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How To Increase Height Hindi Me किसी भी उम्र में तेजी से लम्बाई बढाने के उपाए

How  To Increase Height Before 18

How To Increase Height दोस्तों हमारा शरीर बड़ा ही कमाल का है आप अपने शरीर को जैसा भी बनाना चाहते हैं वह वैसा ही बन जाता है और आप अपने शारीर पर ऐसे ऐसे बदलाव ला सकते हो कि आप सोच भी नहीं सकते ईश्वर ने हमारे शरीर में कितनी अनोखी ऊर्जा दी हैं कि आप उससे अपने शरीर में पूरी तरीके से परिवर्तन ला सकते हो. how to increase height in hindi 

ऐसे तो न जाने कितने काम है जो आप अपने शरीर के साथ कर सकते हो लेकिन अगर आपकी हाइट अच्छी है तो आप हर काम और भी बेहतरीन तरीके से कर सकते हो और आपनी जो पर्सनैलिटी है उस को सुधार सकते हो. how to increase height in hindi 

यदि आपकी हाईट अच्छी है तो आप अलग ही दिखाई दोगे दुनिया में यदि आपकी हाइट अच्छी है तो आपकी पर्सनैलिटी में काफी ज्यादा चार चांद लगा सकती है और आपको काफी अच्छा दिखा सकती है दुनिया के आगे.

काफी लोग यह सोचते हैं कि यदि आप की उम्र 20 से ऊपर चली जाती है तो आपकी हाइट नहीं बढ़ सकती यह लोगों में भ्रांतियां हैं आपकी जो हाइट बढ़ने की ग्रोथ है वह काफी धीमी हो जाती है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि आपकी हाइट नहीं बढ़ सकती

How to increase height in 1 week

हाइट का बढ़ना ना बढ़ना आपके जींस पर निर्भर करता है आपकी हाइट बढ़ेगी या नहीं यह आपके जींस पर निर्भर करेगा क्योंकि जो हमारा परिवार है जिनसे हमारे खून से संबंध है उनके ऊपर हमारी हट जाती है यदि आपके घर में आपके माता पिता की हाइट कम हो तो हो सकता है आपकी हाइट कम हो या फिर हो सकता आपके नाना नानी दादा दादी की हाइट कम हो तो आपकी भी हाईट कम हो

पर एक बात जो आप को सुकून देगी वह यह है कि आपकी हाइट बढ़ सकते हो चाहे आपके परिवार में हाइट कम ही क्यों न हो किसी की यदि आप अपनी हाइट ओर बढ़ाना चाहते हैं ताकि आप अच्छे दिखे और आपकी पर्सनैलिटी काफी अच्छी दिखे

जब भी आप किसी को देखते हो उनके लम्बाई अच्छी होती है तो आप का भी मन करता है कि आप इतनी सुंदर इतनी अच्छे देखो तो आपकी इच्छा होती है काश हमारी भी लम्बाई अच्छी हो यह बात तो आप भी स्वीकार जरूर करोगे

How to increase height before 18

यदि आपकी हाइट अच्छी है तो आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा आपका आत्मविश्वास बढेगा तो आप जो चाहे वह कर पाएंगे क्योंकि अभी आपका आत्मविश्वास अच्छा होगा तो आप वह सब भी कर सकते हो जो आप करना चाहते हैं इसलिए आपकी इच्छा है कि आप अपनी हाइट बढ़ाए आपकी इच्छा है कि आप भी अपनी पर्सनैलिटी को सुधारें तो आपको अपनी हाइट जरूर बढ़ानी चाहिए

यदि आप चाहते हो सच में चाहते हो कि आपकी हाइट बढे तो आपको अपने जीवन में काफी बदलाव लाना होगा आपको अपने खाने-पीने में उठने बैठने में सोने जागने में बदलाव लाना होगा तभी आप अपनी हाइट बढ़ा सकते हो how to increase height 

ध्यान रहे जब भी आप सोए तो बिलकुल सीधे होकर सोए आपकी जो रीड की हड्डी है बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए तकिये का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें सोते हुए नरम गद्दे पर कभी भी ना सोए  हमेशा ध्यान रखे रीड की हडडी सीधी रहे कभी भी नरम चीज का सोने में इस्तेमाल ना करें जिससे कि आपकी जो रीड की हड्डी है वो मुड़े नहीं

और जब भी खाना खाए जमीन पर बैठकर खाना खाएं  और बिल्कुल सीधे बैठ कर खाना खाए ताकी रीड की हड्डी सीधी रहे how to increase height 

यदि आप बैठने का कोई काम करते हो तो आपको एक बात जरुर ध्यान में रखनी चाहिए आप जब भी बैठे कोई काम करें तो कमर गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें अगर कोई काम ना करें यदि आप कमर गर्दन को सीधा रखते हैं तो आपको इसके 2 फायदे होंगे एक तो आपको काम करते समय नींद नहीं आएगी आलस नहीं आएगा दूसरा आपकी हाइट बढ़ने में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी

और हजारों सालों से हमारी आयुर्वेद की किताबों में यह बात कही गई है कि हमेशा सीधे होकर बैठीये जब भी ध्यान किया जाता है उसमे बिल्कुल सीधे होकर ही बैठा जाता है कमर गर्दन सीधी रखने का अपना ही अलग महत्व है जो आज के लोग नहीं जानते इसीलिए उनको अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है

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How To Increase Height Hindi Me

आपने एक्यूप्रेशर के बारे में तो सुना ही होगा एक्यूप्रेशर अपने देश भारत वर्ष की एक सबसे पुरातन स्वास्थ्य पद्धति है इसके द्वारा हमारे शरीर के अलग अलग पॉइंट पर अलग अलग केंद्रों पर दबाव बनाकर ऊर्जा को फैलाया जाता है जिससे कि रिजल्ट काफी जल्दी मिलते हैं और हर व्यक्ति काफी जल्दी ठीक होता है यदि आपकी हाइट कम है आप और हाइट बढ़ाना चाहते हैं यह आपकी एक थोड़ी ज्यादा है और आप अपनी हाइट बढ़ाना चाहते हैं तो आप एक्यूप्रेशर का सहारा ले सकते हैं एक्यूप्रेशर जब भी करें तो खाली पेट ही करें जिससे कि आपको इससे काफी ज्यादा फायदा मिलेगा how to increase height 

आपको बस इतना करना है जो अपना यह लेफ्ट हैंड है इसका जो अंगूठा है इसके ऊपर प्रेशर देना है और एक बार प्रेसर देकर छोड़ देना फिर दोबारा परेशर देना फिर छोड़ देना है इस तरीके से यदि आप परेशर देते रहेंगे तो आपको काफी ज्यादा फायदा मिलेगा यह काम आप अपने पैर के अंगूठे के साथ भी कर सकते हैं वहां पर भी इसी प्रकार प्रेशर दे छोड़ दे छोड़ दे आपको लगातार दो महीने तक करना है आप काफी अच्छे रिजल्ट मिलेंगे  और कुछ मुख्य बातों का आपको ध्यान रखना है हमेशा अच्छी चीज लेनी है increase height

जैसे कच्चे चने खाने हैं आपको देसी गाय का दूध मिल जाता है तो सबसे अच्छा है

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एक्यूप्रेशर का इतिहास

acupressure एक्युप्रेशर- प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति

पुरातन काल से लेकर आधुनिक समय तक शरीर के अनेक रोगों तथा विकारों को दूर करने के लिए जितनी चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हुई है उनमें एक्युप्रेशर सबसे पुरानी तथा सबसे अधिक प्रभावशाली पद्धति है  इतना अवश्य है किं प्राचीन समय में इसका कोई एक नाम नही रहा। विभिन्न देशों में विभिन्न समय में इस पद्धति को नए नाम दिए गए

यह पद्धति इसलिए भी अधिक प्रभावी है क्योंकि इसका सिधांत पूर्ण रूप से प्राकूक्ति है इस पद्द्द्ती की एक अन्य खूबी यह है कि प्रेशर द्वारा इलाज बिलकुल सुरक्षित (safe) होता हे । तथा इसमें किसी प्रकार का कोई नुकसान (side effect ) नही होता हे । एक्युप्रेशर पद्धति के अनुसार समस्त रोगों को दूर करने की शक्ति शरीर में हमेशा मोजूद रहती है पर इस कुदरती शक्ति को रोग निवारण के लिए सक्रिय करने की आवश्कता होती हे ।
एक्युप्रेशर पद्धति कितनी पुरानी है तथा इसका किस देश में आविष्कार हुआ, इस बारे
में अलग अलग मत है । ऐसा विचार है कि एक्युप्रेशर जिसकी कार्यविधि एवं प्रभाव एक्यूपंचर तुल्ये हे एक्यूप्रेशर का आविष्कार लगभग 6 हजार पूवं भारतवर्ष में ही हुआ था आयुर्वेद की पुरातन पुस्तकों में देश की प्रचलित एक्यूपंचर पद्धति का वर्णन है । प्राचीन काल में चीन से जो यात्री भारतवर्ष आए, उन द्वारा इस पद्धति का ज्ञान चीन में पहुंचा जहाँ यह पद्धति काफी प्रचलित हुई । चीन के चिकित्सकों ने इस पद्धति के आश्चर्यजनक प्रभाव को देखते हुए इसे व्यापक तोर पर अपनाया और इसको अधिक लोकप्रिय तथा समृद्ध बनाने के लिए काफी प्रयास किया । यही कारण हे की आज ये सारे संसार में चीनी चिकित्सा पद्धति के नाम से मशहुर हे
डाक्टर आशिमा चेटर्जी, भूतपूर्व एम० पी०, ने 2 जुलाई, 1982 को राज्य सभा में यह रह्स्योद्घाटन करते हुए कहा था कि एक्युपंचर का आविष्कार चीन में नहीं अपितु भारतवर्ष
में हुआ था । इसी प्रकार 10 अगस्त, 1984 को चीन से एक्यूपंचर सम्बन्धी हुईं एक राष्टीय
गोष्टी से बोलते हुए भारतीय एक्युपंचर संस्था के संचालक डा० पी० झे० सिंह ने तथ्यों सहित
यह प्रमाणित करने की कोशिश की थी कि एक्यूपंचर का आविष्कार भारतवर्ष में हुआ था
समय के साथ जहाँ इस पद्धति का चीन में काफी प्रचार बढा, भारतवर्ष में यह पद्धति लगभग अलोप ही हो गयी । इसके कई प्रमुख कारण थे । विदेशी आक्रमण के कारण जहाँ भारतवासियों: सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक जीवन में काफी परिवर्तन आया वहाँ सरकारी मान्यता के अभाव के कारण एक्युप्रेशर सहित कई अन्य प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्तियाँ प्रफुलित नहीं हो सकी ।
एक्युप्रेशर पद्धति जिसका आधार प्रेशर या गहरी मालिश है, के सम्बन्ध में प्राचीन भारतीय चिकित्सकों जिनमें चरक का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है तथा यूनान, मिस, तुर्की तथा रोम के कई प्राचीन चिकित्सकों ने भी अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों को दूर करने, संचार को ठीक करने, मांसपेशियों को सशक्त बनाने तथा सम्पूर्ण शरीर विशेषकर मस्तिष्क तथा चित को शांत रखने के लिए गहरी मालिश अर्थात् एक्युप्रेशर की सिफारिश की थी । दबाव के साथ मालिश करने से रवत्त का संचार ठीक हो जाता है ।

acupressure ( एक्यूप्रेशर देने का सही ढंग )

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अधिक एक्यूप्रेशर दबाब देने के लिए एक अंगूठे पर दूसरा अंगूठा रख के प्रेशर देना चाहिए
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कुछ केन्द्रों, विशेषकर पीठ पर दोनों अंगूठों के साथ Acupressure प्रेशर दें जेसे आकृति 6 में दिखाया गया हे, कुछ केन्द्रों जेसे पेट पर हाथ की 3 अँगुलियों के साथ प्रेशर दें जेसे आकृति 7 में दिखाया गया हे
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आकृति 8

पैरों तथा हाथों में सारे प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर बिना किसी व्यक्ति की सहयता के आसानी से प्रेशर दिया जा सकता है । प्रेशर कुर्सी, चारपाई, या भूमि पर बैठकर जैसा भी सुविधाजनक प्रतीत हो, दे सकते हैं । पैरों में विभिन्न प्रतिबिम्ब केद्रों पर प्रेशर देने का एक आसान ढंग उपरोक्त आकृति में दर्शाया गया है
जीवन शक्ति
मनुष्य का शरीर एक अदभुत मशीन ही नही एक अनुपम शक्ति का विशाल भंडार हे । यहacupressure benefits in hindi शक्ति प्रतिदिन, प्रतिक्षण उपयोग होती है, नष्ट होती है और शरीर से बाहर भी निकलती हे । इस लीकेज के कारण मनुष्य बीमार भी जल्दीपड़ता है तथा बुढापा भी जल्दी आता है इस लीकेज को रोकने का शरीर में एक ही केंद्र है – दांयी बाजू पर कलाई एंव कुहनी के मध्ये भाग में(आकृति 9 ) लगभग एक इंच का क्षेत्र । इस केंद्र पर प्रतिदिन सवेरे एक मिनट तक अँगूठे से प्रेशर देने से अपनी जीवन शक्ति को काफी लम्बे समय तक बचाकर रख सको है
प्रेशर देने का ढंग
प्रेशर देने का ढंग सबसे अधिक महत्व रखता है क्योंकि गलत ढंग से प्रेशर देने से वाँछित आराम नहीं होता । चीनी (Physicians) चिकित्सकों ने प्रेशर देने का उत्तम ढंग हाथ के अँगूठे, हाथ की तीसरी अंगुली, एक अंगुली पर दूसरी अंगुली रखकर, हाथ की मध्य की तीन अँगुलियों के साथ तथा हथेली के साथ बताया है जैसाकि आकृति नं० 1, 2, 3, 5, 6 तथा 7 में दर्शाया गया है । अंगूठा या अंगुली बिल्कुल सीधी खड़ी करके प्रेशर नहीं देना चाहिए (जेसे आकृति 4) क्योंकि इससे दबाव ठीक नहीं पढ़ता तथा प्रेशर देने वाली अँगुली मी शीघ्र थक जाती है। प्रेशर देने के प्रति महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अँगूठा या अँगुली एक ही स्थान पर टिकाकर अगर दबाव घड़ी की सूई की तरह गोल परिधि (circular motion in clockwise direction) में बाएँ से दाई तरफ दिया जाये तो उसका अधिक असर होता है I वेसे साधारण विधि से भी अँगूठे या उपकरण से प्रेशर दिया जा सकता हे। दोनों तरीके ठीक है । पेरों तथा हाथों के ऊपरी भाग, पेरों तथा हाथों की अँगुलियों, टाँगों के निचले भाग, टखनों तथा एडीयों के साथ-साथ, कानों तथा बाजुओं के अग्रिम भाग पर तेल आदि लगाकर मालिश की भांति भी (pressure) प्रेशर दिया जा सकता है। पीठ पर उपकरणों से नहीं अपितु अंगूठों या हथेलियों से हीं प्रेशर देना चाहिए।
प्रेशर देते समय इतना ध्यान रखे कि उसका प्रभाव चमडी की ऊपरी सतह से नोचे तक पहुच जाये। इस बारे में एक तर्कसंगत कथन है कि जब शरीर के अंदर कोई विकार आता है तो उसका प्रभाव चमडी की ऊपरी सतह तक अनुभव होता हे I ठीक इसी प्रकार चमडी पर दिए प्रेशर का प्रभाव आंतरिक अंगो तक पहुँचता हे जो रोग दूर करने में सहायक होता हे ।