ब्रह्मचर्य क्या है Brahmacharya Benefits Hindi

ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें

ब्रह्मचर्य व्रत का पालन सब मनुष्यों के लिए आवश्यक है छात्रों को तो विशेष रूप से इसका पालन करना चाहिए

ब्रह्मचर्य brahmacharya benefits

प्राचीन काल में ब्रह्मचर्य पूर्वक विद्याध्ययन होता था पढ़ने पढ़ाने की व्यवस्था आजकल के समान भोग-विलास के वातावरण में नहीं होती थी बाल्यकाल में यानी कि पांचवें छठे या आठवीं वर्ष में पिता अपने बच्चों को गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते थे

जब छात्र पढ़ने के उद्देश्य से आचार्य के समीप आ जाता है तब वो अंतेवासी कहलाता है आचार्य जी उसका उपनयन करके उसे दीक्षा देकर गुरुकुल में ही रखता है

ब्रह्मचारी भी गुरुकुल में रहता हुआ ज्ञानार्जन में तत्पर रहता है जैसे माता के घर में स्थित प्राणी के शरीर के अवयव समय पर पुष्ट हो जाते हैं उसी प्रकार गुरुकुल में रहते हुए ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए छात्र के अज्ञान अंधकार को हटाकर आधिदैविक आधिभौतिक और आध्यात्मिक विद्याओं में प्रवीणता तथा आत्मा का विकास हो जाता है

इस प्रकार गुरु से दीक्षा पाकर ब्रम्हचर्य के तरफ से दबा हुआ ब्रह्मचारी जब कार्य क्षेत्र में आता है तब वह विषय वासनाओं में नहीं फंस सकता जैसे आज-कल विषय वासना में फंसे हुए भ्रष्टाचारी लोगों का हाल दिखता है ब्रम्हचर्य के बिना विद्याध्ययन केवल हास्यास्पद ही होता है विद्या अध्ययन के लिए समरण शक्ति आवश्यक है और ब्रह्मचर्य के नाश हो जाने पर स्मरण शक्ति कहां रहेगी यदि समरण शक्ति ना रहेगी तो विद्याध्ययन कैसा होगा?

ब्रम्हचर्य के पालन से ही मेहंदी शक्ति संचित हो जाती है ब्रम्हचर्य के तेल से भीष्म पितामह ने महाभारत के युद्ध में अद्भुत कौशल दिखाया था इसी के प्रताप से हनुमान ने समुद्र को लगा था परशुराम ने 21 बार धरती क्षत्रियों से सुनने की थी और वर्तमान युग में ब्रह्मचर्य के बल से ही महर्षि दयानंद वैदिक धर्म का प्रचार कर के अंधकार से गिरे हुए देश को प्रकाशित किया

विद्याध्ययन के समय ब्रम्हचर्य को सदा यह दोष छोड़ देना चाहिए

आलस्य,मद, मोह, गप्पे, चंचलता अभिमान और संग्रह करना विद्यार्थियों के यह  सात दोष माने गए हैं विद्यार्थी को विद्या कहां? विद्यार्थी को सुख कहां? या तो सुखार्थी विद्या को छोड़ दें या विद्यार्थी सुख को छोड़ दें

ब्रम्हचर्य का पालन करने से ही सब आश्रम सुखी हो सकते हैं ब्रहमचर्य ही सब आश्रमों का मूल है यदि ब्रम्हचर्य नहीं होगा तो सब नष्ट हुए के समान हैं यदि मूल ही नहीं तो शाखाएं कहां से होगी यदि मूल मजबूत है तो शाखा और पुष्प आदि अधिक मात्रा में होंगे

Brahmacharya रक्षा के उपाय बच्चों के लिए

यह बड़े दुख की बात है कि आजकल ब्रम्हचर्य का नाश करने वाले बहुत से साधन व्यवहार में आ रहे हैं

उनमें ऊपर से मनोहर दिखने वाले श्रृंगार रस से भरपूर सिनेमा कच्ची आयु में छात्रों को देखने को मिलते हैं तथा अंय अभी चित्र को लुभाने वाले ब्रम्हचर्य के घातक अनेक पदार्थ भोजन सामग्री में मिलते हैं इन्हीं कारणों से छात्रों की उन्नति नहीं हो पाती जिसका ब्रह्मचारी नष्ट हो जाता है उनके मुख मल इन गाल पिचके हुए तथा रोगआक्रांत होते हैं  ब्रह्मचर्य के नाश्ते छात्र विद्याध्ययन से विरक्त तथा उद्विग्न हो जाते हैं

शिक्षा-  इसलिए जो छात्र अपना कल्याण चाहते हैं उन्हें ब्रम्हचर्य का नाश करने वाले  विघ्नों से अपने को सदा बचाना चाहिए

how to practice brahmacharya,brahmacharya power,brahmacharya diet,brahmacharya benefits,brahmacharya ashram,brahmacharya yoga,brahmacharya pdf,brahmacharya meaning in hindi,

Follow Us On Bharat Yogi On Youtube

Follow Us On Bharat Yogi On Facebook

Leave a Reply