आम के आठ औषधीय प्रयोग

8 health benefit of mango tree in hindi
परिचय

आम भारतवर्ष (India) एव पूर्वी द्वीप समूह का आदिवासी पौधा है। यह ग्रीष्म जलवायु का वृक्ष है। हिमालय (Himalayas) पर भूटान से कुमायूँ तक इसके जंगली वृक्ष पाये जाते है, सम्पूर्ण भारतवर्ष में इसके वृक्ष लगाये जाते है और फलते फूलते है। आम की अनेक किस्में पाई जाती है. जो पौधे गुठली बोकर उत्पन्न किये जाते है उन्हें देशी या बीजू आम, और जो उन्नत जाति के आम दो वृक्षों की शाखाओं पर कलमें बाँध कर विकसित किये जाते हें। देश स्थान रंग रूप भेद से इसकी अनेकों किस्मे मिलती हें, देसी आम में रस होने के कारण इसका रस पतला होता हे ये चूस कर खाने के काम में आता हे । परन्तु कलमी आम में गुदा अधिक होता हे इसलिए काट कर खाया जाता हे 

रासायनिक संघटन / Chemical composition

आम में अन्य तत्वों के अतिरिक्त विटामिन a, b, c, अधिक मात्रा में पाए जाते हें 


आम के औषधीय प्रयोग 

1:- अतिसार या डायरिया (Diarrhea) :
  • आम की गुठली की गिरी को साढे पाँच ग्राम की मात्रा में 100 ग्राम जल में उबालें। इसमें साढे पाँच ग्राम गिरी को और मिलाकर, दोनों को पीस ले, इसे दिन में 3 बार दही कं साथ सेवन कराये 
  • गुठली की गिरी 1 भाग, बेलगिऱी 1 भाग तथा मिश्री 1 भाग तीनो का चूर्णकर, 3-6 ग्राम की मात्रा में जल कं साथ सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है।
  • गुठली की गिरी, आम की गोंद समभाग लेकर 1 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 , 3 बार सेवन करने से अतिसार मिटता है।


2:- संग्रहणी  : 

  • ताजे मीठे आमों के 50 ग्राम ताजे रस में 20-25 ग्राम मीठा दही तथा एक चम्मच शुठी चूर्ण बुरक कर दिन में दो तीन बार देने से कुछ ही दिन में पुरानी संग्रहणी अवश्य दूर होती है।
3:- हेजा :
  •  हैजे की शुरुआती अवस्था में, 20 ग्राम आम के पत्तों को कुचल कर आधा किलो जल में क्वाथ करें, चोथा भाग शेष रहने पर छानकर गर्म पिलाने सेलाभ होता है।
  • आम का शर्बत या आम का पना बार बार पिलावें।


4:- मधुमेह : 
  • आम की छाया में सुखाये हुये 1 , 1 ग्राम पत्रो को आधा किलो जल में औटावे, चौथाई जल शेष रहने पर प्रात:-सायं पिलाने से कुछ ही दिनों में मधुमेह दूर हो जाता है।

5:- परिणाम शूल : 
  • प्रात: 8 बजे और सायंकाल 4 बजे मीठे पके आमों को इतनी मात्रा में चूसे कि आधा किलो रस पेट में चला जाये. इसके ऊपर 250 ग्राम दूध पीले, पानी बिल्कुल न पीये। एक घंटे बाद उबालकर ठंडा किया हुआ पानी, जरूरत हो तो पीले। दोपहर के भोजन में आम के रस के साथ गेहूँकी रोटी का सेवन करें। इस अवधि में अन्य कोई भोज्य पदार्थ न लें। 1 सप्ताह में आशातीत लाभ होता है।

6:- अण्डकोषवृद्धि : 
  • आम्र वृक्ष की शाखा पर उत्पन गांठ (लकडी में गाँठ बन जाती है) को गोमूत्र में पीसकर लेप करें, और ऊपर से सेंक करने पर वेदनायुक्त अण्डकोषशोथ में लाभ होता है।

7:- भस्मक रोग :  
  • मीठे आम का रस 250 ग्राम, घी 40 ग्राम, खांड 100 ग्राम तीनों को एक साथ मिलाकर सेवन करने से 15 दिन में भस्मक रोग शान्त होता है।

8:- सुजाक एवं प्रमेह :
  • आम की 25 ग्राम ताजी छाल को जौ कूट कर रात्रि में 250 ग्राम जल में भिगों कर प्रात: काल मसल कर छानकर पिलाने से 7 दिन में लाभ होता है।
  • छाया शुष्क आम के पत्तों का चूर्ण प्रात:-सायं ताजे जल के साथ 6-6 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है।

विशेष :
  • आम के खाने कं बाद पाचन सम्बन्धी शिकायत होने पर, 2-3 जामुन खा लें। जामुन में आम को पचाने की तीव्र शक्ति है। जामुन उपलब्ध न होने की दशा में. चुटकी भर नमक और सोंठ पीसकर खा लें।
  • यकृत और जलोदर के रोगी को आम नहीँ खाने चाहिये।
  • आम खाने के बाद, दूध पीना, जामुन खाना, कटहल की गुठली खाना/ सूक्ष्म मात्रा में सोंठ, लवण या सिंकज बीन खाना चाहिये।

  • आम सेवन के बाद दूध पीना चाहिये। जल नहीं पीना चाहिये।