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Hindi Stories विश्वासघात पर हिंदी कहानी कोए, हिरण, गीदड़ की कहानी Part 3

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Hindi Kahaniतो केवल अपने ही जैसे लोगों के साथ निभा सकती है यह सुनकर गीदड़ को क्रोध आ गया

प्रेरणादायक हिंदी कहानी 

मैं उन्हें घूरता हुआ बोला जिस दिन तुम्हारी किरण से पहली भेंट हुई थी उस दिन क्या वह आपको अच्छे से जानता थानहीं इस पर भी आप लोगों का प्यार दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है किसी ने कहा है कि यहां पर कोई बुद्धिमान होता वह साधन पुरुष को खुदा वान समझकर उसका सम्मान किया जाता है

यह मेरा है यह तेरा है यह अपना है या पराया है ऐसी बातें तो कम बुद्धि वाले लोग ही क्या करते हैं जिनके पास ज्ञान नहीं जो अज्ञानी है वही मेरे तेरे के चक्रों में उलझे रहते हैं

मिर्ग इनकी बातों से चिढ कर बोला अरे भाई इस प्रकार की बातों का क्या लाभ है हम लोगों को आपस में मिलकर ही रहना चाहिए इस संसार में ना तो कोई किसी का शत्रु है और ना ही मित्र बस आपस में मिल जुल कर रहने का नाम ही सच्चा प्यार है

कोए ने जब देखा की हिरण उसकी बात नहीं सुनता तो थक-हारकर बोला ठीक है भाई जैसा तुम कहते हो वही उचित है बस तुम जीत गए तीनों रात को बहुत देर तक आपस में वार्तालाप करते रहे कोए और हिरण के मन तो साफ़ थे

लेकिन सियार?

उसके मन में तो हिरण का मांस खाने की चाह लगी थी वह तो उस मौके की तलाश कर रहा था जब हिरण को चट कर जाए मित्रघाती यह गीदड़ हर समय बुरा ही सोचता था

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चालाकी अवसर की तलाश में अपना समय काटने वाला उसके सामने एक ही लक्ष्य था हिरण का मांस खाना उसकी यही मंजिल थी

एक दिन गीदड़ ने अपना मुंह का ताला और हिरण के पास जाकर बड़े प्यार से देखो मित्र इस जंगल को पार कर एक हरा भरा मक्के का खेत उसमें चलकर मक्का खाने में बड़ा आनंद आएगा चलो मैं तुम्हें लेचलता हूं यदि तुम्हारी यही इच्छा है मित्र तो चलो चलते हैं रात के समय वह उस खेत में गई हिरण में हरे भरे खेत को देखा तो उसके मुंह में पानी भर आया

वह तो उसी समय खेत में जाकर हरे हरे पत्तों को खाने लगा उस रात से वे दोनों उस खेत में आने लगे बड़े मजे से हरे भरे पौधों को खाते और आनंद लेते एक दिन खेत के मालिक ने हिरण को चरते हुए देखा उसे अपनी फसल नष्ट करने वालों पर बहुत अधिक क्रोध आता था

गीदड़ तो शैतान था वह तो पहले से ही छुपा हुआ एक कोने में बैठा था बस खेत के मालिक की नजर हिरण पर पड़ गई कोई बात नहीं बच्चे तेरे को तो मैं अब जाल में ही बाँध कर रखूँगा खेत के मालिक ने हिरण की ओर देखकर अपनी मुछो को ताव दिया

दूसरी रात ही उसने खेत में जाल बिछा दिया जैसे हिरण वहां आया तो आते ही जाल में फंस गया
हिरण अपने आप को चारों ओर से बंधे देखकर अपने मित्र गीदड़ को आवाज दी अरे भैया मुझे बचाओ मैं जाल में फंस गया हूं गीदड़ समझ गया कि हिरण जाल में फंस गया है यही तो मैं चाहता था अब थोड़ी देर में खेत का मालिक आएगा जो क्रोध अंधा होकर इस हिरण को मार देगा बस फिर क्या है मेरा काम बन जाएगा वह हिरण की ओर घूर घूर कर देख रहा था

भैया मेरे को ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहे हो जल्दी करो मेरे बंधन काटो देखो मैं जाल में फस गया हूं देखो मित्र यह जाल तो चमड़े का बना हुआ है आज रविवार होने के कारण मेरा व्रत है ऐसे में मैं चमड़े को मुंह लगाकर यह पाप अपने ऊपर नहीं लेना चाहता मैं धर्म के कारण मजबूर हूं मित्र Hindi Kahani

यह कहकर गीदड़ पास की झाड़ियों में छुप कर बैठ गया और खेत के मालिक के आने की प्रतीक्षा करने लगा हिरण बेचारा खून के घूंट पीकर रह गया उसे रह रह कर गीदड़ पर गुस्सा आ रहा था किंतु वह कुछ नहीं कर सकता था

बेबसी के आंसू बहा कर ही रह गया था हिरण ऐसे में उसे अपने मित्र को एक ही बातें याद आ रही थी उधर कोई नहीं जैसे ही देखा कि उसका मित्र अभी तक नहीं आया तो उसे बहुत चिंता होने लगी आखिर वह अपने मित्र की तलाश में निकल पड़ा उड़ता उड़ता को उसके तक पहुंच गया है जिसमें उसका मित्र जाल में फंसा हुआ अपने अंतिम घड़ियां गिन रहा था उसका दिल डूबने लगा और वह हिरण के पास जाकर पूछने लगा अरे भाई यह सब क्या है

भैया बस जाल में फंसी गया उसकी धन ने मुझे यह रास्ता दिखाया वह स्वयं पर ना जाने कहां गायब हो गया लगता है यह सब उसी की चाल है जो मेरी इतनी आवाज सुनकर भी नहीं आया मैंने तो तुमसे पहले ही कहा था मित्र की दोस्ती केवल उन्हीं लोगों से होती है जो अपनी विचारधारा के हो अच्छे वंश के हो जो मुंह पर मीठी-मीठी बातें करते हैं पीठ के पीछे बुराई करते हैं ऐसे मित्रों को त्याग देना चाहिए ऐसे ही सुबह हो गई

हिरण बेचारा अपनी मौत की घड़ीयां गिन राहा था क्योंकि सुबह होते ही खेत का मालिक आने वाला था
वह आते ही उसे जान से मार डालेगा

उसी समय कोए ने हिरण के कान में जाकर कुछ कहा हिरण उसी समय उसकी बात समझ गया और अपने शरीर को निढाल सा बनाकर ऐसे स्थिर लेट गया जैसे मर चुका हो उसकी मौत को पक्का करने के लिए कोआ उसके शरीर पर ऐसे बैठ गया जैसे मरे हुए शव पर कोए बैठे रहते हैं

जैसे ही खेत का मालिक उधर आया उसने जाल में फंसे हिरण को धरती पर मरे हुए देखा तो क्रोध में आकर बोला साला मेरे आने से पहले ही मर गया

यह कहकर उसने अपना जाल खोलकर लपेट लिया और अपनी लाठी को कंधे पर रख वापस जाने लगा कोए ने उसी समय हिरण से कहा निकल लो यही मौका है

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धरती पर गिरा हिरण उसी समय छलांग लगाता हुआ भाग निकला खेत के मालिक ने जब हिरण को भागते देखा तो उसका क्रोध और भी बढ़ गया उसने उसी समय कंधे पर रखी लाठी को भागते हिरण के दे मारा परंतु हिरण तो कब का भाग चुका था गीदड़ जो पास छुपा बैठा था वह लाठी सीधी उसके सिर पर पड़ी जिससे उसके सिर के दो टुकड़े हो गए

उस गीदड़ को उसके पापों की सजा मिल चुकी थी जो जैसा करता है वैसा ही भरता भी है

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Hindi Kahani कोए हिरण गीदड़ की कहानी , बेगुनाह गीध Part 2

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नदी के तट पर एक बड़े वृक्ष के ऊपर 1 बूढा गीध रहता था जवानी के दिनों में उसका इस जंगल में बहुत दबदबा था छोटे-मोटे जाकर तो उसकी शकल देखकर ही भाग जाया करते हैं जवानी के दिनों में हर जीव को एक ऐसा नशा होता है कि वह बुढ़ापे को भूल कर भी याद नहीं करता Hindi Story

यही कारण है कि जवानी के दिन बहुत हंसी खुशी में व्यतीत हो जाते हैं और बुढ़ापा?

बुढ़ापे की आयु में आकर इस गीध के नाखून टूट कर गिर गए आंखों का प्रकाश बहुत ही कम हो गया अपनी बेबसी और मजबूरी पर आंसू बहाता यह गीध इस वृक्ष पर बैठा रहताऔर शेष पक्षियों को हंसते खेलते देखता रहता

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इसी वृक्ष पर और पक्षी अपने अपने घोसलों में रहते थे इस बूढ़े गीध की हालत देखकर उन्हें भी दया आ जाती यह सब के सब अपने भोजन में से थोड़ा थोड़ा उसे भी खाने को दे देते

hindi story for class 2जिससे वह गीध अपना पेट भर लेता इस भोजन के बदले में गीध सारा दिन पक्षियों के बच्चों की रक्षा करता एक दिन कोई बिलाव उधर से गुजरा बड़े वृक्ष पर बहुत से पक्षियों के बच्चों की आवाज सुनकर वह वहीं रुक गया

उस वृक्ष पर रहने वाले पक्षियों के बच्चों ने जब बिलाव को देखा तो वो जोर जोर से चीखने लगे चिल्लाने लगे गीध ने जब बच्चों के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनी तो वह समझ गया अवश्य ही से कोई खतरा है

शायद कोई शत्रु आक्रमण करने के लिए आया है इसीलिए वह गरजदार आवाज में बोला कौन है क्या करने आया है यहां पर

बिलाव ने जब गीध को देखा तो डर के मारे कांप उठा और मन ही मन कहने लगा हाय मैं मर गया थोड़ी देर तक शांत मन से सोचने के बाद बोला अरे उस समय तक डर काहे का जब तक शत्रु सामने ना जाए यदि वह सामने आ ही जाए तो बुद्धिमान को चाहिए कि उससे बचने का उपाय करें

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अब मैं इसके समक्ष भाग तो सकता नहीं अब तो जो कुछ होना है वह होकर ही रहेगा क्यों ना इस गीध को अपना मित्र बना लूं जो काम शत्रु बनकर नहीं निकलते हुए मित्रता से बन जाते हैं चालबाजी से ही दुनिया को लूटा जा सकता है

यही सोच कर वह बिलाव गीध के पास गया

अरे तुम कौन हो यहां पर क्या करने आए हो?

मैं एक ब्लॉग हूं आप से मित्रता करने चला आया हूं चाचा नहीं नहीं तुम यहां से चले जाओ इस वृक्ष से दूर चले जाओ इसी में तुम्हारी भलाई है hindi story for class 2

चाचा पहले बात तो सुन लो ऐसे नाराज क्यों हो रहे हो क्योंकि कहा गया है कि कोई जाति विशेष के कारण ही मारा जाता है पूजा जा सकता है बुद्धिमान प्राणी को चाहिए कि उसका स्वभाव और उसके व्यवहार को देखो यदि उसमें कोई बुराई दिखे तो उसे मार डालो यदि भलाई नजर आए तो मित्र बना लो

अच्छा पहले तो तुम यह बताओ कि यहां क्या करने आए हो? चाचा मैं यहां गंगा तट पर रहता हूं और हर रोज सुबह उठकर गंगा में स्नान करता हूं मैंने चंद्रायण व्रत लिया है इसीलिए मैंने मांस खाना छोड़ दिया है
बस आपके धर्मी होने की प्रशंसा सुनकर मैं चला आया किंतु आप तो घर में आए मेहमान को ही मारने के लिए आ दोड़े

गृहस्थी का धर्म पर इस प्रकार है कि घर आए मेहमान तो क्या शत्रु का भी उचित रूप में अतिथि सत्कार किया जाए आपने कंही देखा हे कि वृक्ष काटने आए लकड़हारे को अपने करीब आते देखकर वह अपनी छाया तो उसे नहीं हटा लेता यदि किसी भी देश के पास खिलाने पिलाने की सामग्री ना भी हो तो केवल मीठी बातों से घर आए मेहमान का पेट तो भर सकता है

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गीध बिलाव की बातों में पूरी तरह आ गया उसने बिलाव को अपने साथ रहने की अनुमति देदी कुछ दिन तक बिलाव बड़े प्यार और शराफत से इसी पेड़ के नीचे रहा वह घंटो बैठकर गीध के साथ ज्ञान की बातें करता रहता धीरे धीरे उसने अपना पूरा विश्वास गीध पर जमा लिया

कुछ ही दिनों के पश्चात वह अपने असली रुप में आने लगा वह हर रोज गीध की आंखों से बाच कर किसी न किसी पक्षी का बच्चा उठाकर ले जाता और पेड़ की जड़ों में बैठ जाता और आनंद से खाता

गीध बेचारा तो देख नहीं सकता था उसे क्या पता था यह विश्वासघाती धोखा कर रहा है कुछ ही दिनों के पश्चात पक्षियों को यह पता चलने लगा कि उनके बच्चे घोसलों में नहीं है जिनके बच्चे नहीं मिल रहे थे वह बिचारे चीखने चिल्लाने लगे रो-रो कर एक दूसरे से पूछते किंतु बच्चे थे ही कन्हा जो उन्हें मिलते बात ठंडी पड़ जाती तो दूसरे दिन फिर किसी ना किसी पक्षी का बच्चा गायब हो जाता है वह बेचारा रोने लगते hindi moral stories

अंत में सारे पक्षी यह बात समझ गए कि उनके बच्चे निरंतर गायब हो रहे हैं उनके बच्चे कहां जाते हैं?

चारों ओर से हंसो और उठ खड़ा हुआ कि यहां पर आवश्यक को हिंसक पक्षी आया है जो उनके बच्चों को खा रहा है इस सिलसिले में सब पक्षियों ने खोज आरंभ कर दी

बिलाव को पता चल गया कि आप की चोरी पकड़ी जाने वाली है सब पक्षी एकजुट होकर उसके पीछे लग गए हैं

अब तो जो कुछ खाना खा खा लिया अब तो यहां से भाग लेने में ही भलाई है नहीं तो यह लोग मुझे मार डालेंगे

बस रातोरात वह पापि वहां से भाग गया एक दिन जब सब पक्षी मिलकर अपने बच्चों के खूनी को धुंढ रहे थे तो उन्होंने पेड़ की जड़ों में बच्चों की हड्डिया पड़ी देखी

इस पेड़ पर तो गीध ही ऐसा पक्षी है जो हिंसक है और सारा दिन इस पेड़ पर बैठा रहता है हमने तो इसे अपने बच्चों की रखवाली के लिए रखा था यह दुष्ट तो हमारे बच्चों को ही खा गया इस दुष्ट को हम अपना भोजन भी खिलाते रहे

मारो मारो मारो यही है विश्वास घाती
इस पापी खूनी अधर्मी दुष्ट को मारो

सारे पक्षी इकट्ठे होकर उस बूढ़े गीध पर टूट पड़े वह तो पहले ही मरा हुआ था थोड़ी सी मार के पश्चात ही संसार से चला गया केवल इसलिए उसने अपने प्राण त्याग दिए क्योंकि उसने दुष्ट स्वभाव के प्राणी पर विश्वास कर लिया था

यह कहानी सुनाकर कोए ने कहा कि मैं तुम्हें इसलिए कहता हूं कि किसी भी दुष्ट प्राणी से मित्रता नहीं करनी चाहिए

इस Hindi Story का Part 3

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Hindi Short Stories For Class 1 मित्र सदा अपने जैसा होना चाहिए Part1

 Hindi Short Stories मगध देश के जंगलों में एक कोवा और हिरण बहुत पुराने मित्र रहते थे इन दोनों में इतना प्यार था कि उनके प्यार को देखकर जंगल के दूसरे जानवर भी हैरान होते और उनसे ईर्ष्या करते

एक बार एक गीदड़ उस जंगल में घूमता हुआ निकला तो उनकी नजर उस हिरण पर पड़ गई

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आहा क्या पला हुआ हिरण है यदि इसका मांस खाने को मिल जाए तो आनंद आ जाए बस अब में इसे पाने का पूरा प्रयत्न करूंगा

ऐसा सोच कर वह गीदड़ हिरण के पास गया Hindi Short Stories

उसने यह निर्णय कर लिया था कि मैं सबसे पहले इस पर विश्वास बेठाऊंगा फिर काबू में लाऊंगा

भैया हिरण नमस्कार कहो आनंद मंगल तो है ना ?

हिरण ने गीदड़ को बड़े ध्यान से देखा और फिर कुछ देर तक सोचता रहा जैसे उसे पहचानने का प्रयतन कर रहा हो

काफी देर के पश्चात हिरण बोला Hindi Short Stories

भैया आप कौन हैं मैंने तुम्हें पहचाना नहीं

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भैया मैं एक गीदड़ हूं इधर ही रहता हूं क्योंकि मेरा इस जंगल में कोई मित्र नहीं है इसलिए अधिक चिंतित रहता हूं यदि तुम मेरे मित्र बन जाओ तो मुझे खुशी होगी क्योंकि अकेले प्राणी का कोई जीवन नहीं होता

चलो यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो ठीक है आज से हम दोनों मित्रता के धागे में बंध गए

उन दोनों के जीवन का एक नया दौर आरंभ हो गया दिन भर में वह इकट्ठे घूमते रहे Hindi Short Stories

जैसे ही रात हुई तो हिरण अपने घर की ओर जाने लगा तो गीदड़ भी उसी के साथ चल पड़ा हिरण एक बड के बड़े वृक्ष के साथ ही रहता था

वृक्ष पर ही एक कोवा अपने अपने घोंसले में रहता था इसलिए हिरण के साथ उसकी काफी पुरानी मित्रता चली आ रही थी

कौवे ने अपने मित्र हिरण के साथ गीदड़ को आते देखा तो हैरान होकर पूछने लगा Hindi Short Stories

अरे मित्र इसे कहां से ले आए कौन है यह?

मित्र यह गीदड़ है जो आज से हमारा मित्र बन गया है इसीलिए यह मेरे साथ चला आया है

हिरण  भाई किसी भी राहा चलते प्राणी से इतनी जल्दी मित्रता नहीं कर लेनी चाहिए इसका परिणाम अच्छा नहीं होता फिर बुद्धिमानों ने कहा है जिसका कुल सील कुछ भी पता ना हो उसे कभी भी अपने पास नहीं रखना चाहिए इसी प्रकार एक एक बार एक उदबिलाव के अपराध में बेगुनाह बुढा गीध मारा गया था

कोए के मुंह से यह सुनकर हिरण और गीदड़ ने पूछा वह कैसे जरा हमें भी तो विस्तार से बताओ

इस hindi story का अगला भाग पढ़े part 2

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बच्चो को अच्छी सिख देने वाली कहानी Kids Story In Hindi

Kids Story In Hindi नमस्कार दोस्तों दोस्तों आज आप भारत योगी पर एक ऐसी कहानी पढेंगे जिसको पढ़कर आपको जीवन में एक अच्छी सीख मिलेगी कुछ अच्छा करने की (Kids Story In Hindi) प्रेरणा मिलेगी और दोस्तों यह कहानी बच्चों को तो जरूर से भी जरूर पढ़नी चाहिए

 Kids Story In Hindi बच्चो को अच्छी सिख देने वाली कहानी दोस्तों काफी समय पहले की बात है एक काफी विशाल जंगल था और वहां पर एक काफी सुंदर और काफी बड़ा सेब का पेड़ था उस पेड़ पर रोज एक बच्चा आता और उस पेड़ पर खेलता और कभी दोस्तों पेड़ की डाली पर लटक जाता कभी उसके फल तोड़ता कभी उस पर उछल कूद मचाने लगता और जो सेब का पेड़ था वह भी उस बच्चे की उछलकूद से काफी ज्यादा खुश रहता था Kids Story In Hindi

Kids Story In Hindi बच्चों की कहानियाँ

इसी तरह दिन और रात भी बीते काफी वर्ष व्यतीत हो गए काफी वर्ष बीत गए और 1 दिन बच्चे ने अचानक वहां आना बंद कर दिया अचानक से कहीं चला गया था और फिर वह लौटकर भी नहीं आया और काफी समय तक जो पेड़ था उसका इंतजार करता रहा काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी जब वह नहीं आया तो पेड़ काफी उदास उदास रहने लग गया था

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फिर अचानक काफी सालों बाद काफी वर्षों बाद वह बच्चा वापस आया जब तक वह थोडा बड़ा हो चुका था काफी बड़ा हो चुका था और उसे देखा तो पेड़ काफी ज्यादा खुश हुआ और उसको कहा कि आओ खेलें पर जो बच्चा था जो काफी समय बाद आया था वह पेड़ से बोलता है कि अब मैं बड़ा हो गया हूं और अब मैं उसके साथ नहीं खेल सकता और बच्चा उस पेड़ को कहने लगा कि अब तो मुझे खिलौने अच्छे लगते हैं मैं खिलौने के साथ खेलना चाहता हूं लेकिन मेरे पास खरीदने के लिए पैसे नहीं है

तब पेड़ बोला कि मित्र तुम उदास ना हो मेरे जो फल (सेब) है तुम इन्हें बाजार में ले जाकर बेच दो बच्चा काफी खुश हुआ और उसने फल तोड़े और बाजार में जाकर बेच दिए फिर उसने वहां से खिलौने खरीदे और फिर से अचानक वह बच्चा वहां पर आना बंद हो गया और फिर पेड़ दोबारा उदास रहने लगा

काफी समय बाद वह बच्चा फिर आया तब वह काफी थका हुआ था

काफी उदासी भरे स्वर में पेड़ ने कहा अब तो ना मेरे पास में फल है ना ही मेरे पास में लकड़ी है अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाऊंगा

तब वह बच्चा जो बूढ़ा हो चुका था वह बोला कि अब मुझे कोई सहायता नहीं चाहिए बस मुझे एक जगह चाहिए जहां पर मैं अपनी बाकी की जिंदगी गुजार सकूं तब पेड़ ने उसे अपनी जड़ों में पनाह दी और वह बुढा हमेशा पेड़ की जड़ों में ही रहने लगा

शिक्षा :- बच्चों हमें इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि आज की जो नई पीढ़ी है वह अपने माता पिता से काफी सहायता लेती है बचपन से बड़े होने तक काफी सहायता लेते हैं लेकिन एक दिन वह उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं और सिर्फ अपने स्वार्थ पूर्ती के लिए इधर से उधर भटकते हैं और तभी वापस आते हैं जब उन्हें कोई जरूरत होती है और धीरे-धीरे समय बीतता जाता है उसी प्रकार जीवन बीत जाता है हमें अपने माता पिता की सेवा करनी चाहिए

बच्चों इस कहानी में आपने देखा कि कैसे वह पेड़ उस बच्चे की मदद करता है उसके साथ में खेलता है और जब उसे जरूरत होती है तो उसे अपने फल भी देता है और वह उसे बेचकर खिलौने भी खरीद लेता है लेकिन जब बच्चे का स्वार्थ पूरा हो जाता है तब वह उस पेड़ के पास में नहीं आता उसके साथ में नहीं खेलता हमें इस प्रकार के स्वार्थ को भूलकर हमेशा एक अच्छा इंसान बनने की तरफ बढ़ना चाहिए

बुद्धिमान व्यापारी

चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यों ना हो लेकिन फिर भी आपको अपने भाई बंधु जनों के लिए समय निकालना ही चाहिए

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लालच पर कहानी लालच बुरी बला है धोखे बाजो से सावधान

लालच बुरी बला है धोखेबाजों से सावधान

लालच बुरी बला है

Hindi me kahani तो आपने काफी पढ़ी होंगी और ये hindi me kahani हमे अच्छी शिक्षा भी देती है ताकि हम अच्छे इन्सान बनसके उमीद आहे ये काहानी आपको पसंद आयेगी

 

 

lalach buri bala hai

एक तालाब के किनारे शेर रहता था उसके पास एक सोने का कड़ा था शेर धूर्त था वह उस कड़े का लोभ दिखाकर आने जाने वाले मुसाफिरों को अपना शिकार बनाता था लालच बुरी बला है

एक दिन एक सेठ जी तालाब के किनारे से होते हुए जा रहे थे शिकार को देखकर शेर पानी में जा बैठा जैसे ही सेठ जी शेर के पास पहुंचे शेर ने अपना शिकार फसाने वाला मंत्र पढ़ा ऐ मुसाफिर रुको मेरे पास एक सोने का कड़ा है आकर ले जाओ यह शब्द सेठ जी के कानों में पडे और रुक गए शेर ने फिर यही पुकारा सेठ जी ने सोचा ऐसा अवसर तो सौभाग्य से मिलता है

लालच पर कहानी लालच बुरी बला है

लेकिन शेर को देखकर डर गए सेठ जी सोचते रहे की क्या किया जाए कि जान भी बन जाए और सोने का कड़ा भी हाथ आ जाए सेठ स्वभाव के लालची थे साथ ही यह भी सोच रहे थे कि शेर मांसाहारी होता है इसके पास जाना तो जानबूझकर प्राण गवाना है लालच बुरी बला है

दूसरी ओर शास्त्र कहते हैं कि भूल कर भी नदी, शस्त्रधारी, मूर्ख व्यक्ति का विश्वास नहीं करना चाहिए सेठ जी ने शेर की परीक्षा लेनी चाहि पूछा दिखाओ तुम्हारे सोने का कड़ा कहां है?

लालच पर छोटी कहानी

शेर ने तुरंत हाथ पानी में से निकाल कर कड़ा सेठ जी को दिखा दिया सेठ जी ने कहा तुम तो हम लोगों को खाने वाले हो इसलिए मैं तुम पर विश्वास नहीं कर सकता शेर ने अपनी बात को जारी रखा और कहा

हे मुसाफिर मुझसे ना जाने कितने निर्दोष मनुष्य आदि की हत्या हुई है मेरी अज्ञानता के कारण बहुत पाप हुए हैं जिससे मेरा पूरा परिवार नष्ट हो गया अब मैं अपने पापों का प्रायश्चित कर रहा हूं मुझे एक महात्मा ने धार्मिक उपदेश दिया कि आप का प्रायश्चित तभी होगा जब आप दान पुण करें प्रतिदिन एक सोने का कड़ा दान देवें इसलिए मैं नित्य राहगीर को एक कड़ा दान में देता हूं लालच बुरी बला है

लालच का फल पर कहानी

सेठ जी शेर के धर्म वचन को सुनकर लालच में आ गए और जहां पहुंचा शेर के पास और बोला लाओ दे दो सोने का कड़ा शेर ने एक और अंतिम दाव खेला कि आप पहले तालाब में स्नान कर लेना तभी मैं कड़ा दूंगा सेठ जी जैसे ही वस्त्र निकालकर तालाब में पहुंचे तो शेर ने सेठ जी को तुरंत दबोच लिया और एक ही झटके में उसकी हत्या कर अपनी भूख को शांत किया

शिक्षा- मनुष्य को कभी भी लालच में आकर अविश्वसनीय पर विश्वास नहीं करना चाहिए दुष्टों का स्वभाव कभी नहीं बदलता अतः उन से दूर रहने में ही भलाई है

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तोल मोल कर बोल बोले हुए शब्द वापस नहीं आते | Short Stories Motivational in Hindi

Short Stories In Hindi बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

Short Stories Motivational in HindiShort Stories दोस्तों हमारी आज की जीवनशैली ऐसी हो गई है जिसमें कि हम किसी को कुछ भी बोल देते हैं हम सोचते नहीं कि हमारे मुंह से क्या निकलता हमें क्या कहना चाहिए और क्या नहीं कहना चाहिए इस पर हमें विचार करना जरूरी है काफी लोग होते हैं जो जल्दी से क्रोधित हो जाते हैं और उस क्रोध में आकर वह ना जाने क्या क्या अनाप-शनाप बोल देते हैं जो साफ दिल के होते हैं वह बाद में उस बात पर पछतावा करते हैं सोचते हैं कि मैंने ऐसा क्यों कहा दोस्तों कुछ भी कहिए कुछ भी करिए कितना भी आपको क्रोध है लेकिन कुछ समय तक यदि आप शांत रहे लेते हैं तो आप अपना जीवन सफल बना लेते हैं और दूसरों को कष्ट देने से बच जाते हैं दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहा हूं जिस को जानकर आप समझ पाएंगे कि बोले हुए शब्द कभी वापस नहीं आते.Short Stories

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दोस्तों किसी गांव में एक किसान रहता था वह किसान 1 दिन किसी बात पर वह किसान काफी परेशान होता है कभी क्रोधित होता है उसको काफी गुस्सा आता है तो उसका पड़ोसी उसके पास में आता है किसी काम के लिए लेकिन वह किसान अपने पड़ोसी को अनाप-शनाप बक देता है तब बाद में उस किसान को पछतावा होता है वह सोचता है कि मैंने ऐसा क्यों कहा क्यों मैंने अपना गुस्सा अपने पड़ोसी पर निकाला  Short Stories In Hindi

तब वह जंगल में एक संत के पास जाता है और संत से कहता है कि मैंने अपने पड़ोसी को गलत सलत कहा उस पर अपना क्रोध निकाला मैं ऐसा क्या करूं कि मेरे बोले हुए शब्द वापस आ जाएं तब वह संत उस किसान को कहते हैं कि तुम काफी सारे पंख जमा करो और शहर के बीच चौराहे पर जाकर उनको रख दो किसान ऐसा ही करता है वह काफी सारे पंख इकट्ठा करता है और शहर के बीच चौराहे पर उनको रख कर आ जाता है अब जब वह संत के पास वापस आता है तो संत से कहता है कि जैसा आपने कहा है मैंने वैसा ही किया है short hindi stories with moral values

अब संत किसान को बोलते हैं कि अब तुम एक काम करो उन सभी पंखों को वापस ले आओ और किसान वापस उन पंखों को लेने शहर में जाता है पर तब तक हवाओं के झोंके के साथ में सारे पंख इधर से उधर बिखर जाते हैं और किसान खाली हाथ ही संत के पास वापस आ जाता है और संत को कहता है कि वहां मुझे कोई पंख नहीं मिला सब उड़ गए सब इधर से उधर बिखर गए तब संत बोलते हैं जैसे वह पंख बिखर गए उसी प्रकार जो शब्द तुमने बोले वह भी बिखर चुके हैं वह कभी वापस नहीं आएंगे इसीलिए कभी भी कुछ भी बोलो तो सोच कर ही बोलो  Short Stories

यह कहानी हमें शिक्षा देती है कि हमें क्रोध वश में आकर किसी पर कुछ भी नहीं बोलना चाहिए क्योंकि बोले हुए शब्द कभी वापस नहीं आते इसीलिए हमेशा सोच समझ कर ही बोलना चाहिए आप कभी किसी को क्रोधवश किसी को कुछ गलत बोल देते हो तो उसे क्षमा मांग लेते हो लेकिन मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि उसे कोई ना कोई बात दुखी कर जाती है कष्ट पहुंचा जाती है इसीलिए सदैव हंसमुख रहिए और क्रोध हेतु प्रयास कीजिए कि कुछ समय शांत रहिए इसी प्रकार धीरे धीरे प्रयास करते करते आपका क्रोध शांत होने लग जाएगा और आप किसी को गलत बोलने से बच जाएंगे तो दोस्तों यह कहानी कैसी लगी आपको यह हमें कमेंट के माध्यम से बताइए और इस कहानी को लाइक कीजिए सोशल मीडिया पर शेयर कीजिए ताकि अधिक से अधिक व्यक्ति यह कहानी पढ़ सकें जान सके और क्रोध से बच सकें  Short Stories

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एक वृक्ष पर कौआ रहता था। उसी की संगती sangati में एक हंस भी रहता था। काफी समय से दोनों यहीँ पर रह रहे थे। समय बीतता गया और दोनों में दोस्ती हो गई। लेकिन कौवे और हंस के रंग, रूप, स्वभाव, गुण, दोष मैं काफी अन्तर होते हुए भी हंस ने मित्रता जारी रखी।
एक दिन शिकारी जंगल में शिकार करने आया। शिकार करने के बाद, कुछ देर आराम करने का विचार करते हुए वह उस वृक्ष के निचे जा पहुँचा जहाँ हंस और कौआ रहते थे। शिकारी पेड़ के निचे लेट गया। शिकारी काफी थका हुआ था, इसलिए नींद आ गई।
हंस और कौवा यह सब देख रहे थे। थोडी देर मैं शिकारी पर धुप पड़ने लगी’ जब हंस ने देखा की शिकारी के पर सूरज की किरणे पड़ रही हैं, तो डालियों पर जन्हा से धुंप आ रखी थी अपने पंख फेलाकर बेठ गया जिसके कारण किरणे निचे नहीं पहुँचती थीं।
इतने में कोए को शैतानी सूझी क्योंकि यह उसका स्वभाव था। उसने उस शिकारी के मुँह पर मल मूत्र त्याग दिया और पेड़ से उड़ गया।
शिकारी को बहुत बुरा लगा। उसने अपने चारों तरफ देखा! उसे केवल हंस दिखाई दिया। शिकारी ने सोचा कि यह सब इसी हंस ने किया है।
शिकारी ने पास पड़ी बन्दूक उठाई और हंस पर निशाना लगाया और धाएं से गोली चलादी जो सीधी हंस को लगी। हंस नीचे गिर पड़ा। हंस ने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था। यदि वह दुष्ट कौवे की sangati में ना रहता तो हंस बे मौत न माराजाता।

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शिक्षा :- किसी ने ठीक ही कहा है की बुरी sangati संगती अच्छी नही होती काहावत है की शराब बेचने वाले की लड़की यदि दूध लेकर जाती हो तो लोग यह सोचेंगे की यह शराब ले जा रही है, इसी प्रकार दुष्ट और शैतान लोग शरारत करके मोके से भाग जाते हैं, और बदले में शरीफ पकड़े जाते हैं, अत: दुष्ट का साथ कुछ देर के लिए भी नही करना चाहिए,
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hindi kahani short with moral इश्वर सर्वव्यापक है

hindi kahani तो आपने काफी पढ़ी होंगी लेकिन एसी motivational hindi kahani आपने नही पढ़ी होगी इस hindi kahani को पढ़ आपको कुछ नया सिखने को मिलेगा, तो चलिए इस short hindi kahani को पूरा पढ़ते हें।
 
 
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एक गुरु के पास दो मनुष्य शिष्य होने के लिए आए। 
 
गुरुजी ने कहा-” हम तुम दोनों को एक…एक खिलौना देते हैँ, तुम ये खिलौना लेकर ऐसी जगह पर जाकर जहाँ कोई न हो, तोड लाओ; तब हम तुमको अपना चेला बना लेंगे। ” दोनों अपना-अपना खिलौना लेकर चले।
 
एक चेले ने तो गुरुजी के मकान के पीछे जाकर चारों तरफ देखा कि’ अब कोई नहीं है और खिलौना तोड़ लाकर रख दिया 
 
और दुसरे ने खिलोने को लेकर सारा संसार, ऊँची से ऊँची पाहाड की चोटियाँ, गहरी से गहरी समुद्र की सतहँ, एकान्त से एकान्त अंधेरी कोठरियाँ तथा बड़े बड़े भयानक वन खोज डाले,
 
परन्तु उसे कंही ऐसा स्थान न मिला, जहाँ खिलौना तोड़ता, अत: दूसरे ने खिलौना वैसा ही लाकर रख दिया।
 
गुरु ने पहले से प्रश्न किया…” क्योजी, आपको कहॉ ऐसा स्थान मिला, जहाँ से खिलौना तोड़ लाए? ” उसने कहा गुरुजी. मैं आपके मकान के पीछे गया। वहाँ कोई न था। बस, वन्ही खिलौना तोड़ आपके आगे लाकर रख दिया।
 
दूसरे से कहा…”क्यों भाई तुम्हें कोई ऐसा स्थान नहीं मिला, जहाँ से खिलौना तोड़ लाते? तुमने लाकर वैसा ही रख दिया? ” 
 
दूसरे ने उत्तर दिया ” महाराज मैंने ऊँचे से ऊँचे पहाडों की चोटी, गहरे से गहरे समुन्द्र की सतह, अंधेरी से अँधेरी एकान्त कोठरियाँ और बड़े-बड़े भयानक जंगल में घुमा परन्तु मुझे कहीं ऐसा स्थान न मिला’ जहाँ वो ना था अर्थात् परमेश्वर न था।
 
महाराज, इसलिए नहीं तोडा।” महात्मा ने इसे ही अपना चेला बनाया और दूसरे से कहा…तुम इस योग्य नही की मेरे शिष्य बन सको
 
शिक्षा : परमेश्वर सर्वव्यापक है, अत: एकान्त समझ कर भी पाप ना करें , हमेसा पाप करने से बचें।
 
दोस्तों आपने ये motivational hindi kahani पूरी पढ़ी इसके लिए आपका धन्यवाद उमीद करता हु ये hindi kahani आपको पसंद आई होगी।
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shekh chilli ki kahani in hindi stories

shekh chilli  शेखचिल्ली की कल्पना

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shekh chilli ki kahani

हिंदी कहानियों में shekh chilli की मुर्खता का कोई मुकाबला नही और ये काहानियाँ हमे हंसा हंसा कर लोट पोट कर देती हैं इसलिय दोस्तों shekh chilli की काहनी पढ़िए और आप भी लोट पोट हो जाइए।
 
एक shekh chilli साहब एक स्टेशन पर रहा करते थे। shekh chilli हमेसा अपने ही ख्यालों की दुनिया में खोए रहते थे। एक दिन एक मियाँजी रेल से भारी घडा लेकर उतरे और किसी सामान ढोने वाले को खोजने लगे तभी उनकी नजर एक व्येक्ती पर पड़ी उन्होंने उस आदमी यानी की शेखचिल्ली से कहा…”
 
अबे इस घडे को शहर ले चलेगा?” shekh chilli ने कहा-“हॉ हुजूरा ” 
 
मियाँ ने कहा…”दो पैसे मिलेंगे। shekh chilli ने कहा…”दो ही देना। “और मियां ने शेखचिल्ली के सिऱ पर घड़ा रखवादिया और आगे-आगे स्वयं और पीछे-पोछे शेखचिल्ली चलने लगा।
 
अब शेखचिल्ली की मनसूबेबाजी देखिए। शेखचिल्ली अपनी ही कल्पनाओं के संसार में खोजाता है और सोचने लगता है
 
“इस घड़े को शहर में पोहचाने पर मुझे दो पैसे मिलेंगे। और में उन दो पैसों की एक मुर्गी लूँगा। और जब मुर्गी के अन्डे से बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर बकरी लूँगा। जब बकरी के बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर गौमाता लूँगा जब गऊ के बछड़े. होंगे, तो उन्हें बेचकर एक भैंस लूँगा। 
 
जब भैंस के बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर अपनी शादी करवाऊंगा। और फिर मेरे भी बच्चे होंगे, और बच्चे मुझसे कहैंगे कि बापू हमको फलाँ चीज ले दो. हम कहेंगे धत बदमाशा ” इस शब्द के जोर से कहने पर सिर से घड़ा गिर गया और गिरकर फूट गया।
 
यह देख मियाँजी बोले “अबे मुर्ख तूने यह क्या किया; मेरा ये कीमती घडा घडा क्यों फोड़ दिया ?” शेखचिल्ली ने काहा अजी मियाँ, आपको तो घडे की पडी है, यहॉ तो मेरा बसा बसाया घर ही उजड़ गया।”
 
शिक्षा – व्यर्थ की कल्पनाओं से बचो। कल्पनाएँ मनुष्य को मानसिक रोगी बनाती हैं।

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hindi kahani तो आपने काफी पढ़ी होंगी और हर बार कुछ नया सिखने को मिला होगा इस हिंदी कहानी को भी मैने इसी उदेश्य से डाला है की आपके जीवन में कुछ परिवर्तन आए 
 
एक गांव में दो रईस रहा करते थे। उनमें से एक तो बड़े मालदार-यहाँ तक कि दस-बीस गाँव और करोडों के मालिक थे और दूसरे साहाब के पास किसी गाव में सिर्फ कुछ हिस्सा था।
 
वहि मालदार साहब को सदैव यह चेष्ठा रहती की लोग पहिले हमसे दुआ, बंदी, सलाम करें। इसलिए आप गाल फुलाए जैसे रहते थे। 
 
कभी अपने आप किसी दूसरे से हाथ जोड़ प्रणाम नहीं किया करते थे और न बैठने-उठने में ही ‘ आइय , ‘पधारिए’ कहते थे बल्कि जहाँ बैठे होते थे वहीं कुर्सी या आराम-कुर्सी पर बैठे रहते थे। आस पास चारपाइयाँ पडी रहती थी , 
 
उन पर आने वाले की तबीयत चाहै तो बैठ जाये और तबीयत चाहे चला जाये! इतना ही नहीं; वरन दो-चार आदमियों के बैठे रहने पर भी घर से मिठाई मंगवाई या कोई और वस्तु आई, तो और किसी से पूछना-पाछना नहीं । 
 
आप ही खाने लगते थे यही दशा आप की पान-पत्ते और इलायची में रहती थी। पास के बैठने वाले मुंह ताका करते थे और आप पान, इलायची मुंह में भरे बड़े शोक से बातचीत किया करते। यही दशा इनको अपनी रियासत से बाहर जाने पर भी साथ के आदमियों से या अन्यो से भी रहा करती थी।
 
दूसरे साहब जो इनके सामने कुछ भी नहीँ थे, और केवल एक गांव के कुछ हिस्सेदार ही थे, उनकी यह दशा थी कि सबसे प्रथम अभिवादन करते। 
 
”अपनी शक्ति भर कभी दूसरे को यह मौका न देते थे कि वह प्रथम अभिवादन करे। यों धोखे से चाहे कोई प्रथम भले ही कर ले। दूसरे को देखते ही उठ पड़ते थे और अपने से उच्च आसन दिया करते थे। पर फिर भी लोग जो जैसा होता था वैसा ही बैठा करते थे। 
 
इसके अतिरिक्त कभी किसी वस्तु की एकाएकी मांगने की चेष्टा नहीं करते थे, किन्तु यह औरों को खिला-पिला देते थे और आप वैसे ही रह जाते थे।
 
दूसरे के दुख पर जहॉ वह किसी के दरवाजे नहीं जानते थे, वहीं से बिना बुलाए ही दुखी के दरवाजे प्रत्येक दुखी – सुखी के दुख सुख में शामिल हुआ करते थे  परिणाम यह निकला कि उन बडे मालदार की की माँ मर गई, और उनके यहाँ एक आदमी भी न पहुँचा, विशेषकर उनकी प्रजा भी न गई। केवल नौकर और आप थे 
 
और इस एक ग्राम के हिस्सेवाले की स्त्री के मरने के समय पाँच सौ आदमी साथ थे केवल एक काम यही नहीं, बल्कि उस एक ग्राम के हिस्सेवाले के यहाँ यदि कुछ भी काम होता था, तो सैकडों आदमी जमा हो जाते थे 
 
और दूसरी तरफ उस बड़े रहिस के यंहा कोई झाँकने भी ना जाता था। 
 
और एक ग्राम के हिस्सेदार की लोग सर्वथा हर प्रकार से इज्जत किया करते थे और इनको देखकर उठते भी न थे। निदान इन्होंने अपनी यह बेइज्जती देख सैंकडों पर झूठे मुकदमे, तहसील-वसूली में सख्ती आदि हर प्रकार के प्रपंच रचे, परन्तु लोगों ने इनकी इज्जत न की।
 
शिक्षा – अगर तुम अपनी इज्जत कराना चाहते हो, तो पहले दूसरों की इज्जत करना शुरू करो, क्योंकि दुनिया आइना के समान है। यथा, आइने के सामने जैसी शकल होगी उसमें वैसी ही शकल दिखेगी इसी तरहां दुनिया के साथ जैसा बर्ताव आप करेंगे दुनिया भी आपके साथ वैसा ही बर्ताव करेगी।  
 
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