chanakya quotes in hindi – हे केतकी (केवड़े) यघपि तू सर्पो का घर हे

आचार्य चाणक्य कहते हे,  हे केतकी (केवड़े) यघपि तू सर्पो का घर हे, फूलों से भी रहित हे, तुझमें कांटें भी हे, साथ ही टेढ़ी भी हे तू पैदा भी कीचड़ में होती हे तू मिलती भी मुस्किल से हे इतना सब कुछ होने पर भी तू अपने गंधगुण की वजेह से सब प्राणियों की बन्धु बन रही हे, इससे पता चलता हे की एक भी गुण सारे दोषों को धो देता हे  
चाणक्य नीति