शुक्र ग्रेह (venus)

शुक्र ग्रह रात में आसमान का सबसे चमकीला ग्रह 

शुक्र ग्रह सूर्य से दूसरे नम्बर का (सबसे नज़दीक) ग्रह हे तथा यह सूर्य का एक चक्कर लगाने में 224.7 पृथ्वी दिवस लेता है । रात के समय आसमान में यह चन्द्रमा के बाद सबसे ज्यादा चमकने वाला पिण्ड है । यह सूर्यं से ज्यादा दूर नहीं होता है । शुक्र ग्रह का चमकीलापन अपनी इष्टत्तम् सीमा में सूर्योदय के पहले अथवा सूर्यास्त के बाद पहुँचता हे । इसलिए इसे कभी-कभी प्रात:कालीन स्टार अथवा सांयकालीन स्टार के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है
टेरिस्ट्रियल ग्रह के रूप में कभी-कभी इसे पृथ्वी का सिस्टर ग्रेह भी कहते हें, कारण यह हे कि शुक्र ग्रह और पृथ्वी दोनो में आकार और संरचना में काफी समानताएँ हैं । शुक्र ग्रह अत्यधिक परावर्तक बादलों की अपारदर्शी परत से ढका रहता है तथा इसकी सतह अन्तरिक्ष से दृष्टिगोचर प्रकाश में दिखाई नहीं पड़ती है इसी कारण से यह काफी अर्से तक विचित्रताओं से भरा हुआ विषय जाना जाता रहा । बीसवीं सदी में ग्रहीय विज्ञानं के विकास के बाद इसके अनेक गोपनीय तथ्यों को जाना जा सका । सभी टेरिस्ट्रियल ग्रहों में शुक्र ग्रह का वायुमण्डल सबसे घना है जिसमें अधिकांश रूप से कार्बन डाइआक्साइड होती है तथा इस ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दाब पृथ्वी की सतह के वायुमण्डलीय दाब की तुलना में 90 गुना अधिक है
शुक्र ग्रह की सतह का वृहत रूप में मानचित्रण पिछले बीस सालों में किया गया है । इसकी सतह में ज्वालामुखी परवर्ती कॉफी पायी गयी है तथा इसके कुछ ज्वालामुखी आज़ भी सक्रिय हैं । ऐसा विश्वास किया जाता है कि शुक्र ग्रह “प्लेट टेक्टोनिक्स’ के दोर से कुछ निश्चित अवधियों के बीच से गुजरता है जिसके अन्तर्गत इसके कर्स्ट में परिवर्तन होते रहते हैं ।
शुक्र ग्रह का अंग्रेजी नामकरण रोम की प्यार की देवी वीनस’ के नाम के साथ रखा गया है और इसके साथ ही साथ इसकी सतह के अधिकांश लक्षण पौराणिक महिलाओं के नाम के साथ रखे गये हैं
शुक्र ग्रह की संरचना
शुक्र ग्रह चार टेरिस्ट्रियल ग्रहों में से एक है जिसका अर्थ यह कि पृथ्वी की भाति यह भी चट्टानी भागों से भरा हूआ है । आकार और भार से पृथ्वी के बहुत अधिक समतुल्य होने के कारण इसे पृथ्वी का ‘ट्विन’ भी कहते है । शुक्र ग्रह का व्यास पृथ्वी के व्यास की तुलना में केवल 650 किमी. ही कम तथा इसका भार पृथ्वी के भार का 81.5 प्रतिशत है। इसके बावजूद शुक्र ग्रह की सतह पर परिस्थितियाँ पृथ्वी की सतह की तुलना में भिन्न है तथा इसका कारण इसका सघन कार्बन डाइआंक्साइड का वायुमंडल है।
वायुमंडल
शुक्र ग्रह का वायुमण्डल काफी सघन हैं और इसमें कार्बन डाइआक्साइड बहुतायत मे उपलब्ध है तथा नाइट्रोजन की बहुत अल्प मात्रा है । ग्रह की सतह में दाब का मान पृथ्वी की सतह की तुलना में 90 गुना अधिक होता है । कार्बन डाइआक्साइड की अधिकता एक तीव्र ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ पेदा करती है जो कि उसकी सतह के तापमान को 400•C बढा देता है । इसके कारण शुक्र ग्रह की सतह बुध ग्रह की सतह से भी अधिक गर्म हो जाती है जबकि शुक्र ग्रह की सूर्य से दूरी, सूर्ये-बुध ग्रह की दूरी का लगभग दो गुना है तथा शुक ग्रह में अधिग्रहित सौंर ऊर्जा बुध ग्रह की तुलना में केवल 25 प्रतिशत है

शुक्र ग्रह और पृथ्वी की तुलना
आकार , भार, घनत्व और आयतन की दृष्टि से शुक्र ग्रह और पृथ्वी आपस में काफी मिलते जुलते हैं । अनुमान है कि इन दोनों ग्रहों का निर्माण 4.5 मिलियन वर्ष पहले हुआ होगा । दोनों ग्रहों में सबसे विशाल अन्तर उनके रोटेशन में है । शुक्र ग्रह का अक्षीय झुकाव 177.36 डिग्री जबकी पृथ्वी का 23.5 डिग्री है । इसके अलावा शुक्र ग्रह पूर्व से पश्चिम की और घूमता है जिसके कारण इसमें सूर्योदय पश्चिम दिशा में तथा सूर्यास्त पूर्व दिशा में होता है । पृथ्वी में इसका विपरीत होता है ।