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पहला शहीद मंगल पांडे_ (Mangal Pandey)

बैरकपुर में एक Soldier (सिपाही) था जिसका नाम था Mangal Pandey (मंगल पांडे), यह News (खबर) फेल चुकी थी की अंग्रेज अधिकारी सेना को भंग करना चाहते हें, इसलिए प्रशन ये था की सिपाही तितर- बितर हो जाएँ या फोरन विद्रोह करदिया जाये, विद्रोह की तारीख दूर थी इसलिए ठहरना सम्भव नही था, क्योंकि तबतक ठहरने का मतलब होता नए कारतूसों का इस्तेमाल करने के लिए राजी होजाना, 

इस प्रकार धर्म तो पहले ही नष्ट हो चूका होता, Brave Soldier जोशीले होने के कारण मंगल पांडे पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा, उन्होंने ये तय करलिया की 31 मई तक ठहरा नही जा सकता, 

मंगल पांडे ने घूम घूम कर लोगों को समजाया पर लोगों ने उसे धेर्य रखने को कहा, शायद इन लोगो ने ठीक ही कहा था की एक जन्घा विद्रोह हो गया तो उसे दबा दिया जायेगा, इसलिए हमें निश्चित तारीख पर विद्रोह करना चाहिए, 

पर मंगल पांडे नही माने, उन्होंने बंदूक निकली और गोली भरली और वो परेड के मेदान में पहोंच गये और चारों तरफ शेर की तरहां उछल उछल कर कहने लगे- भाइयों उठो आप पीछे क्यूँ रहते हो?, आओ और उठो में आपको धर्म की सोगन्ध दिलाता हूँ, आजादी पुकार रही हे की हम फोरन अपने धोकेबाज शत्रुओं पर हमला बोल दें रुकने का समय नही हे, 

इस प्रकार से मंगल पांडे ने ब्रिटिश सम्राज्य के खिलाफ विद्रोह की घोषणा करदी, और वेह प्रथम विद्रोह हुआ ( 29 मार्च 1857 का दिन था)

वेह परेड के मेदान में लोगों को चिल्ला चिल्ला कर पुकारता रहा, पर सिपाहियों ने उनका साथ नही दिया, वे उन्हें देखते रहे पर कोई कुछ नही बोला, मंगल पांडे की खबर अंग्रेज अधिकारी तक पहोंची और सार्जेंट मेजर हुसन ने आकर मंगल पांडे को देखा, उसने खड़े तमाशा देखने वाले सिपाहियों से कहा मंगल पांडे को गिरफ्तार करलो, 

पर सिपाही एक बार मंगल पांडे की तरफ देखते फिर अंग्रेज अफसर की तरफ देखते, उन्होंने अंग्रेज अफसर की बात मानने से न तो इंकार किया और ना ही माना, इस प्रकार जब काफी समय हो गया तो वो अंग्रेज अफसर समझ गया की वे उसकी बात मानने के लिए तयार नही हें, उधर मंगल पांडे बिलकुल तयार थे उनके हाथ में गोली भरी हुई बंदूक थी, वो रक्त देने और रक्त लेने के लिए तडप रहे थे, मंगल पांडे ने बंदूक सम्भाली और … ठायं ठायं …….

मेजर हुसन की लाश वन्ही गिर पड़ी, जब ये कांड हो गया तो थोड़ी देर बाद एक अंग्रेज अफसर घटनास्थल पर आया, इस अफसर का नाम था लेफ्टिनेंट बाग़, अबकी बार जो ये अफसर आया था ये पैदल नही था, बल्कि घोड़े पर था अब मंगल पांडे ने गोली चलादी और अफसर और घोडा दोनों जमीन पर लुडकते नजर आये, लेकिन अंग्रेज बच गया और उसने अपनी बंदूक निकाली और मंगल पांडे की तरफ चलादी लेकिन मंगल पांडे बच गये, उन्होंने तलवार निकाल ली और साथ ही उस अफसर ने भी, मंगल ने एक झटके में ही उस अंग्रेज अफसर का खेल तमाम कर दिया,

मंगल पांडे ने 2 अंग्रेज अफसरों का काम तमाम कर दिया था, थोड़ी ही देर में एक गोरा और आया, वेह अभी मंगल पांडे पर टूट नही पाया था की एक दुसरे भारतीय सिपाही ने उस गोर के सिर पर अपनी बंदूक का कुंदा दे मारा, और वो वन्ही ढेर हो गया, और इस तरहां विद्रोह फेल गया और चरों तरफ से ये ही आवाज गूंजी मंगल को हाथ मत लगाना, 

थोड़ी देर में एक और अंग्रेज अफसर वंहा आया और हुकुम दिया सिपाहियों देखते क्या हो इस बागी को पकड़लो बड़े अफसर को देख कर कुछ देर के लिए भारतीय सिपाहियों की फोज कुछ देर के लिए चुप खड़ी रही, पर किसी ने आवाज उठाई हम भरामण देवता का बाल भी बाका न होने देंगें, जब अफसर ने ये देखा तो वो वापस लोट गया इस बिच मंगल पांडे अपने साथियों से यह कह रहे थे की भाइयों अब घडा भर चूका हे, अब आप लोग विद्रोह का झंडा उठाइए पर सिपाही कुछ नही बोले,

इतनी देर में वो अंग्रेज अफसर दुसरे अंग्रेज सिपाहियों को लेकर वंहा आया, और मंगल पांडे समझ गये की अब में गिरफ्तार हो जाऊंगा क्योंकि भारतीय सिपाही पूरी तरहां से मेरा साथ नही दे रहे हें और उन्होंने अपने सिने में गोली मारली, पर उनकी जान नही गयी उन्हें बचा लिया गया,

मंगल पांडे पर मुकदमा चला और उन्हें फांसी की सजा मिली, पर कोई भी जल्लाद फांसी देने को तयार नही हुआ, सभी जल्लादों ने मना कर दिया, फिर कलकत्ता से जल्लाद को बुलाया गया और उसने मंगल पांडे को फँसे दी यदि उस जल्लाद को पता होता की वो किसे फांसी दे रहा हे तो वो भी मना करदेता ये तो निश्चित था, इसीलिए ये बात उससे छुपा कर रखी
इस प्रकार एक भारत माँ के लाल ने अपने प्राण डे दिए 


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खुश रहने के 5 तरीके

Happyness ‘खुशी उत्साह जीवन में ना हो तो हमें नकारात्मक सोच घेर लेती हे, आखिर खुश रहना इतना जरूरी क्यूँ हे, क्योंकि यदि आप दुखी हें तो नकारात्मक सोचेंगे, और ये नकारात्मकता आपके जीवन को बर्बाद करदेगी, आप हमेशा हारते ही चले जाएंगे, यदि आप खुश रहते हें तो आपका जीवन खुशियों से भर जायेगा और आप सदेव ही कामयाब होंगे, दोस्तों आज में आपको इस Article में सदेव Happy (खुश) रहने के तरीके बताऊंगा उमीद करता हूँ ये आपके लिए healpfull होंगे,



1:- Positive thinking ( सकारात्मक सोंच )

दोस्तों यदि आप सदा खुश रहना चाहते हें तो अपनी सोंच को सकारात्मक बनाएं, हमेशा अच्छा सोचें नकारात्मक कभी न सोचें, जेसे- ये हो जायेगा तो क्या होगा, वो हो गया तो क्या होगा, मेरा ये काम नही बना तो मेरा नुकसान हो जायेगा, में ये काम कर तो रहा हूँ कंही में इसमें सफल न हुआ तो, दोस्तों एसी सोच न रखें इस प्रकार की सोंच से आपको सिर्फ और सिर्फ तनाव ही हो सकता हे, इसलिए Positive (सकारात्मक) सोचें और खुश रहें,



2:- Learn from the children ( बच्चों से सीखें )

जी हाँ दोस्तों बच्चे खुश रहने के मामले में हमारे गुरु हें, ये कला हमें छोटे छोटे बच्चों से सिखने को मिलजाएगी, बच्चों को आपने देखा होगा सदेव खुश रहते हें, बड़ों की तरहां ज्यादा सोचते नही हें, हमारी तरहां उनके दीमाग में विचारों का कचरा नही भरा होता इसलिए बच्चे इतने सहज और खुश रहते हें, यदि आप दुखी हें तो बच्चों के साथ खेलें फिर देखें मन को कितनी ख़ुशी मिलती हे, और ज्यादा न सोचें फल तो आपको अपनी मेहनत के अनुसार जरुर मिलेगा चिंता करने से कुछ नही होता चिता और चिंता में सिर्फ एक बिंदी का अंतर हे इसलिए सदा खुश रहें,


3:- Learn Meditation ( ध्यान करना सीखें )
Meditation  (ध्यान) सब रोगों की एक दवा हे, यदि आप ध्यान करना सिख्लें तो आप present (वर्तमान) में रहना सिख लेंगे, और यदि आपने वर्तमान में रहना सिख लिया तो आप की ख़ुशी को कभी कोई छीन ही नही सकता, ध्यान अपने में सम्पूर्ण हें, जब आपके विचार खत्म होंगें जब आप निर्विचार होंगे तो आप उस शण ध्यान में होंगे, तब आप उस परमानन्द की महक से भर जाएंगे,






4:- See The Cows Eyes ( गौ माता की आँखों में देखें )
दोस्तों आपमें से काफी लोगों को ये अजीब लगेगा लेकिन बहूत से आदमी पहले ही ये बात जानते होंगे, आप कभी देसी गाएं को देखें गाएं की आँखों में देखें तो आपको आँखों में करुणा नजर आएगी, प्यार नजर आएगा, और आपको काफी शांति मिलेगी, जब भी आपको तनाव हो मन दुखी हो तो गाएं की आँखों में देखें , पीठ पर हाथ फेरें फिर देखें करिश्मा गो माता का आपको काफी शांति मिलेगी,

5:- सेवा भाव रखें 

दोस्तों यदि आप सदेव खुश रहना चाहते हें तो अपने मन में सेवा भाव लायें, जब आप सेवा करते हें जेसे गुरूद्वारे में जाकर, मन्दिर में जाकर, गरीबों को भोजन कपड़ा आदि जिव जन्तुओं की रक्षा आदि अपने सामर्थ्ये के अनुसार प्रत्येक व्येक्ती को सेवा करनी चाहिए, सेवा करने के बाद आपको एक असीम शांति हाशिल होती हे, आपका मन गद गद हो जाता हे दोस्तों यकीं मानिये में इसको शब्दों में नही बता सकता ये तो आपको अनुभव करके देखना होगा 

जरा इसे भी देखें- Self confidence बढ़ाने के 5 तरीके 

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Shyamji krishna varma एक क्रांतिकारी जिनकी अंतिम इच्छा 73 साल बाद मोदी जी ने पूरी की

Shyamji krishna varma (श्यामजी कृष्ण वर्मा) 1930 में इनकी मिर्त्यु हुई थी, क्रन्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा जिनकी अंतिम इच्छा को Narendra modi        (श्री नरेंद्र मोदी जी)  ने पूरा किया क्रन्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा जी इन की मिर्त्यु 1930 Switzerland (स्विटजजरलेंड) में हुई थी, और इन्होने मरते समय कहा था की “मेरी अस्थियाँ मेरे भारत देश में तब ले जाई जाएँ जब वो अंग्रेजों से आजाद हो जाये

1947 को जब हमे आजादी मिली तो भारत के पहले प्रधानमन्त्री ने इस क्रांतिकारी की इच्छा पूरी करते हुए इनकी अस्थियों को भारत लाना चाहिए था लेकिन एसा नही हुआ क्रन्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा जी की अस्थियाँ भारत आजाद होने के बाद भी 73 सालों तक इंतजार करती रही अपनी मुक्ति का की कोई आजाद भारत माँ का लाल आएगा और मुझे यंहा से लेजायेगा,

और फिर वो दिन भी आया जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और काफी लम्बी कोशिश के बाद 22 अगस्त 2003 में स्विटजरलैंड गये और वंहा से इस भारत माँ के बेटे “क्रन्तिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा जी ” की अस्थियों को भारत लाये लेकिन किसी मिडिया ने नही दिखाया क्योंकि इनकी मानसिकता ही देश विरोधी हे और आज कल इन भांड किस्म के नेताओं को मोदी जी को कोसने से ही फुर्सत नही दोस्तों आने वाले समय में मोदी जी को ही चुने क्योंकि ये ही अपनी भारत भूमि के लिए ठीक होगा यदि किसी को कोई शंका हो इस खबर से तो इस लिंक पर जाकर देख सकता हे  Shyamji krishna varma
सुचना:- जो गद्दार हें वो दूर ही रहें 

Chandra shekhar azad- 27 फरवरी 1931 , बलिदान दिवस

27 फरवरी 1931, Bharat (भारत माँ) के वीर पुत्र चन्द्रशेखर आजाद जी (chandra shekhar azad) का आज बलिदान दिवस हे, और कमाल की बात ये हे की आज शिव रात्रि भी हे  में नमन करता हूँ भारत माता के इस वीर पुत्र को जिससे ब्रिटिश हुकुमत डरी रहती थी, दोस्तों आज में आपको आजाद जी के जीवन की अंतिम समय के जीवन की एक प्रेणादायक घटना बतारहा हूँ, जिससे पता चलता हे की आजाद जी ने अपने वचन की पूर्ति किस प्रकार की,

क्रांतिकरियों के नायक ‘चन्द्रशेखर आजाद’ जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के अभेद दमन चकर को नेस्तोनाबूद कर, भारत को आजादी का मुकुट पहनने में सहयोग किया, आजाद जी ने प्रण लिया था की- ‘ में आजाद हूँ ‘, आजाद रहूँगा, मेरे जिन्दा रहते कोई भी मुझे गिरफ्तार करना तो दूर छु भी नही सकता,

आजाद जी का आखरी सफर 

आजाद जी के पीछे कुछ गद्दार लोगों की टोली पड़ी हुई थी, जो कभी आजाद जी के साथी रह चुके थे, वें स्वार्थ और धन के लोभ में अन्धे होकर आजद जी को पकडवाकर अंग्रेज सरकार से पुरस्कार लेना चाहते थे, आजाद जी को इन सबकी भनक थी, इसलिए उन्होंने इलाहाबाद आकर अपनी गतिविधियाँ सिमित करली थी, फिर भी उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए काम तो करना ही होता था,

इलाहबाद में आजाद हें इस बात की सुचना गुप्तचर विभाग को लग चुकी थी, गुप्तचर विभाग ने आजाद जी को पहचानने वाले मुखबिरों को बुलालिया और शहर के चप्पे चप्पे पर लगा दिया, गुप्तचर विभाग का इंस्पेक्टर विश्वेश्वर सिंह इलाहबाद आगया था, एक दिन एक गोर रंग का मंझोले कद का एक यूवक इंस्पेक्टर के पास आया, विश्वेश्वर सिंह ने उससे पूछा आज इतनी सुबहा केसे आना हुआ कोई ख़ास काम हे क्या,

युवक बोला जल्दी चलिए मेने आजद और उसके साथियों को जाते हुए देखा हे , विश्वेश्वर सिंह ने कहा यदि तुम्हारी बात गलत निकली तो ये तुम्हारे लिए अच्छा नही होगा, इससे पहले भी एसी सूचनाएं झूटी निकल चुकी हें, युवक ने कहा मेरी बात पर यकीं कीजिये आजद भी साथ में हें 

इंस्पेक्टर ने उसे अपने साथ चलने को कहा और वे जल्दी से पुलिस कप्तान नाट बाटर के बंगले की तरफ भागे जारहे थे, इधर आजाद भी अपने साथियों को छोड़ कर पार्क में आगये, सुखदेव उनके साथ था दोनों पेड़ के निचे बेठ कर बातें करने लगे, तभी आजाद की नजर पार्क के बहार सडक पर गयी और वो चोक कर बोले जान पड़ता हे ‘वीरभद्र तिवारी’ जा रहा हे,

परन्तु आजाद जी को कोई खाश शक नही हुआ और वो बातें करने में वयस्थ हो गये, अचानक ही एक तरफ से गोली आई और आजाद जी की टांग में धंस गयी उन्होंने तुरंत अपनी बंदूक निकाली और सावधान हो गये, आजाद ने भी गोली चलानी शुरू करी और नाट बाटर की कलाई को तोड़ डाला, और इस एक गोली ने नाट बाबर के छक्के छुड़ा दिए और वो भागने लगा, आजाद ने देखा कंही वो मोटर पर बेठ कर भाग न जाये उन्होंने एक और गोली चलादी और मोटर का इंजन चूर हो गया, और वो भाग कर एक पेड़ के पीछे छिप गया,

आजाद पर चारो तरफ से गोलियों की बोछार हो रही थी अचानक झाड़ियों के उपर से एक सिर चमका वो सिर विश्वेश्वर सिंह का था उसकी गोली ने ही आजाद की बांह को छेद दिया था, आजाद ने एक गोली सीधे उसके जबड़े पर मारी और उसे वन्ही चित कर दिया, और सभी सिपाही घबरा गये,

तब तक आजाद की बंदूक में एक ही गोली बच्ची थी, उन्होंने अपने को पुलिस के हवाले नही किया बल्कि उस आखरी गोली से खुद को मार लिया, 





पार्क में जिस पेड़ के निचे आजाद जी ने अपनी जीवन का बलिदान दिया था उस इमली के पेड़ को अंग्रेजों ने कटवादिया, आज उसी इस्थान पर आजाद जी की मूर्ति इस्थापित हे 

(एसा भी कहा जाता हे की आजाद जी  की सुचना अंग्रेजों को नेहरु ने दी थी )

bangladeshi कर रहे हें भारत के मुस्लिमों को बदनाम, दोस्तों ये अपना भारत खतरे में हे बचालो इसे

दोस्तों जब तक ये बांग्लादेसी इस देश में हें … जब तक देश का भला नही हो सकता .. सभी नेता देश द्रोही हें … कोई भी नही चाहता इन बंग्लादेसियों को भगाना … सबसे ज्यादा दंगे ये ही लोग करते हें और बदनाम भारत के मुस्लिम होते हें … सर्वोच न्यायालय ने भी आदेश दिया हे इनको भगाने का लेकिन ये नेता इस देश को बर्बाद करना चाहते हें .. ये देशद्रोही नेता इसी देश का खाते हें और इसी के खिलाफ साजिश रचते हें .. ना जाने ये देशद्रोही नेता क्यों भारत को बर्बाद करना चाहते हें 

यदि ये बांग्लादेसी इस देश से नही गए तो ये देश आगे आने वाले 5 सालो में देश का लगभग 70% हिस्सा बर्बाद हो जायेगा , इनकी संख्या अभी भारत में 5 करोड़ से ज्यादा हो चुकी हे, आगे आने वाले समय में आपकी जान मॉल की हानि होगी ये निश्चित हे , आपको दोडा दोडा कर मारेंगे ये , आपकी माँ बहन बेटियों की इज्जत खतरे में होगी , इन बंग्लादेसियों के कारण आज आसाम का बुरा हाल हे, जल्दी ही पूरा आसाम बंग्लादेसियों से भर जाएगा, दोस्तों ये अपना भारत खतरे में हे बचालो इसे, 
इस देश के ये हरामी नेता कुछ नही करेंगे हमे ही कुछ करना होगा , ये एक बहूत बड़ी साजिश हे अपने देश को टुकड़े टुकड़े करने की,ज्यादा जानकारी के लिए sudrshan news देखें..जये हिन्द,वंदेमातरम्
दोस्तों ये बहूत बड़ा खतरा हे

muslim regiment ने किया था भारत के साथ धोका

*muslim regiment* मुस्लिम रेजिमेंट भारतीय सेना में क्यूँ नही हे आखिर ऐसा क्यूँ हे क्या आप जानतें हें इसके पिच्छे का सच ? नही जानते तो में आपको बताता हूँ

1965 से पहले भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राइफल हुआ करती थी 1965 में जो भारत और पाकिस्तान का यूद्ध हुआ था उस युद्ध में इन दोनों रेजीमेंटों ने पाकिस्तान के सामने हथियार डाल दिया और इन्होने पाकिस्तान पर हमला करने से साफ़ मना करदिया ऒर लगभग 20 हजार सेनिकों ने अपने हथियार डाल दिए ऒर इनकी गद्दारी के कारण उस वक्त भारत को काफी मुश्किलों का समना करना पड़ा था ऒर इसके बाद इन दोनो रेजीमेंटो को लात मारके बहार का रास्ता दिखा दिया गया

1971  में फिर से भारत का पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ उस समय भारत की सेना में एक भी मुस्लिम नही था ऒर उस समय भारतीय सेना ने पाकिस्तानी 90  हजार सेनिकों के हथियार गिरवाके उनको बंदी बनालिया
जेसा की आप इस तस्वीर में देख रहे हें
दोस्तों दो बार गलत पोस्ट डालने के बाद अब तीसरी बार ये पोस्ट डाल रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ की इस बार आप इस पोस्ट में कोई गलती नहीं निकालेंगे .. आपको पता है की भारतीय सेना में सभी तरह के रेजिमेंट फ़ोर्स हैं  जैसे की राजपुताना राईफल्स  राजपुताना रेजिमेंट  सीख राईफल्स  सीख रेजिमेंट  मराठा रेजिमेंट  गुजरात राइफल्स  जाट रेजिमेंट   इसी तरह के सभी राज्यों के आधार पर रेजिमेंट बनायें गए हैं और उस रेजिमेंट में वही सेना है जिस नाम से वो रेजिमेंट बनाया गया है   दोस्तों क्या आपको पता है मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम क्यूँ नहीं है   कहानी तो बहुत लंबी है संक्षिप्त में बता रहा हूँ   1965 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स को हमला करने के आदेश जारी किये उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स ने पाकिस्तान पर हमला करने से साफ़ मना कर दिया था औरलगभग बीस हज़ार मुस्लिम सेना ने पाकिस्तान के सामने अपने हथियार दाल दिए थे जिस वजह से उस वक्त भारत को काफि मुश्किलों सामना करना पड़ा था क्यूँ की मुस्लिम राईफल्स और मुस्लिम रेजिमेंट के ऊपर बहुत ज्यादा यकीन कर के इनको भेजा गया था  लेकिन इसके बाद इन दोनों को हटा दिया गया उसके बाद 1971 में पाकिस्तान के साथ फिर युद्ध हुआ उस वक्त सेना में एक भी मुस्लिम नहीं था उस वक्त भारत ने पाकिस्तान के नब्बे हज़ार सेना के हथियार डलवा कर उनको बंदी बना लिया था और लिखित तौर पर आत्मसमर्पण करवाया था जैसा की आप इस फोटो में देख सकते हैं ये फोटो उस वक्त की है जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को धुल चटाया था तब से लेकर आज तक भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम की कोई सेना नही है 
इसी कारण भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट ऒर मुस्लिम राइफल्स नाम की सेना अब नही हे

भगवान BUDH ने कहा खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना।

Vipassana Meditation भगवान BUDH की अनमोल विदया

भगवान BUDH जिन्हें हम भगवान विष्णु का Avatar मानते हें लेकिन उनके विचारों से काफी डरते हें अब आप सोचते होंगे ऐसे कोनसे विचार हें वेसे आप लोग जानते ही होंगे अधिकतर लोग ये ही समझते हें की भगवान बुध के विचारों के अनुसार इस दुनिया में इश्वर का कोई अस्तित्व हे ही नही जब की ऐसा नही हे भगवान बुध ने कहा खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना। जन्हा तक मेने उनको पढ़ा और समझा हे और उनकी शिक्षा को जाना हे उनकी बाते बिलकुल सही हे क्योंकि एक योगी इस संसार का सारा रहस्य जनता हे और वो ये भी जनता हे की किसी को केसे अध्यात्म में आगे लेजाना हे

2500 वर्ष पहले बुध ने वो खोजा जो आज भी सार्थक मालूम पड़ेगा और जो आने वाली सदियों तक सार्थक रहेगा बुध ने विश्लेष्ण दिया और जेसा सूक्ष्म विश्लेष्ण उन्होंने दिया कभी किसी ने न दिया था और फिर दुबारा ऐसा विश्लेष्ण कोई न दे पाया उन्होंने जीवन की समस्या के उत्तर शास्त्र से नही दिए विश्लेष्ण की प्रक्रिया से दिए वो धर्म के पहले वैज्ञानिक हें बुध ये नही कहते की भरोषा करलो वो कहते हें की सोचो विचारो विश्लेष्ण करो खोजो पाओ अपने अनुभव से तो भरोसा करलेना

दुनिया के सारे सम्प्रदायों ने भरोसे को पहले रखा हे सिर्फ बुध को छोड़ कर दुनिया के सारे धर्मों में श्रधा प्राथमिक हे बुध ने कहा अनुभव प्राथमिक हे बुध कहते हे आस्था की कोई जरूरत नही हे अनुभव से खुद ही आस्था आ ही जाएगी बिना अनुभव के जो आस्था आयेगी उसमे शंका ज्यादा होगी इसलिए पहले ध्यान करो और जानो सत्ये को इश्वर को सत्ये मानने से पहले अनुभव करो ध्यान के द्वारा जब तुम अनुभव के द्वारा इश्वर को जानलोगे तो इश्वर के प्रति सच्चा प्रेम खुद ही जाग्रत हो जायेगा
 
चलिए में आपको एक छोटा सा उधाहर्ण देता हूँ अगर में आपको ये बताउं की मुझको भगवान श्री राम ने दर्शन दिए तो क्या आप यकीं करलेंगे कोई यकीन नही करेगा और अगर कोई यकीन करभी ले तो वो भ्रांतियों में ही फसा रहेगा और इसी शं से अंध विश्वास शुरू होता हे जब आप खुद साधना करेंगे और अध्यात्म की उस ऊंचाई तक पोहचेंगे तो खुद ही जानलेंगे की कोई इश्वर हे या नही और जो आपने जाना वो आपके लिए सत्ये हे और किसी के लिए नही क्योंकि सुनने वाले ने नही जाना अपनी अनुभूति पर नही उतारा इसलिए अगर वो यकीन करता हे तो उसको जीवन भर ये ही शख रहेगा की पता नही इश्वर हे भी या नही इसलिए भगवान बुध की बातों को माने और पहले साधना करें तभी सच 
जान पाएंगे । 

भगवान बुध के विचार बिलकुल वैज्ञानिक विचार हें इसी लिए आज के सम्यें में सभी पढ़े लिखे लोग भगवान बुध की बातों को ज्यादा मानते हें विज्ञानं भी यही कहता हे पहले खोजो जानो फिर यकीन करो वेसे विज्ञानं अध्यात्म से काफी पिच्छे हे क्योंकि विज्ञानं ने आज जो भी कुछ खोज की हे वो ही खोज की हे जो पहले से ही हमारे देश के योगी जान चुके थे क्योंकि एक योगी ही पुरे संसार का सच जानता हे

अगर आप भगवान बुध की विपश्ना विधि से ध्यान करते हें तो आप जान ही जायेंगे इस संसार का सत्ये वेसे ध्यान की और भी काफी सारी विधियाँ हे आप चाहें किसी भी विधि से ध्यान करें पूरी श्रधा से करें तो सत्ये आपसे दूर नही
विपश्यना सत्र्स के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ  http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/ 

Vipassana Meditation जिसे खोजा था भगवान महत्मा बुध ने,

Vipassana साधना के आचार्य पूज्य श्री S.N. Goenka *स्त्येनारायण गोयनका जी* भारत में १९६९ से Meditation की इस विद्या का प्रसिक्षण दे रहे हें । उन्होंने यह साधना विधि ब्रहादेश में पूज्य Sayagyi U Ba Khin  से सीखी और बहूत लाभान्वित हुए । तदंतर अपने गुरु के कुशल मार्ग दर्शन में निरन्तर अभ्याश करते हुए इस विद्या में पारंगत हुए । यह विद्या सार्वदेशिक, सर्वजन्नी, और सर्वकालिक हे — देश जाती और समय की सीमा से सर्वथा मुक्त इसमें सम्पूर्ण मानव जाती का कल्याण समाया देख पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी ने निरन्यें लिया की वो अब business से निर्व्रती लेकर अपना शेष जीवन इसी के शिक्षण कार्य में लगायेंगे उनके इस सुभ संकल्प में उनके पूज्य गुरुदेव का प्रोत्सहन और आग्रेह निहित था


 ध्यान की यह विधि भारत की पुरानी और अनमोल विद्या हे जो आज से लगभग २५०० वर्ष पूर्व भगवान बुध ने खोज निकाली थी किन्ही कारणों से यह हमारे देश से विलुप्त हो गई पड़ोसी ब्र्हंदेश ने गुरु शिष्य परमपरा द्वारा इसे सुरक्षित रखा और अब अपने देश की इस अनमोल धरोहर को वापश लाने का श्रय पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी को हे


हम धर्म शब्द का सही अर्थ भूल गये और सम्प्रदाए को ही धर्म मानने लगे हें आज जबकि धर्म के नाम पर इतनी अराजकता फेली हुई हे यह स्म्प्रदायेकता विहीन विद्या घोर अंधकार में प्रकाश सद्र्श स्तम्भ हे

आज का मनुष्ये तनाव, वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि विकारों से ग्रसित हे विपश्ना एक ऐसी विद्या हे जो हमारी इन सांसारिक विपदाओं को खतम करने में साहयक हे इसके आलावा यह विद्या हमें अध्यात्म के ऊँचे से ऊँचे धरातल तक ले जाने में पूर्णता सक्षम हे इस विधि से हमारे विकार वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि पूर्णता नष्ट होते च्लेजाते हें और कुशल विर्तियाँ मैत्री, करुणा, शमा, शील, सेवा, आदि अंकुरित होती हें और फलती फूलती हे । 

सोभाग्येवश ऐसी दुर्लभ विद्या आज सुलभ हे और इसके द्वारा हमे अपना मंगल साधने की प्रेरणा मिले इसलिए ये विद्या फिर से भारत से पुरे विश्व में फेल रही हे   । 

विपश्यना ध्यान सिखने के लिए दस दिन के शिविर में भाग लेना जरूरी हे इन दस दिनों के दोरान शिविर स्थल पर ही रहना होता हे जन्हा भोजन और आवास की सम्पूर्ण व्येव्स्था रहती हे शिक्षण आवास सहित सम्पूर्ण सुविधा का कोई शुल्क नही लिया जाता । 

ध्यान की यह विधि सिखने के लिए हर सम्प्रदाए के लोग आते हें चाहे वो मुस्लिम, हिन्दू, सिख, बुध , जेन, इसाई सभी आते हें अत्यंत धन सम्पन भी आते हें और बिलकुल धनहिन भी किसी भी विपश्यना शिविर में समाज के हर वर्ग का यह अनूठा संगम देखा जा सकता हे 

इस विद्या के माध्यम से धर्म धारण कर अधिक से अधिक लोग अपना और अपने परिवारजनों का मंगल साध सकें ये ही मंगल कामना हे  ।  

विपश्यना सत्र्स के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/

tomato (*टमाटर*) में छिपे हें उम्र बढ़ाने के राज

britain के scientists ने टमाटर में ऐसी खोज की हे जो शायद आपकी उम्र लम्बी करदे ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने टमाटर के बीजों में एक ऐसा तत्व खोजा हे जो आपकी उम्र बढ़ाने में काफी सहायक सिद्ध हो सकता हे और ये आपके जीवन को health की नजर से सुखी बना सकता हे वैज्ञानिकों के अनुसार टमाटर के बीजों में एक ऐसा तत्व होता हे जिसे frout flow (*फ्रूटफ्लो*) नाम दिया गया हे और इस की खोज भारतीये मूल के वैज्ञानिक प्रोफेसर असीम दत राये ने 1999 में की थी पर उस समय ये नही पता चल पाया था की इस तत्व का उपयोग आपका जीवन बढ़ाने में किया जा सकता हे वैज्ञानिकों के अनुसार टमाटर में पाया जाने वाला ये तत्व आपके खून को चिपचिपा और थक्का बनाने से रोकता हे तो होजाएं तयार अपनी उम्र बढ़ाने के लिए

जब कोई वैय्क्ति सम्यक स्म्बुधं बनता हे

जब कोई वैय्क्ति सम्यक स्म्बुधं बनता हे , चाहे सिधारत गोतम हो या कोई और, तो वो कदापि कोई सम्प्रदाए स्थापित नही करता । शुद्ध धरम ही लोगों को  सिखाता हे  शुद्ध  धरम याने कुदरत का वो कानून जो सब पर एक जेसा लागु होता हे। जो किसी का पक्षपात नही करता विश्व में कोई बुध बने या न बने , यह कानून सदेव अपना काम करता हे। परन्तु जब कोई वैय्क्ति बुध बन जाता हे तो स्वानुभूति से इस कानून की बारीकियों को जान लेता हे । और दुखयारी जनता जो इसे भूल बेठी थी उसे समझता हे । धरम धारण करने की प्रेरणा और उपाए देता हे । कालन्तर में लोग अनुभूतियों से समझमें  आने वाली इन बारीकियों को खो बेठता  हे और उस विद्या को भावावेश या बुधिविलास का विषये बना लेता हे तब  इसी  से भीन  भीन सम्प्रदायों  का  प्रजनन  और सन्गठन  होने लगता हे ।
भगवान  महत्मा बुध  की विपश्ना विधि को जानने के लिए इस साईट पर जाएँ  http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/