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Yagya Therapy A Powerful Natural Cancer Treatment

Yagya Therapy A Powerful pollution Treatment
yagya therapy अग्निहोत्र से होने वाले लाभों की सूची अनन्त है। वायु शुद्धि, आरोग्य, दीर्घायु, वर्षा, दूध, अत्र, धन, बल, ऐश्वर्य, सन्तान, पुष्टि, निष्पापत्व, सच्चरित्रत्ता, यश, तेजस्विता, suvichar सदविचार , सत्कर्म, आनन्द तथा  मोक्ष की प्राप्ति में यह अग्निहोत्र बहुत ही सहायक होता है।
yagya therapy से कुछ लाभ सुगन्धित और रोगनाशक ओषधियों की आहुति देने से प्रत्यक्ष दीखते हैं और कुछ परमात्मा के गुणों का चिन्तन करने से प्राप्त होते हैं।
स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने अपने वेदभाष्यों में अग्निहोत्र yagya therapy के महत्व पर बहुत प्रकाश डाला है।
  • ”जब अग्नि में सुगनिघत पदार्थों का हवन होता है, तभी यह यज्ञ वायु आदि पदार्थों को शुद्ध करके तथा शरीर और ओषधि आदि पदार्थों की रक्षा करके अनेक प्रकार के रसों को उत्पन्न करता है। उन शुद्ध पदार्थों के भोग से प्राणियों के विद्या, ज्ञान और बल की विर्धि होती है।”
  • yagya therapy में जो यज्ञ के धूम से शुद्ध हुए पवन हैं, वे अच्छे राज्य के कराने वाले होकर रोग आदि दोषों का नाश करते हैं और जो अशुद्ध अर्थात् दुर्गन्ध आदि दोषों से भरे हुए हैं वें सुखों का नाश करते हैं। इससे मनुष्यों को चाहिए कि अग्नि में होम द्वारा वायु की शुद्धि से अनेक प्रकार के सुखों को सिद्ध करें।
  • मनुष्यों को योग्य है कि yagya therapy यज्ञविधि से सब पदार्थों का अच्छे प्रकार शोधन करके, सबका सेवन कर और रोगों का निवारण करके सदैव सुखी रहैं।
  • ”यदि यजमान और यज्ञ करने वाले विदवान हों और सुशोभित द्रव्यों को अग्नि में होंम करें, तो क्या क्या सुख प्राप्त न हों”
  • “मनुष्यों को चाहिए कि वे विद्वानों के संग धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि करने वाले यज्ञ का विस्तार करें।”
  • “जो यज्ञ yagya therapy से शुद्ध किये हुए अत्र, जल और पवन आदि पदार्थ हैं वे सबकी शुद्धि, बल, पराक्रम और दीर्घ आयु के लिए समर्थ होते हैं। इससे सब मनुष्यों को यज्ञकर्म का अनुष्ठान नित्य करना चाहिए।”
  • yagya therapy के द्वारा “मनुष्य अग्नि में जो आहुति देते हैँ, वह वायु के साथ बादलो में जाकर सूर्य से आकर्षित जल को शुद्ध करती है! फिर वहाँ से वह जल पृथ्वी पर आकर औषधियों को पुष्ट करता है। (yagya therapy) यज्ञ में आहुति सदेव मन्त्रों के साथ ही देनी चाहिए जिससे उसके फल-ज्ञान होने पर नित्य श्रद्धा उत्पन्न हो।”
  • जिस यज्ञ (yagya therapy) से सब सुख हौते हैं, उसका अनुष्ठान सब मनुष्यों को क्यो न करना चाहिए?”
  • “जो मनुष्य अग्निहोत्र आदि यज्ञों को प्रतिदिन करते हैं, वे समस्त संसार के सुखों को बढाते हैं, पुरे संसार का भला करते हैं यह जानना चाहिए।”
  • “होम-नामक यज्ञ वह है, जिसमें मांस, क्षार, अम्ल, तिक्त आदि गुणों से रहित, किन्तु सुगन्धित, पुष्ठ, मिष्ट, रोगनाशक आदि गुणों से युक्त हो।”
  • “जो मनुष्य यज्ञ (yagya therapy) से शुद्ध किये जल, औषधि, पवन, अत्र, पत्र, पुष्प, फल, रस, कन्द अर्थात् अरबी, आलू, कमेरू, रतालू, शकरकन्द आदि पदार्थों का भोजन करते हैं वे नीरोग होकर बुद्धि, बल, आरोग्य और दीर्घायु वाले होते हैं।”
  • “मनुष्य नित्य सुगन्धियुक्त पदार्थों को अग्नि में छोड़ हवन करे , पवन और सूर्य की किरणों द्वारा वनस्पति, ओषधि, मूल, शाखा, पुष्प, और फलादिकों में प्रवेश कराके सब पदार्थों की शुद्धि कर आरोग्य की सिद्धि करें।”
  • “मनुष्यों को चाहिए कि जीवनपर्यंत शरीर, प्राण, अन्त:करण, दशों इन्द्रियाँ और जो सबसे उत्तम सामग्री हो उसको यज्ञ के लिए समर्पित करें , जिससे पापरहित कृतकृत्य होकर परमात्मा को प्राप्त होकर इस जन्म और द्वितीय जन्म में सुख को प्राप्त होवें।”
  • “हे मनुष्यों! सब यज्ञों मैं अग्नि आदि को ही पशु जानो। प्राणी इन यज्ञों में मारने योग्य नहीं न होम के योग्य हैं। जो यज्ञ में पशुओं की बली देते हैं वो व्येक्ती माहापाप के भागी हैं, जो ऐसा जानकर सुगन्धित द्रव्यों को अग्नि में होम करते हैं, और जो वायु शुद्ध हुई सुगन्धित हुई वो सूर्यं को प्राप्त होकर वर्षा द्वारा वहाँ से लोटकर औषधि, प्राण, शरीर और बुद्धि आदि को बल देते हैं।
इस यज्ञ (yagya therapy) के अनेकों लाभ होने के कारण वेदों में इसका बारम्बार उल्लेख आता है। चारों वेदों में यह “यज्ञ” शब्द 11184 बार आया है। ऋग्वेद के 10/11/2 मन्त्र- “ओउम् मृत्यो: पदं योपयन्तो यज्ञियांस “ यही बतलाता है कि यदि आप मृत्यु से बचकर स्वस्थ दीर्घायु चाहते हैं, धन, समृद्धि एवं सुसन्तान वाला होना चाहते हैं तो आप लोग यज्ञ करें एवं अपने जीवन को पवित्र करें।
आपने ये लेख पढ़ा आपका धन्यवाद
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