महर्षि दयानन्द नें “गायत्री- मन्त्र को ‘महामन्त्र’ का नाम’ दिया है।

Gayatri mantra
 
गायत्री वेदों का सार-
वेदों के लगभग बीस हजार मन्त्रों में शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति का ही व्याख्यान है। परन्तु यह एक अकाट्य सत्य है कि जहाँ वेदों के सारे ही मन्त्र कोई-न’-कोई विशेषता रखते हैं, वहाँ वेदों का गायत्री-मन्त्र विशेष विशेषता से भी बढ़ गया है, क्योंकि इसके अन्दर ज्ञान, कर्म, उपासना तीनों ही तथ्य विघमान हैं।
 
इसीलिए महर्षि दयानन्द नें “गायत्री- मन्त्र को ‘महामन्त्र’ का नाम’ दिया है। महा योगी योगेश्वर शिव ने गायत्री का नाम ‘कामधेनु’ रखा है, ओर समस्त यौगिक साधनों का मूलाधार भी गायत्री ही को बतलाया है। यही नहीं, शिवजी महाराज ने “गायत्री-मंजरी’ में यह भी आदेश दिया है। कि ‘कलियुग में गायत्री मन्त्र के द्वारा ही सर्वश्रेष्ठ सिद्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। श्रंगी ऋषि ने गायत्री को “मोक्ष का मूल कारण’ काहा है।
 

वेदों के लगभग बीस हजार मन्त्रों में शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति का ही व्याख्यान है। इसके अन्दर ज्ञान, कर्म, उपासना तीनों ही तथ्य विघमान हैं। इसीलिए महर्षि दयानन्द नें “गायत्री- मन्त्र को ‘महामन्त्र’ का नाम’ दिया है।

व्यास मुनि “गायत्री तथा ब्रहा’ में कोई भिन्नता नहीं समझते भगवान् मनु ने गायत्री को ब्रहा का मुख (द्वार) लिखा है । प्रजापति ने गायत्री के पहले ही पाद से तीनों लोकों का वैभव प्राप्त कर लेने की घोषणा की है । श्री शंकराचार्य जी ने गायत्री को जगत् की माता कहा है। विदेह जनक महाराज ने बुडिल को बतलाया कि गायत्रीविद बहुत-सा पाप भी यदि करता रहा हो तो वह उस पाप को जलाकर शुद्ध-पवित्र हो जाता है। 
 
भीष्म पितामह ने ‘महाभारत’ के अनुशासन’- पर्व में कहा है…”जहाँ गायत्री-जप होता है, वहाँ बालक मरते नहीं; वहाँ अग्नि हानि नहीं पहुँचाती ; वहाँ गौएँ दूध अधिक देती हैं। गायत्री सर्वभूतों का ह्रदय है। यह सर्वश्रेष्ट श्रुति है। चन्द्रवंशीय सूर्यवंशीय तथा कुरुवंशीय, सब-के-सब, प्राणियों की गति परम पवित्र इसी’सावित्री (गायत्री) का ही पाठ करते हैं ।’ इसी गायत्री-मन्त्र का जप नित्य-प्रति योगिराज श्री कृष्णा शुद्ध-पवित्र होकर मौन रहकर किया करते थे । देवी-भागवत में गायत्री-जप को ही सनातन बतलाया है । और स्वयं परमात्मा ने अथर्ववेद में यह आदेश किया है कि गायत्री “वेदमाता है वरों को देने वाली है आयु, स्वास्थ्य, सन्तान, धन, अन्न, पशु, वैभव, यश देनेवाली है और परमात्मा के दर्शन करानेवाली है।
 
यही कारण है कि इसे गुरुमन्त्र कहकर शेष सारे मन्त्रों से विशेषता दे दी गई है। चाहते हैं सुख, मिलता है दु:ख ! आज की दुनिया हो या पहले युगों की दुनिया, हर काल हर स्थान और हर समय का मानव चाहता है कि उसको इस जीवन में कोई दुःख न हो, और यदि दुसरा ज़न्म मिलनेवाला है, तो उसमें भी वह सुखी ही रहे। सारी दुनिया सुख और शान्ति की खोज में दुखित ओर अशान्त हो रही है परन्तु सुख-प्राप्ति के जितने अधिक यत्न होते हैं, दुनिया उतनी अधिक” दुखी होती चली जा रही है। 
 
जब पूरे यत्न, पूरी बुद्धिमता से किसी`रोगी का इलाज़ हो रहा हो, ओर वह रोग कम होने की अपेक्षा बढता चला जा रहा हो, तो यही कहना पडेगा कि इलाज ठीक नहीं हो रहा है। जब यह प्रत्यक्ष है कि आधूनिक काल की रोगी दुनिया को नाना योजनाओं, नाना सम्मेलनों, नाना प्रयत्नों द्वारा भी नीरोग नहीं बनाया जा सका तो सर्वसाधारण यही कहेंगे कि ये सारे यत्न सर्वथा उलटे परिणाम उत्पन्न करनेवाले हैं।
 
ऐसा कहना सर्वथा इतिहास को झुठलाना है कि ‘जितनी भौतिक उन्नति आज दुनिया के लोगों ने की है, पहले इतनी कभी नहीं हुई भारतीय इतिहास इस सत्य का साक्षी है कि प्राचीन काल में जितने सुंदर अदभुत आविष्कार हो चूके हैं, उनका 1 प्रतिशत भाग भी आज दुनिया को अभी प्राप्त नहीं हुआ; परन्तु प्राचीन काल में जितनी भौतिक उन्नति हुई उसका प्रयोग केवल मानव-शरीर को सुखी बनाने या नाश करने के लिए नहीं हुआ, अपितु आत्मा और ज्ञान के लिए हुआ, इसीलिए प्राचीन काल की भौतिक उन्नति ने उन लोगों को दुखी नहीं किया । पर आज की दुनिया के आविषकारों ने मानव को अधिक दुखी कर दिया है
 
हमारे पूर्वजों को वेद द्वारा यह ज्ञान प्राप्त था कि वह कौन-सा साधन है जिसके द्वारा इस लोक के सारे वैभवों का मनुष्य आनंद ले सकता है ओर साथ ही आत्मा को’ मोक्ष का आनन्द भी प्राप्त करा सकता है । यही नहीं, इसी मानव जीवन में… प्रकृति के सारे रूपों, सारे स्वादों और सारे आविष्कारों से लाभ उठाते हुए भी मन तथा चित्त शान्ति से भरपूर, सन्तोष ओर प्रसन्नता के रंग में रंगा रह सकता है। यह हुनर, यह अदृभुत ज्ञान वैदिक काल के मनुष्यों ही के पास था। आज का मानव इसे अभी तक जान नहीं पाया। यही कारण है कि आज भू-लोक के किसी भी देश या प्रदेश में वास्तविक शान्ति, संतोष ओर प्रसन्नता दिखाई नहीं देती। इसके विपरीत हाहाकार, रुदन, अशान्ति ओर तडप ही देखी जा रही है।