shekh chilli ki kahani in hindi stories

shekh chilli  शेखचिल्ली की कल्पना

shekh chilli ki comedy in hindi


shekh chilli ki kahani

हिंदी कहानियों में shekh chilli की मुर्खता का कोई मुकाबला नही और ये काहानियाँ हमे हंसा हंसा कर लोट पोट कर देती हैं इसलिय दोस्तों shekh chilli की काहनी पढ़िए और आप भी लोट पोट हो जाइए।
 
एक shekh chilli साहब एक स्टेशन पर रहा करते थे। shekh chilli हमेसा अपने ही ख्यालों की दुनिया में खोए रहते थे। एक दिन एक मियाँजी रेल से भारी घडा लेकर उतरे और किसी सामान ढोने वाले को खोजने लगे तभी उनकी नजर एक व्येक्ती पर पड़ी उन्होंने उस आदमी यानी की शेखचिल्ली से कहा…”
 
अबे इस घडे को शहर ले चलेगा?” shekh chilli ने कहा-“हॉ हुजूरा ” 
 
मियाँ ने कहा…”दो पैसे मिलेंगे। shekh chilli ने कहा…”दो ही देना। “और मियां ने शेखचिल्ली के सिऱ पर घड़ा रखवादिया और आगे-आगे स्वयं और पीछे-पोछे शेखचिल्ली चलने लगा।
 
अब शेखचिल्ली की मनसूबेबाजी देखिए। शेखचिल्ली अपनी ही कल्पनाओं के संसार में खोजाता है और सोचने लगता है
 
“इस घड़े को शहर में पोहचाने पर मुझे दो पैसे मिलेंगे। और में उन दो पैसों की एक मुर्गी लूँगा। और जब मुर्गी के अन्डे से बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर बकरी लूँगा। जब बकरी के बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर गौमाता लूँगा जब गऊ के बछड़े. होंगे, तो उन्हें बेचकर एक भैंस लूँगा। 
 
जब भैंस के बच्चे होंगे, तो उन्हें बेचकर अपनी शादी करवाऊंगा। और फिर मेरे भी बच्चे होंगे, और बच्चे मुझसे कहैंगे कि बापू हमको फलाँ चीज ले दो. हम कहेंगे धत बदमाशा ” इस शब्द के जोर से कहने पर सिर से घड़ा गिर गया और गिरकर फूट गया।
 
यह देख मियाँजी बोले “अबे मुर्ख तूने यह क्या किया; मेरा ये कीमती घडा घडा क्यों फोड़ दिया ?” शेखचिल्ली ने काहा अजी मियाँ, आपको तो घडे की पडी है, यहॉ तो मेरा बसा बसाया घर ही उजड़ गया।”
 
शिक्षा – व्यर्थ की कल्पनाओं से बचो। कल्पनाएँ मनुष्य को मानसिक रोगी बनाती हैं।