिलेगा, अन्यथा नहीं। सेठजी ने लडके को सुधारने का अच्छा तरीका ढूंडा था। लड़का सेठजी की बात सुन कर परेशान हो गया और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए? वह सीधे अपनी माताजी ’के पास गया गिड़गिड़ाने लगा कि मुझे एक रुपया चाहिए। माताजी ने उसे एक रुपया दे दिया। शाम को जब सेठजी ने आज की Income मांगी तो लडके ने एक रुपया उसके हाथ पर रख दिया। पुराने जमाने में एक रुपए की भी बहुत कीमत होती थी। लेकिन सेठजी
की नजर लडके के कार्य पर थी कि वह क्या करता है। वह सब जान गए। सेठजी ने आदेश दिया जा अब इसे कुए में डाल दे लंड़का दौड़कर गया और रुपया कूँए में फेक दिया। लड़के ने सोचा की बला टल गई।
 
सेठजी ने दूसरे दिन फिर लडके को बुलाया और कहा आज फिर अपनी मेहनत का कुछ कमाकर लाओ, तभी आपको भोजन मिलेगा। ” लडके ने सोचा आज फिर वही मुसीबता उसका स्वभाव था कामचोर, आलसी, कार्य वह करना नहीं चाहता था। आज़ वह बड़ी बहन के सामने जाकर एक रुपये के लिए रोने… धोने लगा। बहन को भाई पर दया आईं और एक रुपया उसे दे दिया। लड़के की परेशानी दूर हो गयी। शाम को सेठजी ने उसकी कमाई मांगी। उसने आज फिर उसे एक रुपया थमा दिया दिया। सेठजी बुद्धिमान् थे, वह जानते थे कि यह रुपया कहाँ से लाया है। क्योंकि कल मां से रुपया लाए जाने पर सेठजी ने उसकी माँ को मायके भेज दिया था। अब वह बहन से लाया है।
 
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सेठजी ने आदेश दिया जाओ इसे भी उसी कूँए में डाल आ’ओँ। लडका तेजी से गया और रुपया डाल आया। तत्पश्चात उसे भोजन मिला। लेकिन सेठजी ने अपनी बेटी को उसकी ससुराल भेज दिया। तीसरे दिन सेठजी ने फिर लडके को बुलाया और कहा आज फिर अपनी मेहनत का कुछ कमा कर लाओ। ” लड़का आज बहुत परेशान था। क्योकि आज उसे रुपया देनेवाली उसकी माँ, बहन घर पर न थी। आज़ उसकी कौन सुनता। उसके पडौसी सभी जानते थे वह निखटू है। जब रुपया मिलने की कोई उम्मीद नहीं रही तो वह चला बाजार में काम दूँढने। बडी मुश्किल से एक काम मिला।
 
लालाजी ने दिनभर भी कार्य करने के बाद एक चवन्नी देने को कहा। लड़के ने इसे  स्वीकार किया दिन भर वह बोरियाँ ढोता रहा। उसकी कमर लचक गई। सीधी भी न कर सकता था। पहली बार मेहनत करने के कारण वह थक कर चूर हो चुका था। चलने की शक्ति भी उसमें अब न रही।
 
कठिन व कठोर मेहनत के बाद वह चवन्नी लेकर घर पहुँचा। सेठजी ने देखा कि लडके का चेहरा कुछ और ही बता रहा था। उसने आज की मेहनत की कमाई मांगी। लड़के ने हाथ पर एक चवन्नी रख दी। सेठजी समझदार थे तुरन्त बोले “जाओ इसे भी कूँए में डाल दो।” यह सुनते ही लड़के की आँखे क्रोध से लाल हो गई और बोले, “मैरी दिन भर कमर लचकी रही, चलने की भी शक्ति न रही श्री, कितनी कठिन परिश्रम करने के बाद मैं यह चवन्नी लाया हूँ। आप कह रहे हैं कि इसे कूँए में डाल दो।”
 
सेठजी ने कहा, “कल तो एक रुपया कूँए में डाला था, आज तो केवल एक चवन्नी है लडका बोला “पिताजी, यह चवन्नी एक रुपए से कहीं ज्यादा कीमती है क्योंकि मैंने यह ‘जान लिया कि बिना मेहनत की कमाई ‘के एक रुपए के फैकने से मुझें कोई कष्ट न हुआ जबकि चवन्नी के डालने में कष्ट अनुभव कर रहा हू।
 
सेठजी ने लड़के की कमर थपथपाई। उसे अपने गले से लगा लिया और अपनी दूकान का कारोबार उसे सौंप दिया और कहा, ” आज तुमने परिश्रम के फल को जान लिया जो मीठा होता है। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। अब तुम यह कार्य कर सकोगे। बस, यही शिक्षा मैं तुम्हे देना चाहता था।
 
शिक्षा – ये hindi story पढ़ कर हमे शिक्षा मिलती है की मनुष्य को सफलता दिलाने वाला उपाय पुरुषार्थ हैं। जो मनुष्य पुरुषार्थ नही करता, वह पिछड जाता है। निठल्ले व्यक्ति का जीवन व्यर्थ होता है।