Ram Prasad Bismil भारत के महान क्रान्तिकारी की शायरी ( भाग -1)

1:- क्या ही लज्जत है रग-रग से यह आती है सदा,
दम न ले तलवार जब तक जान बिस्मिल में रहे।
2:- बहे बहरे फना में जल्द या रब लाश “बिस्मिल” की। 
की भूखी मछलियाँ हें जोहरे शमशीर कातिल की ।
समझकर फुकना इसकी जरा  ऐ दागे नाकामी ।
बहुत से घर भी हें आबाद इस उजड़े हुए दिलसे ।
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’