swami dayanand saraswati, जी के प्रति महान लोगों के विचार

1:- swami dayanand saraswati महर्षि दयानन्द जी के उपदेशों ने करोड़ों लोगों को नवजीवन, नवचेतना और नया दृष्टीकोण प्रदान किया हे,

Dr. Rajendra Prasad ( डा राजेन्द्र प्रसाद ( प्रथम राष्ट्रपति)


2:- महर्षि दयानन्द जी स्वाधीनता संग्राम के सर्वप्रथम योद्धा और जाती के रक्षक थे, उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज ने राष्ट्र की महान सेवा की हे और कर रहा हे,

Vir Savarkar (वीर सावरकर)


3:- सन्गठन कार्य, द्रिड़ता , उत्साह और स्मन्व्यात्म्कता की दृष्टी से आर्य समाज की समता कोई नही कर सकता

Netaji Subhas Chandra Bose (नेता जी सुभाषचन्द्र बोस)


4:- स्वामी दयानन्द जी मेरे गुरु हें, मेने संसार में केवल उन्ही को गुरु माना हे, वे मेरे धर्म के पिता हें, और आर्य समाज मेरी धर्म की माता हे,

Punjab Kesari Lala Lajpat Rai (पंजाब केसरी लाला लाजपतराय)


5:- स्वामी दयानन्द एसे प्रकाश के स्तम्भ हें, जिन्होंने असंख्य मनुष्यों को सत्ये का मार्ग दिखलाया हे, में अपने को उनका अनुयाई कहलाने में गर्व अनुभव करता हूँ,

DEVTA SVRUP BHAI PRMANAND (देवता स्वरूप भाई परमानन्द (एम.ए)


6:- में ऋषि दयानन्द जी को अपना राजनितिक गुरु मानता हूँ, मेरी दृष्टी में तो वें महान विप्लववादी नेता और राष्ट्र विधायक थे,

Vitthalbhai Patel (विठ्ठल भाई पटेल)


7:- गाँधी जी राष्ट्र के पिता थे तो महर्षि दयानन्द सरस्वती राष्ट्र के पितामह हें,

अनन्तरशयनम अय्यंगर


8:- दयानन्द! Yoga (योग) विधा शिक्षा के लिए ही तुमने पितृग्रेह को छोड़ा हे, यह तो वेराग्ये का परिचय हे, लेकिन केवल केवल वेराग्ये से ही योग विद्या का लाभ नही होता हे, इसके लिए अभ्याश भी चाहिए, अभ्याश और वेराग्ये के जरिये ही, योग अर्थात चितव्रती का निरोध होता हे,

Swami Shivananda Giri (स्वामी शिवानन्द गिरी, दयानन्द जी के राजयोग के गुरु)


9:- योगेश्वर महर्षि दयानन्द जी अत्यन्त विरक्त थे, तथा उच्कोटी के योगाभ्यासी भी थे, राजयोग पर उनका पूर्ण विश्वाश था,

आचार्य भद्र्काम वर्णी

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