नपुसंकता कारण और आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेदिक नुस्खों द्वारा नपुसंकता का इलाज

नपुंसकता (impotence) के मुख्यत: दो कारण है शारीरिक और मानसिक। शारीरिक नपुंसकता कीं चर्चा हम बाद में करेंगे पहले इसके मानसिक कारणों पर विचार करते है। आधुनिक युग में मनुष्य चिंता और तनाव में अधिक जीता है। कई बार संभोग के संपादन के समय भी वह इन बेकार की चिंताओं से मुक्त नहीं हो पाता। ऐसी अवस्था में जब संभोग किया जाता है, तो या तो शिश्न में वांछित दृढता नहीं आ पाती या अगर आती भी है तो वह अवस्था क्षणिक होती है और व्यक्ति शीघ्रपतन का शिकार हो जाता है। शिश्न में पूर्ण दृढता के लिये नसे, रक्त प्रवाह की धमनियों और शिराओं, हार्मोंन्स, माँसपेशियों तथा मस्तिष्क-इन सबका एक सुर और ताल में कार्य करना जरूरी है। एक का भी सुर बिगडा नहीं कि संभोग का संगीत बेसुरा हो जाता है।

 

आपके सहयोगी का भी संभोग के लिये तैयार होना जरूरी है। अगर आप तैयार है ओर वह तैयार नहीं है तो भी आपके सुर – ताल में गडबड आ सकती है क्योंकि संभोग-का अर्थ ही है- सम+भोग अर्थात् जिसे दोनों ने समान रूप से भोगा हो दोनों की मानसिक तैयारी के अलावा वातावरण भी आवश्क है। यदि एकांत नही है, देखने या सुनने का भय है, किसी तरह की आहट हो रही है, तो भी सभोग के सुख में कमी आसक्ति है। कई बार मानसिक तनाव या चिंता की अवस्था में व्यक्ति सभोग का प्रयास करता है। और जब उसमें उसे पूरी सफलता नहीं मिल पाती तो एक नई चिंता उसे घेर लेती है। वह नपुसंकता के अज्ञात भय से पीडित हो जाता है और फिर इसका एक सिलसिला- सा चल पडता है।

 

जब भी संभोग का प्रयास करता है यह अज्ञात भय उस पर हावी होने लगता है कि मुझे सफलता मिलेगी या नहीं। इस तरह के विचार उसे घेर लेते हैं और उसकी परिणिति होती है शीघ्रपतन या नपुसंकता में । इस वजह से शिश्न में पर्याप्त दृढता नहीं आ पाती । हमारे शरीर की रचना प्रकृति का सबसे बडा कमाल है । शिश्न में स्पंज जैसी दो नलिकायें होती हैं। जब हम संभोग के लिए स्वयं को तैयार पाते है तो इन नलिकाओ की ओर रक्तप्रवाह बढता है और ये रक्त से भर जाती है; ड्सके परिणामस्वरूप ही शिश्न में दृढता आती है। लेकिन इस दृढता के लिए जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है सभी सुरों का एक लय में होना आवश्यक है।

 

यह तो हुआ नपुंसकता का मानसिक कारण अब जरा शारीरिक कारणों पर चर्चा यह अधिकतर देखा गया है नपुसंकता के 50% मामलों में कोई शारीरिक विकृति इसका कारण पाई गई है, जेसे… कोई बिमारी, आपरेशन, दुर्घटना, हस्तमैथुन हारमोंस की गडबडी या कुछ दवाओ का कुप्रभाव।

 

शक्कर की बीमारी (डायबिटीज) – मधुमेह (शुगर) की बीमारी भी नपुंसकता का एक कारण है । जिस प्रकार मधुमेह की बीमारी पैरों में न भरने वाले घाव, किडनी, आँखों को खराब करती है उसी प्रकार रक्तवाहिनियों और नसों को प्रभावित कर नपुंसक्ता उत्पत्र कर सकती है।

 

हृदय ओर रक्तवाहिनियों की बीमारियाँ- एक मुख्य कारण है रक्तवाहिनियों की दीवारों का मोटा होना जिससे कि शिश्न में रक्तप्रवाह कम हो जाता है और यह नपुंसकता का कारण बनता है। एथेरो एसक्लेरोसिस का मुख्य कारण अधिक चिकनाई (घी,तेल) युक्त भोजन और व्यायाम की कमी होता है। अन्य किसी भी कारण से (जैसे रक्तवाहिनियों में थक्का जमना, रक्तवाहिनियों का पैदाइशी खोट इत्यादि) रक्त प्रवाह कम हो तो नपुंसकता हो सकती है।

 

अगर शिराओं की खराबी हो तो वे संभोग के समय रक्त को शिश्न में नहीं रोक पाती है और दृढता नहीं आ पाती है। उच्च रक्त दाब (हाई ब्लड प्रेशर) और इसके इलाज के लिये प्रयुक्त दवाइयाँ भी नपुंसकता उत्पत्र का सक्ती है।

 

शराब – शराब हार्मोंन्स की गडबडी कर सकती है। शराब नसों को भी खराब करती हैं मगर इस तरह की नपुंसकता उचित समय पर रोक ली जाये तो पुरुष पूर्णतया सामान्य हो सकता है।

 

धूम्रपान एवं तंबाकू- सिगरेट, बीडी, हुक्का या गुटका किसी भी प्रकार से तंबाकू का सेवन स्वत प्रवाह में अवरोध उत्पन्न कर नपुंसकता पेदा कर सकता है।

 

लीवर या किडनी का खराब होना- आपरेशन – पेट के निचले हिस्से के आपरेशन (जैसे कि कैंसर के आपरेशन) प्रोस्टेट, रेक्टम या मूत्राशय पर इस प्रकार के आँपरेशन में यदि नसों या वाहिनियों मे किसी प्रकार का अवरोध आजाये तो नपुंसकता आ सकती है।

 

स्पाइनल कोर्ड (मेरुदंड की नसें) में चोट के फलस्वरूप-मेरुदण्ड की नसों में चोट के कारण भी नपुंसकता हो सकती हैं। कई प्रकार की दवाइयों के प्रतिकूल प्रभाव के रूप में नपुंसकता हो जाती है । इसका भी उचित उपचार संभव है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा नपुंसकता का निदान बहुत आसान हो गया है।

 

यह प्रत्येक मरीज पर निर्भर करता है कि किस प्रकार की जांच की जरूरत है, पर रक्त के प्रवाह, रक्त के अवरोध, शिश्न की बनावट और मानसिक नपुंसकता का विभित्र जांचों के द्वारा मालूम किया जा सकता है।

 

 

  • मेडिक्ल हिस्ट्री
  • सेक्स की हिस्ट्री
  • सामान्य शारीरिक जाँच
  • मानसिक जानकारी

 

खून की जाँच

 

 

  • ब्लड शूगर जांच (डायबिटीज के लिये)
  • लीवर और किडनी की जानकारी के लिये जांच
  • हारमोंस

 

रात को इन्द्रियों में सोते वक्त परिवर्तन की जानकारी रक्त प्रवाह की जानकारी

सिगरेट- यौन शक्ति पर विपरीत प्रभाव- नियमित रूपसे 10 सिगरेट या अथिक 6 12 माह तक पीने से योन शक्ति में कमी हो जाती है।

नपुंसकता का इलाज- नपुंसकता का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि नपुंसकता का कारण क्या है? फिर उसी के अनुसार चिकित्सा की जाए।

 

धुम्रपान- अधेड उम्र में धूम्रपान, चर्बीयुक्त भोजन करने से नपुंसकता आ जाती है।

 

आम- दो तीन माह आम का अमरस पीने से मर्दाना ताकत आती है । शरीर की कमजोरी दूऱ होती है। शरीर मोटा होता है। बात संस्थान (Nervous System) और काम शक्ति को उत्तेजना मिलती है।

 

नारियल- नारियल कामोत्तेजक है। वीर्यं को गाढा करता है।

 

गाजर- गाजर हर व्यक्ति के लिए शक्तिवर्धक (Tonic) है। वीर्य को गाढा करती है। मर्दाना कमजोरी को दूर करने में रामबाण है। गाजर का रस पीना चाहिए।

 

प्याज- प्याज कामवासना को जगाता है। वीर्य को उत्पत्र करता है। देर तक मैथुन करने की शक्ति देता है। ईरानी नागरिक याह्या अली अकार बेग नूरी ने 88 वर्ष की आयु में 168? विवाह किये। इस आयु तक उसकी जवानी बरकरार रहने का कारण है, उसका एक किलो कच्चा प्याज खाना।

 

मर्दाना शक्ति बढाने के लिए प्याज का रस ओर शहद मिलाकर पिये। सफेद प्याज का रस, शहद, अदरक का रस, देशी घी, प्रत्येक 6 ग्राम इन चारों को मिलाकर चाटे एक महीने के सेवन से नामर्द भी मर्द बन सकते हैँ।

 

अनार- प्रतिदिन अनार खाने से पेट मुलायम रहता है तथा कामेन्द्रियों को बल मिलता है

 

छुहारा- शीघ्रपतन ओर पतले वीर्य वालों को छुहारे प्रात: नित्य खाने चाहिएँ, दूध में भिगोकर छुहारा खाने से इसके पौष्टिक गुण बढ जाते हैं।

 

सिगरेट- यौन शक्ति पर विपरीत प्रभाव- नियमित रूपसे 10 सिगरेट या अथिक 6 12 माह तक पीने से योन शक्ति में कमी हो जाती है।

 

चिलगोजे- यह अत्यधिक मर्दाना शक्तिवर्द्धक है। यह 15 नित्य खाएं

 

शहद- शहद और दूध मिलाकर पीने से धातु क्षय में लाभ होता है। शरीर में बल वीर्य की वृद्धि होती है शूक्र-वर्द्धक है । मर्दाना ताकात बढाने के लिए लाभदायक है इससे वीर्य दोष भी दूर होता है।

 

लहसुन-

 

  • (1) 50 ग्राम लहसुन को देशी घी में तलकर प्रतिदिन खाने से नपुंसक्ता नष्ट होती है, कामशक्ति बढती है।
  • (2) प्रात: 5 क्ली लहसुन को चबाकर दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी नियम से करें ।

 

गेहूँ-

 

  • (1) गेहुंको बारह घण्टे पानी में भिगोयें, फिर मोटे कपड़े में बाँधकर चौबीस घण्टे रखे, इस तरह चोबीस में अंकुर निकल आयेंगे। इन अंकुरित गेहुंओ को बिना पकाये ही खायें । स्वाद के लिए गुड या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूँओँ में विटामिन ‘ईं‘ (E) भरपूर मिलता है। नपुसंकता एंव बांझपन में यह लाभकारी है । स्वास्थ्य एवं शक्ति का भण्डार है । केवल सन्तानोत्पत्ति के लिए 25 ग्राम अंकुरित गेहूँ 3 दिन और फिर 3 दिन इतने हो अंकुरित उड़द पर्यायक्रम से खाने चाहिए। यह प्रयोग कुछ महीने करें।
  • (2) 100 ग्राम गेहूँ रात को पानी में भिगो दें। सवेरे उसी पानी में उन्हें पत्थर पर पीसकर लस्सी बना लें। स्वाद के लिए मिसरी मिला लें। एक सप्ताह पीने से पेशाब के साथ वीर्य जाना बन्द हो जाता है।

 

पिस्ता- पिंस्ते में विटामिन ‘ई‘ बहुत होता है। विटामिन ‘ई’ से वीर्य की वृद्धि होती है’

 

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