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Doctor pankaj narang की हत्या मुस्लिमों के द्वारा

Doctor pankaj narang (डॉक्टर पंकज नारंग) की तरह शहर में रहने वाले हिन्दुओं के लिए सुचना,

doctor pankaj narang

doctor pankaj narang

डॉक्टर पंकज नारंग (doctor pankaj narang) की तरहा हिन्दुओं मरोगे बेमोत, ये मुगल, बांग्लादेसी, पाकिस्तानी, मुल्ले 15, 20 झुण्ड में आएँगे और तुम्हे रोड, डंडे, आदि से फोड़ देंगे, और तुम हिन्दुओं की काहानी खत्म। भाई आखिर अपनी आत्मरक्षा के बारे में कब सोचोगे जब कोई एक और doctor pankaj narang मरेगा तुम्हारे घर से तब।

बन्दूकों के लिए तो लाइसेंस लगता है पर डंडे, तलवारों के लिए कोई लाइसेंस नही लगता रखो अपने घरो में इन हथियारों को ना जाने कब जरूरत पड जाए। इस गलत फ़हमी में मत रहना की कानून या कोई नेता कोई सरकार तुम्हारी मदद करेगी, क्योंकि तुम हिन्दू हो येही तुम्हारा गुन्हा है इसलिए बेमोत ही मरोगे doctor pankaj narang की तरहा ये ही तुम्हारी किस्मत है।

हिन्दुओं या तो तुम आर्य बनो सारा खेल शिक्षा का है, यदि सभी हिन्दूओ ने वेदों की शिक्षा ली होती तो तुम आर्य होते और इन मलेछ दुष्टों को मारते और जान पाते वेदों में इश्वर ने दुष्टों को दंड देने के बारे में काहा है। तुम्हे पूरा हक है अपनी रक्षा करने का यदि सरकार तुम्हारी रक्षा ना करे तो तुम खुद अपनी रक्षा करो और दुष्टों को मरो।

डॉक्टर पंकज नारंग के आस पास रहने वाले हिन्दू यदि हथियार चलाना जानते तो डॉक्टर पंकज नारंग dr pankaj naram की आप मदद कर सकते थे। हथियार चलाने सीखो ना जाने कब जरूरत पड़ जाए। इन नेताओं ने इतने सपोले पाल रखे हैं की आप लोगों को ये मारेंगे।

जो नेता अखलाक की मोत पर विधवा विलाप कर रहे थे कन्हा है वो नेता क्या इन नेताओं की नजर में सिर्फ वो अखलाक ही मनुष्य था doctor pankaj narang कोई एहमियत नही रखता इन नेताओं की नजरों में। ये पत्रकार मिडिया जो रंडीखाना खोले बेठे है। जिन्हें सिर्फ मुस्लिम ही दीखते है मुस्लिमों को छोटी सी आंच भी आजाए तो छाती पिटनी शुरू करदेते है।  doctor pankaj narang की मोत पर क्यूँ चुप हैं ये क्योंकि dr pankaj naram एक हिन्दू था इसलिए।

मित्रों वेद की आज्ञा है की आर्य बनो और बनाओ क्योंकि अपने वेद ही है जो हमे वीर और साहसी बनने की शिक्षा देते है। याद रखना जबतक ये देश आर्यवर्त था तब तक कोई इसे हरा नही सका, जब ये भारत बना तो विनाश शुरू हुआ और आज जब ये आर्यवर्त हिन्दुस्तान बन चूका है तो यंहा ये हिन्दू मारा दिया जाता है।

फिर से हमे आर्य बनना होगा और दुष्टों को मारना होगा तभी कुछ होगा आपका भला। वरना डॉक्टर पंकज नारंग के जैसे तयार रहना मरने को। doctor pankaj narang का हंसता खेलता परिवार था। दुष्टों ने एक पल में उजाड़ दिया। मित्रों अब आवश्कता है अपने बच्चों को वेदों की शिक्षा दो।

मैं ये भी जानता हु की हिन्दू सो राहा है गहरी निंद्रा में आप लोग नही जागोगे आप नही बनोगे श्री राम, कृष्ण के जैसे आर्य क्योंकि आप लोग तो सिर्फ माहापरुषों की मूर्तियाँ बनाकर ही संतुष्ट हो। पर क्या करूं मुझे काफी पीड़ा होती है हिन्दुओं को एसे मरता देख इसीलिए ये लेख लिखा हो सकता है की कोई हिन्दू जागे और आर्य बनना चाहे और सुधार हो जाए।

आखिर में ये ही कहना चाहूँगा याद रखना वेद का ये मन्त्र कृण्वन्तो विश्वमार्यम :- सम्पूर्ण विश्व को आर्य बनाओ (ऋग्वेद मंडल ९, सूक्त ६३, मंत्र ५)

यदि आप आर्य बनना चाहते है तो अपने नजदीकी आर्यसमाज निर्मात्री सभा से सम्पर्क करें। यदि आप कुछ जानना चाहते हैं तो कमेन्ट के माध्यम से भी मुझसे जानकारी ले सकते है या इस मेल आईडी पर सम्पर्क करें [email protected] 

Freedom *कुछ लडकियों को आजादी के नाम पर ये सब करना होता हैं…*

 
● इन्हें आजादी चाहिए कम कपड़े पहनने दो.

● इन्हें आजादी चाहिए बॉय फ्रेंड के साथ घुमने दो.

● इन्हें आजादी चाहिए अनजान लोगो से बाते करने दो.


● इन्हें आजादी चाहिए से** करने दो बिना शादी के.


● इन्हें आजादी चाहिए रात को बारह बजे तक लडको के साथ डिस्को में रहने दो.


● इन्हें आजादी चाहिए माँ बाप को बिना बताये लडको के साथ घुमने दो.


● इन्हें आजादी चाहिए लोज में जाकर बिस्तर गर्म करने दो, माँ बाप को धोखा देकर मुंह काला करने दो.


● इन्हें आजादी चाहिए बियर शराब सिगरेट पीने दो.

आजादी के नाम पर कुछ लडकिया संस्कृति को मिटाने पर तुली हुई हैं।
उन चंद लडकियों के कारण आज सारे भारतीय
नारियो पे ऊँगली उठ रही हैं॥ ढंग के कपड़े
नही पहनेगी हमेशा टाईट कपड़े ही चाहिए जिसमे से
आगे और पिछला दिखना चाहिए ताकि लडके फिगर
की तारीफ़ कर सके॥
घिनौनी सोच है इनकी जो बाकी सभ्य
लडकियों को शिकार बना रही है,
सलवार कमीज की जगह आज टाईट जींस ने ली॥
सांस्कृतिक पहनावा तो जैसे गायब सा हो गया है
यहाँ से….
( सभी लडकिया ये सब नही करती किन्तु जो करती हैं
उनके लिए ये लेख लिखा गया हैं )
बदलाव लाना आवश्यक हैं वरना पश्चिमी सभ्यता हमे
ले डूबेगी. !!
और एक बात याद रखो के जब जब सूरज पश्चिम में गया हैं तब तब डूबा ही हैं?


REAL HERO आइए जानेँ एक हीरो को फिल्मोँ वाला नहीँ रियल वाला

 आई जानेँ एक हीरो को फिल्मोँ वाला नहीँ रियल वाला  आईये जाने नारायण कृष्णन जी को  एक भारतीय फ़ाइव स्टार होटल में कार्यरत युवक जिसे स्विटज़रलैण्ड में शानदार नौकरी का ऑफ़र मिला था, लेकिन उसी दिन मदुराई मन्दिर जाते समय इस युवक ने एक भूखे बेसहारा व्यक्ति को अपना ही मल खाते देखा और वह भीतर तक हिल गया, पल भर में उसने उस हजारों डालर वाली नौकरी को अलविदा कह दिया और मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर देने का फ़ैसला कर लिया।  कृष्णन रोज़ाना सुबह चार बजे उठकर अपने हाथों से खाना बनाते हैं, फ़िर अपनी टीम के साथ वैन में सवार होकर मदुरै की सड़कों पर औसतन 200 किमी का चक्कर लगाते हैं तथा जहाँ कहीं भी उन्हें सड़क किनारे भूखे, नंगे, पागल, बीमार, अपंग, बेसहारा, बेघर लोग दिखते हैं वे उन्हें खाना खिलाते हैं… यह काम वे दिन में दो बार करते हैं। औसतन वे रोज़ाना 400 लोगों को भोजन करवाते हैं, तथा समय मिलने पर कई विकलांग और अत्यन्त दीन- हीन अवस्था वाले भिखारियों के बाल काटना और उन्हें नहलाने का काम भी कर डालते हैं।  ...शत शत नमन इस असली हीरो को

 REAL HERO
आईये जाने नारायण कृष्णन जी को

एक भारतीय फ़ाइव स्टार होटल में कार्यरत युवक जिसे स्विटज़रलैण्ड में शानदार नौकरी का ऑफ़र मिला था,
लेकिन उसी दिन मदुराई मन्दिर जाते समय इस युवक ने एक भूखे बेसहारा व्यक्ति को अपना ही मल खाते देखा और वह भीतर तक हिल गया, पल भर में उसने उस हजारों डालर
वाली नौकरी को अलविदा कह दिया और मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर देने का फ़ैसला कर लिया।

कृष्णन रोज़ाना सुबह चार बजे उठकर अपने हाथों से खाना बनाते हैं, फ़िर अपनी टीम
के साथ वैन में सवार होकर मदुरै की सड़कों पर औसतन 200 किमी का चक्कर लगाते हैं तथा जहाँ कहीं भी उन्हें सड़क
किनारे भूखे, नंगे, पागल, बीमार, अपंग, बेसहारा, बेघर लोग दिखते हैं वे उन्हें खाना खिलाते हैं… यह काम वे दिन में
दो बार करते हैं। औसतन वे रोज़ाना 400 लोगों को भोजन करवाते हैं, तथा समय मिलने पर कई विकलांग और अत्यन्त दीन- हीन अवस्था वाले भिखारियों के बाल काटना और उन्हें नहलाने का काम भी कर
डालते हैं।

…शत शत नमन इस असली हीरो को

Gau mata के गोबर और मूत्र से पूरे गाँव को निशुल्क गैस


Gau mata के गोबर और मूत्र का उपयोग करके दिलावर सिंह जी दे रहे है पूरे गाँव को निशुल्क गैस ……राजीव दीक्षित Rajiv Dixit


120 गायों से दूध की डेयरी चलाने वाले दिलावर सिंह ने गोबर और मूत्र से Gobar Gas (गोबर गैस) को पूरे गाँव में पाइप लाइन के जरिये भेजकर पूरे गाँव को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया /…. और उन्हें 
gas cylinder के दाम बढ़ने का डर भी नहीं सताता

ये कार्य अगर हर गाँव में हो जाये तो हमें रसोई गैस के लिए अरब देशो के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा

Anti-gravity की खोज के काफी नजदीक थे हमारे राजीव भाई

 
अगर आप पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ क्लिक करें: राजीव दीक्षित Rajiv Dixit
http://www.youtube.com/watch?v=1aX7PxhBAzE
 हमारे राजीव भाई CSIR (Center For Science & Industrial Research) के एक शोध कार्य मे काम किया था| वो शोध कार्य Fundamental Fifth Force के ऊपर था, आप जानते है ब्रह्माण्ड मे चार तरह के Fundamental Force है, पर एक कल्पना ऐसी है के कोई एकk Fifth Force भी है और वो Anti-gravity है| तो इसके लिए राजीव भाई ने Mathematical Foundations तक Develop किया, पहले तो Assumption थे फिर Foundations मे राजीव भाई गए फिर Experimental Verification का काम राजीव भाई अपने टीम के साथ शुरू किया|

तभी इस काम के बारे मे Germany के कुछ वैज्ञानिकों को खबर लग गयी, उहाँ पर एक Max Planck Research Institute है Munich नाम की शहर मे, उनको पता चल गया के हिन्दुस्तान मे ऐसा कुछ काम हो रहा है तो उन्होंने राजीव भाई की टीम को Offer कर दिया के अब तो आप यहाँ आ जाइये और इहाँ पे करिए, हम आपको Billions of Dollars Provide करेंगे| तो राजीव भाई ने काहा के ‘नही ये संभव नही है हम तो हमारे देश मे कुछ करना चाहते है’| तो कहने लगे आपके देश मे तो Facilities नही है, तब राजीव भाई ने काहा ‘नही है, तो क्या है ? आचार्य जगदीश चन्द्र बोसू ने जब काम किया था तब उनके पास भी Facilities नही थे तो क्या वो अमेरिका भाग गए थे शोध करने के लिए ? वो यही पे रहके काम करते थे|’ फिर उन लोगोने धमकी देना शुरु किया के ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे, Government of India को उन्होंने कहा के आप तो Pressurize करिए इन लोगोंको, माने एक ग्रुप के वैज्ञानिकों को जो राजीव भाई के साथ काम कर रहे थे| तो वो कहते थे इनको Pressurize करो पैसे की मदत से या किसी भी तरह से या तो Surrender कर दे यह पूरी शोध या यह तैय कर ले की Patent सिर्फ Germany लेगा माने Max Planck Research Institute.

राजीव भाई के मन मे कुछ ऐसे प्रतिक्रिया आ रही थी.. दो रास्ते थे उनके पास, एक के वो अपनी शोध (Research) को Surrender कर दे, कुछ पैसा उनको मिल जाये, करोड़ पति बन जाय, मज़े का जीवन बिताएं या Germany चला जाए| एक और रास्ता था के राजीव भाई उनसे झगड़ा करे, और कहें के कोई सवाल हि नही उठता यह उनका अपना है, वो खुद रखेंगे, तुमको International Court मे जाना है उहाँ चले जाओ, मैं फाइट करूँगा ऐसा करूँगा वैसा करूँगा| तीसरा और एक आखरी रास्ता है जो राजीव भाई को बहुत पसंद था वो था के शोध हि बंध कर दो| किस बात का झगड़ा लेना ? होगा क्या के राजीव भाई शोध करेंगे और Patent उनको हो जायेगा तो Technology वो बनायेंगे|

अब Technology कहाँ से आयेगी ? अब यह तैय हो जाये के Fundamental Fifth Force है और यह भी तैय हो जाये के वो Anti-gravity है तो यह जो Satellite Communications का Field है यह तो हमारे लिए बिलकुल खुल जायेगा, बहुत अपर सम्भावनाये इसमें हो जाएगी, और हम बहुत कम पैसे मे दुनिया के Master हो सकते है| राजीव भाई को लगता था के हम Satellite बनायेंगे तो हिन्दुस्तान के प्राकृतिक सम्पदा के बारे मे पता लगायेंगे, Star Wars तो नही करने वाले| अगर अमेरिका के पास यही Technology पोहुंच जाएगी तो वो इसको Star Wars इस्तेमाल करेंगे| इराक को बम मारेंगे, ईरान को बम मारेंगे, अफगानिस्तान को बम मारेंगे, उसको मारेंगे ..तो राजीव भाई के मन मे आया के यह काम बंध कर देना चाहिए क्योंकि भारत सरकार का कोई भरोसा नही है| पता नही कब भारत सरकार जर्मनी के सामने Surrender देंगे और कहेंगे के इतना बिलियन डॉलर मिलता है तो ले लो… तो सरकार पर कोई भरोसा नही और राजीव भाई को उनसे झगड़ा नही करना, तो एक रास्ता उन्होंने ढूंड लिया के इस प्रोजेक्ट को बंध कर दिया जाये| राजीव भाई के जो गाइड थे डॉ एम् पि कौशिक उन्होंने कहा के जब हमारी ताकत और हैसियत होगी तब हम फिर से शुरू करेंगे अभी फ़िलहाल बंध कर दो| तो राजीव भाई ने वो प्रोजेक्ट बंध कर दिया|

अब यह Concept की बात है, तो राजीव भाई के दिमाग मे जब भी इस बात को लेके विचार आते थे तो वो यही सोचते थे के उनका उस शोध का काम अगर वो प्रोयोग करेंगे, Technology के field मे जायेंगे तो उनको Satellite के field मे हिन्दुस्तान को कुछ आगे ले जाने की बात Self Sufficient करने की बात दीखता था| उनको क्या दीखता था ? के इसको हम प्रोयोग करके दुनिया पर हम राज करेंगे Star Wars के Masters हो जायेंगे हम Missiles को ऐसे डिजाईन करेंगे वैसे डिजाईन करेंगे|

तो यह जो Civilization Concept है यह Technology के Development मे बड़ी भूमिका निभाता है| हमारी Civilization की जो मान्यताएं है उसि के हिसाब से Technology बनाते है और हमारी जो मान्यतायों के विरुद्ध है वो Technology मे हम नही जाते| अब पिछले 20 सालों से क्या हो गया है के यूरोप की जो मान्यताये है Civilization की उसके आधार पर उन्होंने जो Technology का विकास किया है वो वकास के आधार पर उन्होंने ऐसी बहुत सारी Technology बनाई है जो दुनिया का नाश हि जादा करती है, फ़ायदा तो बहुत कम करती है| यूरोप और अमेरिका के पास इस समय जितनी भी Technology है अगर आप उसको classify करने की कौसिश करें to 70% se 80% Technology उनकी ऐसी है जो Mass Destruction की है| और इसमें Trillion of Dollar की Investment है| और हमने जो Technology बनाई है पिछले 50-55 साल मे वो ऐसा बिलकुल नही है| Technology अछि या बुरी नही होती कभी भी जैसे एक चाकू है ..ये अच्छा और बुरा कुछ नही होता प्रोयोग करने वाले के हात मे है के आप उसका क्या प्रोयोग करेंगे! आप चाकू से किसीका जेब काट सकते है किसीका पेट फाड़ सकते है, और उसि चाकू से आप केला काट सकते है, आलू काट सकते है, सब्जी बनाके खा सकते है| आप अगर यह पश्चिमी लोगों के हात मे दे दोगे तो वो पेट फाड़ने का सोचेंगे, जेब काटने का सोचेंगे और हिन्दुस्तानी या पूर्वी लोगोंके हात मे दोगें तो वे सब्जी काट के हि खायेंगे उससे|

तो यह डिबेट नही करना है के Technology अछि है या ख़राब! उनके लिए बहुत अछि हो सकती है पर मेरे लिए ख़राब| यह Relativity का सवाल है न के अपने लिए Star Wars का Concept बहुत ख़राब हो सकता है Atom Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Hydrogen Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Chemical Bomb बहुत ख़राब हो सकता है Anthrax बहुत ख़राब हो सकता है लेकिन यूरोप, अमेरिका के लिए हो सकता है बहुत अच्छा हो, क्योंकि उन्हें अपना उदेश्य हासिल करने मे वो Technology की मदत मिलती हो तो वो करेंगे उनके लिए बहुत अछि हो सकती है|

आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद
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वन्देमातरम्

हम भारतवासी आर्य कहीं बहार से आयें| इतना बड़ा झूट अंग्रेज हमारे इतिहास मे लिख गए

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http://www.youtube.com/watch?v=5Y3ZFvRfZXE

हमारे देश मे मैकॉले के द्वारा जो विषय तै किये गए उनमे से एक था इतिहास विषय| जिसमे मैकौले ने यह कहा के भारतवासियों को उनका सच्चा इतिहास नहीं बताना है क्योंकि उनको गुलाम बनाके रखना है, इसलिए इतिहास को विकृत करके भारत मे पड़ाया जाना चाहिए| तो भारत के इतिहास पूरी तरह से उन्होंने विकृत कर दिया|

सबसे बड़ी विकृति जो हमारे इतिहास मे अंग्रेजो ने डाली जो आजतक ज़हर बन कर हमारे खून मे घूम रही है, वो विकृति यह है के “ हम भारतवासी आर्य कहीं बहार से आयें|” सारी दुनिया मे शोध हो जुका है के आर्य नाम की कोई जाती भारत को छोड़ कर दुनिया मे कहीं नही थी; तो बाहार से कहाँ से आ गए हम ? फिर हम को कहा गया के हम सेंट्रल एशिया से आये मने मध्य एशिया से आये| मध्य एशिया मे जो जातियां इस समय निवास करती है उन सभि जातियों के DNA लिए गए, DNA आप समझते है जिसका परिक्षण करके कोई भी आनुवांशिक सुचना ली जा सकती है| तो दक्षिण एशिया मे मध्य एशिया मे और पूर्व एशिया मे तीनो स्थानों पर रेहने वाली जातिओं के नागरिकों के रक्त इकठ्ठे करके उनका DNA परिक्षण किया गया और भारतवासियो का DNA परिक्षण किया गया| तो पता चला भारतवासियो का DNA दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और पूर्व एशिया के किसी भी जाती समूह से नही मिलता है तो यह कैसे कहा जा सकता है की भारतवासी मध्य एशिया से आये, आर्य मध्य एशिया से आये ?

इसका उल्टा तो मिलता है की भारतवासी मध्य एशिया मे गए, भारत से निकल कर दक्षिण एशिया मे गए, पूर्व एशिया मे गए और दुनियाभर की सभि स्थानों पर गए और भारतीय संस्कृति, भारतीय सभ्यता और भारतीय धर्म का उन्होंने पूरी ताकत से प्रचार प्रसार किया| तो भारतवासी दूसरी जगह पे जाके प्रचार प्रसार करते है इसका तो प्रमाण है लेकिन भारत मे कोई बाहार से आर्य नाम की जाती आई इसके प्रमाण अभीतक मिले नही और इसकी वैज्ञानिक पुष्टि भी नही हुई| इतना बड़ा झूट अंग्रेज हमारे इतिहास मे लिख गए, और भला हो हमारे इतिहासकारों का उस झूट को अंग्रेजों के जाने के 65 साल बाद भी हमें पड़ा रहे है|

अभी थोड़े दिन पहले दुनिया के जेनेटिक विशेषज्ञ जो DNA RNA आदि की जांच करनेवाले विशेशाज्ञं है इनकी एक भरी परिषद् हुई थी और वो परिषद् का जो अंतिम निर्णय है वो यह कहता है के “ आर्य भारत मे कहीं बहार से नही आये थे, आर्य सब भारतवासी हि थे जरुरत और समय आने पर वो भारत से बहार गए थे|”

अब आर्य हमारे यहाँ कहा जाता है श्रेष्ठ व्यक्ति को, जो भी श्रेष्ठ है वो आर्य है, कोई ऐसा जाती समूह हमारे यहाँ आर्य नही है| हमारे यहाँ तो जो भी जातिओं मे श्रेष्ठ व्यक्ति है वो सब आर्य माने जाते है, वो कोई भी जाती के हो सकते है, ब्राह्मण हो सकते है, क्षत्रिय हो सकते है, शुद्र हो सकते है, वैश्य हो सकते है| किसी भी वर्ण को कोई भी आदमी अगर वो श्रेष्ठ आचरण करता है हमारे उहाँ उसको आर्य कहा जाता है, आर्य कोई जाती समूह नही है, वो सभि जाती समूह मे से श्रेष्ठ लोगों का प्रतिनिधित्व करनेवाला व्यक्ति है| ऊँचा चरित्र जिसका है, आचरण जिसका दूसरों के लिए उदाहरण के योग्य है, जिसका किया हुआ, बोला हुआ दुसरो के लिए अनुकरणीय है वो सभि आर्य है|

हमारे देश मे परम श्रेधेय और परम पूज्यनीय स्वामी दयानन्द जैसे लोग, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चन्द्र बोसे, उधम सिंह, चंद्रशेखर, अस्फाकउल्ला खान, तांतिया टोपे, झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई, कितुर चिन्नम्मा यह जितने भी नाम आप लेंगे यह सभि आर्य है, यह सभि श्रेष्ठ है क्योंकि इन्होने अपने चरित्र से दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किये हैं| इसलिए आर्य कोई हमारे यहाँ जाती नहीं है| रजा जो उच्च चरित्र का है उसको आर्य नरेश बोला गया, नागरिक जो उच्च चरित्र के थे उनको आर्य नागरिक बोला गया, भगवान श्री राम को आर्य नरेश कहा जाता था, श्री कृष्ण को आर्य पुत्र कहा गया, अर्जुन को कई बार आर्यपुत्र का संबोधन दिया गया, युथिष्ठिर, नकुल, सहदेव को कई बार आर्यपुत्र का सम्बोधन दिया गया, या द्रौपदी को कई जगह आर्यपुत्री का सम्बोधन है| तो हमारे यहाँ तो आर्य कोई जाती समूह है हि नही, यह तो सभि जातियों मे श्रेष्ठ आचरण धारण करने वाले लोग, धर्म को धारण करने वाले लोग आर्य कहलाये है| तो अंग्रेजों ने यह गलत हमारे इतिहास मे डाल दिया|

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वन्देंमातरंम्
भारत माता कि जय

पहला हवाई जाहाज Write Brothers ने नही भारतीय वैज्ञानिक “शिवकर बापूजी तलपडे” ने बनाया

 Photo: अधिक जानकारी के लिए यहाँ Click करें: http://www.youtube.com/watch?v=AA6Mdy2dEQw  अगर आज किसीको पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया? तोह ले देके एक नाम लेते है Write Brothers नव बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पड़ते आये है के 17 डिसेम्बर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है|  पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|  जिस भारतीय वैगानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पड़ाई लिखाई की एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो “महर्षि भ्वरद्वाज” | महर्षि भ्वरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलभ्द है उसमे सबसे पुराणी पुस्तक 1500 साल पुराणी है और महर्षि भ्वरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|  शिवकर बापूजी तलपडे जी के हात मे महर्षि भ्वरद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –  > “इस पुस्तक के आट अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का हि वर्णन है” > “आट अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है” > “महर्षि भ्वरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है” एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भ्वरद्वाज ने मने 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के – > “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”  यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तोह महर्षि भ्वरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!  इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से, और पड़ पड़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे, तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुअ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और हयरानी की बात यह थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हात मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ| और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उहाँ पर उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये की|  तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत है, आर्थिक रूप से मेरी अछि स्थिति नही है| तो लोगोने इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन तभी उनके साथ एक धोका हुआ| अंग्रेजो की एक कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे जी ने कहा की उसका कारण बताइए, तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदत करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके पास पैसे की बहुत कमी है, हमारी कंपनी काफी पैसा इस काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप समझोता कर लीजिये, और इस विमान की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे जी भोले भाले सीधे साधे आदमी थे तो वो मन गए और कंपनी के साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli Brothers जो कंपनी थी उसने विमान का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह कंपनी लन्दन चली गयी और लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन फिर अमेरिका पोहुंच गयी| फिर अमेरिका मे Write Brothers के हात मे आ गयी फिर Write Brothers ने वो विमान बनाके अपने नाम से सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|  तलपडे जी की गलती क्या थी के उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास| राजीव भाई कहते है के भारत मे सबसे बड़ी समस्या 12-15 साल मे उनको जो समझ मे आयी है के “हमको सब ज्ञान आती है, सब तकनिकी आती है, सब आती है पर चालाकी नही आती; एक गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न सीखी होसियारी’ यह भारतवासी पर बिलकुल फिट है, और यह अंग्रेजो को अमेरिकिओंको कुछ नही आता सिर्फ चालाकी आती है| उनके पास न ज्ञान है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| किसीका दुनिया मे कुछ भी नया मिले वो चालाकी करके अपने पास ले लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”  शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुअ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे 17 दिसम्बर को उड़ाया पर इससे 8 साल पहले भारत मे विमान बन जुका था और देश के सामने वो दिखाया जा जुका था|  अब हमें इस बात के लिए लड़ाई करनी है अमेरिकिओं से और यूरोपियन लोगों से के यह तो हमारे नाम हि दर्ज होना चाहिए और Ralli Brothers कंपनी ने जो बैमानी और बदमासी की थी समझोते के बाद उसका उस कंपनी को हरजाना देना चाहिए क्योकि समझोता करने के बाद बैमानी की थी उन्होंने|  राजीव भाई आगे कहते है Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी| उनकी तो मृत्यु के बारे मे भी शंका है के उनकी हत्या की गयी और दर्ज कर दिया गया के उनकी मृत्यु हो गयी; और ऐसे व्यक्ति की हत्या करना बहुत स्वभाबिक है के जिसका नाम दुनिया मे इतना बड़ा अविष्कार होने की संभावना हो| तो अगर हम फिर उस पुराने दस्ताबेज खोले ढूंढें उस फाइल को, फिर से देखें तो पता चल जायेगा और दूध का दूध और पानी का पनी सारा सच दुनिया के सामने आ जायेगा|
अधिक जानकारी के लिए यहाँ Click करें:
http://www.youtube.com/watch?v=AA6Mdy2dEQw
 

अगर आज किसीको पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया? तोह ले देके एक नाम लेते है Write Brothers नव बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पड़ते आये है के 17 डिसेम्बर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है|

पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|

जिस भारतीय वैगानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पड़ाई लिखाई की एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो “महर्षि भ्वरद्वाज” | महर्षि भ्वरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलभ्द है उसमे सबसे पुराणी पुस्तक 1500 साल पुराणी है और महर्षि भ्वरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|

शिवकर बापूजी तलपडे जी के हात मे महर्षि भ्वरद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –

> “इस पुस्तक के आट अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का हि वर्णन है”
> “आट अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है”
> “महर्षि भ्वरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है”
एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भ्वरद्वाज ने मने 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के –
> “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”

यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तोह महर्षि भ्वरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!

इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से, और पड़ पड़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे, तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुअ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और हयरानी की बात यह थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हात मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ| और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उहाँ पर उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये की|

तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत है, आर्थिक रूप से मेरी अछि स्थिति नही है| तो लोगोने इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन तभी उनके साथ एक धोका हुआ| अंग्रेजो की एक कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे जी ने कहा की उसका कारण बताइए, तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदत करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके पास पैसे की बहुत कमी है, हमारी कंपनी काफी पैसा इस काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप समझोता कर लीजिये, और इस विमान की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे जी भोले भाले सीधे साधे आदमी थे तो वो मन गए और कंपनी के साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli Brothers जो कंपनी थी उसने विमान का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह कंपनी लन्दन चली गयी और लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन फिर अमेरिका पोहुंच गयी| फिर अमेरिका मे Write Brothers के हात मे आ गयी फिर Write Brothers ने वो विमान बनाके अपने नाम से सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|

तलपडे जी की गलती क्या थी के उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास| राजीव भाई कहते है के भारत मे सबसे बड़ी समस्या 12-15 साल मे उनको जो समझ मे आयी है के “हमको सब ज्ञान आती है, सब तकनिकी आती है, सब आती है पर चालाकी नही आती; एक गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न सीखी होसियारी’ यह भारतवासी पर बिलकुल फिट है, और यह अंग्रेजो को अमेरिकिओंको कुछ नही आता सिर्फ चालाकी आती है| उनके पास न ज्ञान है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| किसीका दुनिया मे कुछ भी नया मिले वो चालाकी करके अपने पास ले लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”

शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुअ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे 17 दिसम्बर को उड़ाया पर इससे 8 साल पहले भारत मे विमान बन जुका था और देश के सामने वो दिखाया जा जुका था|

अब हमें इस बात के लिए लड़ाई करनी है अमेरिकिओं से और यूरोपियन लोगों से के यह तो हमारे नाम हि दर्ज होना चाहिए और Ralli Brothers कंपनी ने जो बैमानी और बदमासी की थी समझोते के बाद उसका उस कंपनी को हरजाना देना चाहिए क्योकि समझोता करने के बाद बैमानी की थी उन्होंने|

राजीव भाई आगे कहते है Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी| उनकी तो मृत्यु के बारे मे भी शंका है के उनकी हत्या की गयी और दर्ज कर दिया गया के उनकी मृत्यु हो गयी; और ऐसे व्यक्ति की हत्या करना बहुत स्वभाबिक है के जिसका नाम दुनिया मे इतना बड़ा अविष्कार होने की संभावना हो| तो अगर हम फिर उस पुराने दस्ताबेज खोले ढूंढें उस फाइल को, फिर से देखें तो पता चल जायेगा और दूध का दूध और पानी का पनी सारा सच दुनिया के सामने आ जायेगा|

Scorpion (बिच्छू काटने पर इस दवा का इस्तेमाल करें

Like ✔ Comment✔ Tag ✔ Share ✔ @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit] पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे ! http://www.youtube.com/watch?v=N4iEd5Ku9lQ  बिच्छू काटने पर बहुत दर्द होता है जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नही सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो बिच्छू काटने पर एक दावा है उसका नाम है Silicea 200 इसका लिकुइड 5 ml घर में रखे । बिच्छू काटने पर इस दावा को जिव पर एक एक ड्रोप 10-10 मिनट अंतर पर तिन बार देना है । बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है न उसको अन्दर छोड़ देता है वोही दर्द करता है । इस डंक को बाहर निकलना आसान काम नही है, डॉक्टर के पास जायेंगे वो काट करेगा चीरा लगायेगा फिर खिंच के निकालेगा उसमे उसमे ब्लीडिंग भी होगी तकलीफ भी होगी । ये मेडिसिन इतनी बेहतरीन मेडिसिन है के आप इसके तिन डोस देंगे 10-10 मिनट पर एक एक बूंद और आप देखेंगे वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तिन डोस में आधे घन्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते है। बहुत जबरदस्त मेडिसिन है ये Silicea 200. और ये मेडिसिन मिट्टी से बनती है,वो नदी कि मिट्टी होती है न जिसमे थोड़ी बालू रहती है उसी से ये मेडिसिन बनती है ।  इस मेडिसिन को और भी बहुत सारी काम में आती है । अगर आप सिलाई मशीन में काम करती है तो कभी कभी सुई चुव जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये मेडिसिन ले लीजिये ये सुई को भी बाहर निकाल देगा। आप इस मेडिसिन को और भी कई केसेस में व्यवहार कर सकते है जैसे कांटा लग गया हो , कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमखी ने काट लिया हो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते है वो सब के लिए आप इसको ले सकते है । बहुत तेज दर्द निवारक है और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है उसको बाहर निकलने की मेडिसिन है । बहुत सस्ता मेडिसिन है 5 ml सिर्फ 10 रूपए की आती है इससे आप कम से कम 50 से 100 लोगों का भला कर सकते है । @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit]पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=N4iEd5Ku9lQ

(scorpion) बिच्छू काटने पर बहुत दर्द होता है जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नही सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो बिच्छू काटने पर एक दावा है उसका नाम है Silicea 200 इसका लिकुइड 5 ml घर में रखे । बिच्छू काटने पर इस दावा को जिव पर एक एक ड्रोप 10-10 मिनट अंतर पर तिन बार देना है । बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है न उसको अन्दर छोड़ देता है वोही दर्द करता है । इस डंक को बाहर निकलना आसान काम नही है, डॉक्टर के पास जायेंगे वो काट करेगा चीरा लगायेगा फिर खिंच के निकालेगा उसमे उसमे ब्लीडिंग भी होगी तकलीफ भी होगी । ये मेडिसिन इतनी बेहतरीन मेडिसिन है के आप इसके तिन डोस देंगे 10-10 मिनट पर एक एक बूंद और आप देखेंगे वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तिन डोस में आधे घन्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते है। बहुत जबरदस्त मेडिसिन है ये Silicea 200. और ये मेडिसिन मिट्टी से बनती है,वो नदी कि मिट्टी होती है न जिसमे थोड़ी बालू रहती है उसी से ये मेडिसिन बनती है ।

इस मेडिसिन को और भी बहुत सारी काम में आती है । अगर आप सिलाई मशीन में काम करती है तो कभी कभी सुई चुव जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये मेडिसिन ले लीजिये ये सुई को भी बाहर निकाल देगा। आप इस मेडिसिन को और भी कई केसेस में व्यवहार कर सकते है जैसे कांटा लग गया हो , कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमखी ने काट लिया हो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते है वो सब के लिए आप इसको ले सकते है । बहुत तेज दर्द निवारक है और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है उसको बाहर निकलने की मेडिसिन है ।
बहुत सस्ता मेडिसिन है 5 ml सिर्फ 10 रूपए की आती है इससे आप कम से कम 50 से 100 लोगों का भला कर सकते है ।
राजीव दीक्षित Rajiv Dixit

हिन्दी मे पढ़े क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को !!!

हिन्दी मे पढ़े क्या लिखा अंग्रेज़ macaulay ने 1835 मे अंग्रेज़ो की संसद को !!! _________________________________________ मैं भारत के कोने कोने मे घूमा हूँ मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया जो भिखारी हो चोर हो !  इस देश में मैंने इतनी धन दोलत देखी है इतने ऊंचे चारित्रिक आदर्श गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता हम इस देश को जीत पाएंगे , जब तक इसकी रीड की हड्डी को नहीं तोड़ देते !  जो है इसकी आध्यात्मिक संस्कृति और इसकी विरासत !  इस लिए मैं प्रस्ताव रखता हूँ ! की हम पुरातन शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को बादल डाले !  क्यूंकि यदि भारतीय सोचने लगे की जो भी विदेशी है और अँग्रेजी है वही अच्छा है और उनकी अपनी चीजों से बेहतर है तो वे अपने आत्म गौरव और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे !! और वैसे बन जाएंगे जैसा हम चाहते है ! एक पूरी तरह से दमित देश !!  ______________________________________________________________  और बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की macaulay अपने इस मकसद मे कामयाब हुआ !! और जैसा उसने कहा था की मैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दूंगा की इस मे पढ़ के निकलने वाला व्यक्ति सिर्फ शक्ल से भारतीय होगा ! और अकल से पूरा अंग्रेज़ होगा !!  और यही आज हमारे सामने है दोस्तो ! आज हम देखते है देश के युवा पूरी तरह काले अंग्रेज़ बनते जा रहे है !!  उनकी अँग्रेजी भाषा बोलने पर गर्व होता है !! अपनी भाषा बोलने मे शर्म आती है !!  madam बोलने मे कोई शर्म नहीं आती ! श्री मती बोलने मे शर्म आती है !!  अँग्रेजी गाने सुनने मे गर्व होता है !! मोबाइल मे अँग्रेजी tone लगाने मे गर्व होता है !!  विदेशी समान प्रयोग करने मे गर्व होता है ! विदेशी कपड़े विदेशी जूते विदेशी hair style बड़े गर्व से कहते है मेरी ये चीज इस देश की है उस देश की है !ये made in uk है ये made इन america है !!  अपने बच्चो को convent school पढ़ाने मे गर्व होता है !! बच्चा ज्यादा अच्छी अँग्रेजी बोलने लगे तो बहुत गर्व ! हिन्दी मे बात करे तो अनपद ! विदेशी खेल क्रिकेट से प्रेम कुशती से नफरत !!!  विदेशी कंपनियो pizza hut macdonald kfc पर जाकर कुछ खाना तो गर्व करना !! और गरीब रेहड़ी वाले भाई से कुछ खाना तो शर्म !!  अपने देश धर्म संस्कृति को गालिया देने मे सबसे आगे !! सारे साधू संत इनको चोर ठग नजर आते है !!  लेकिन कोई ईसाई मिशनरी अँग्रेजी मे बोलता देखे तो जैसे बहुत समझदार लगता है !!  करोड़ो वर्ष पुराने आयुर्वेद को गालिया ! और अँग्रेजी ऐलोपैथी को तालिया !!!  विदेशी त्योहार वैलंटाइन मनाने पर गर्व !! स्वामी विवेकानद का जन्मदिन याद नहीं !!!!  दोस्तो macaulay अपनी चाल मे कामयाब हुआ !! और ये सब उसने कैसे किया !!  ये जानने के लिए आप सिर्फ एक बार नीचे दिये गए link पर click करे !!! जरूर जरूर click करे ! https://www.youtube.com/watch?v=jwPuWgVuVwU   वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम !!!
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मैं भारत के कोने कोने मे घूमा हूँ मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया जो भिखारी हो चोर हो !

इस देश में मैंने इतनी धन दोलत देखी है इतने ऊंचे चारित्रिक आदर्श गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता हम इस देश को जीत पाएंगे , जब तक इसकी रीड की हड्डी को नहीं तोड़ देते !

जो है इसकी आध्यात्मिक संस्कृति और इसकी विरासत !

इस लिए मैं प्रस्ताव रखता हूँ ! की हम पुरातन शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को बादल डाले !

क्यूंकि यदि भारतीय सोचने लगे की जो भी विदेशी है और अँग्रेजी है वही अच्छा है और उनकी अपनी चीजों से बेहतर है तो वे अपने आत्म गौरव और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे !! और वैसे बन जाएंगे जैसा हम चाहते है ! एक पूरी तरह से दमित देश !!

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और बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की macaulay अपने इस मकसद मे कामयाब हुआ !!
और जैसा उसने कहा था की मैं भारत की शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बना दूंगा की इस मे पढ़ के निकलने वाला व्यक्ति सिर्फ शक्ल से भारतीय होगा ! और अकल से पूरा अंग्रेज़ होगा !!

और यही आज हमारे सामने है दोस्तो ! आज हम देखते है देश के युवा पूरी तरह काले अंग्रेज़ बनते जा रहे है !!

उनकी अँग्रेजी भाषा बोलने पर गर्व होता है !!
अपनी भाषा बोलने मे शर्म आती है !!

madam बोलने मे कोई शर्म नहीं आती !
श्री मती बोलने मे शर्म आती है !!

अँग्रेजी गाने सुनने मे गर्व होता है !!
मोबाइल मे अँग्रेजी tone लगाने मे गर्व होता है !!

विदेशी समान प्रयोग करने मे गर्व होता है !
विदेशी कपड़े विदेशी जूते विदेशी hair style बड़े गर्व से कहते है मेरी ये चीज इस देश की है उस देश की है !ये made in uk है ये made इन america है !!

अपने बच्चो को convent school पढ़ाने मे गर्व होता है !!
बच्चा ज्यादा अच्छी अँग्रेजी बोलने लगे तो बहुत गर्व ! हिन्दी मे बात करे तो अनपद !
विदेशी खेल क्रिकेट से प्रेम कुशती से नफरत !!!

विदेशी कंपनियो pizza hut macdonald kfc पर जाकर कुछ खाना तो गर्व करना !!
और गरीब रेहड़ी वाले भाई से कुछ खाना तो शर्म !!

अपने देश धर्म संस्कृति को गालिया देने मे सबसे आगे !! सारे साधू संत इनको चोर ठग नजर आते है !!

लेकिन कोई ईसाई मिशनरी अँग्रेजी मे बोलता देखे तो जैसे बहुत समझदार लगता है !!

करोड़ो वर्ष पुराने आयुर्वेद को गालिया ! और अँग्रेजी ऐलोपैथी को तालिया !!!

विदेशी त्योहार वैलंटाइन मनाने पर गर्व !! स्वामी विवेकानद का जन्मदिन याद नहीं !!!!

दोस्तो macaulay अपनी चाल मे कामयाब हुआ !! और ये सब उसने कैसे किया !!

ये जानने के लिए आप सिर्फ एक बार नीचे दिये गए link पर click करे !!! जरूर जरूर click करे !
https://www.youtube.com/watch?v=jwPuWgVuVwU

वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम वन्देमातरम !!!

गर्भ निरोधन तकनीक से महिलाओं को uterus मे cancer हो सकता हे

 मित्रो कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं !(Contraceptive)
कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं !
जैसे norplant,depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !

और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है ! ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन भारत मे लाकर बेच रही हैं !

जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधन के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं !

ये injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है !

कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और depo provera का injection लगा दिया ! जिससे उनको cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई !

इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है ! steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !

इसकी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है ! फिर एक यू क ले फ नाम की एक है फिर एक norplant है ! फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं ! उससे uterus की मांस पेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है ! और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई मताए बहने बिहोश हो जाती है ! लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये contraceptive दिया गया जिसके कारण से ये हुआ है ! और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये contraceptive बेच कर की जाती हैं !

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इसके इलवा अभी 3 -4 साल मे कंडोम का व्यपार विदेशी कंपनियो दावरा बहुत बढ़ गया है !! और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है !AIDS का बहाना लेकर TV मे अखबारो मे मैगजीनो मे एक ही बात क विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो !
ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो ! ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ !! वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ , बहन बेटी के साथ करो ,बस कंडोम का इस्तेमाल करो !! और इसका परिणाम पात क्या हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं ! 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी !
और इन कंपनियो का target ये है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए !!

और सरकार भी इस गलत कम मे AIDS का बहाना लेकर इनके साथ मिल गई है !
हमारे देश मे हर दिन कैंसर से ओसतन(avg) 1500 लोग मरते है !
सरकार को कोई चिंता नहीं

दमा , अस्थमा ,ट्यूबर क्लोसिस लगभग 1200 लोग रोज मरते हैं
सरकार को कोई चिंता नहीं

heart attack से हर दिन 800 से 1000 लोग मरते हैं !
सरकार को कोई चिंता नहीं !

क्या सरकार को सिर्फ AIDS की ही चिंता है ???? नहीं उनको कंपनियो का कंडोम अधिक से अधिक बिकवाना है !! किसी भी माँ,बहन के साथ करो ये संदेश हर युवा तक पहुंचाना है ! और भारतीय संस्कृति को नष्ट कर भारत को अमेरिका बनाना है !

https://www.youtube.com/watch?v=chl6QRAAKtU