गाँधी ने लगवाया शिवाबानी पर प्रतिबन्ध

गाँधी ने ‘शिवाबानी ‘ जैसी साहित्यिक और ऐतिहासिक रचना  भी प्रतिबन्ध लगवा दिया की उसे लोगों के बीच ना पढ़ा जाए। ‘शिवाबानी ‘ 52 छंदों का एक संग्रह हे जिसमें Shivaji maharaj (छत्रपति शिवाजी महाराज) की प्रशंशा की हे, और इस बात का वर्णन हे की किस प्रकार उन्होंने हिन्दू धर्म और राष्ट्र की रक्षा की। ‘शिवबानी ‘ में एक छन्द हे की यदि शिवाजी न होते तो सारा देश मुसलमान हो जाता-
कुम्भकर्ण असुर अवतारी औरंगजेब,
काशी प्रयाग में दुहाई फेरी रब की ।
तोड़ डाले देवी देव शहर मुहल्लों के,
लाखों मुसलमाँ किये माला तोड़ी सब की ।
‘भूषण’ भणत भाग्यो काशीपति विश्वनाथ ।
और कौन गिनती में भूली गति भव की ।
काशी कर्बला होती मथुरा मदीना होती ।
शिवजी न होते तो सुन्नत होती सब की ।   

यह शिवबानी लाखों के लिए आनन्द और स्फूर्ति का स्त्रोत हे और साहित्य और इतिहास में अधभुत महत्व रखती हे, किन्तु गांधी तो अपनी हिन्दू मुस्लिम एकता की धुन में लगे हुए थे, और इस धये की पूर्ति के लिए हिन्दू संस्कृति, इतिहास और धर्म के दमन के अतिरिक्त उसके सामने कोई सरल मार्ग ना था ।

One thought on “गाँधी ने लगवाया शिवाबानी पर प्रतिबन्ध

  1. dr.mahendrag

    कुछ भी कहो कुछ गलतियां गांधीजी ने भी भावावेश में की कभी कभी वे भी सीधेपन की वजह से दूसरे लोगों के मनोभावों का गलत आकलन कर जाते थे और दूसरे लोग उसका लाभ उठा जाते थे

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