education (शिक्षा) के क्षेत्र मे Bharat और India का अंतर:

शिक्षा के क्षेत्र मे भारत और इंडिया का अंतर: @[466243806766675:274:राजीव दीक्षित Rajiv Dixit]---------------------------------------------------------------------------------भारत मे: प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित था, प्रत्येक गाँव मे पाठशाला थी, पड़ने वाले और पड़ाने वालों मे 50% से अधिक शुद्र थे, सेर्जेरी की शिक्षा नाइ जाती के लिए, आर्किटेक्चर की शिक्षा कुम्हार के लिए, इस्पात लकड़ी, उद्योग की शिक्षा लुहार और सुथार जाती, एवं वस्त्र उद्योग की शिक्षा जुलाहा जाती को दी जाती थी|इंडिया मे (मेकोले की शिक्षा नीति): पड़े लिखे कम है, पड़े लिखों मे भी शिक्षित तो बहुत हि कम है, आरक्षण के नाम पर नेता शिक्षा के अन्दर घुसपैठ कर उसका सत्यानाश कर रहे है|--------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: विश्वभर से विद्यार्थी भारत के गुरुकुल मे पड़ने को अपने जीवन का सौभाग्य मानते थे और यहाँ पड़ने के लिए लालायित रहते थे|इंडिया मे: विद्यार्थी विदेश मे पड़ कर गर्व महसूस कर रहे है, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशो मे मार खाकर भी स्वाभिमान शून्य एक भी विद्यार्थी वापस अपने राष्ट्र नहीं लौटा और ना हि वहिष्कार करते है विदेशी शिक्षा का|-------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: गुरु गुरुकुल चलाते थे समाज का सबसे प्रबुद्ध वर्ग उन्हें शिक्षा देता था|इंडिया मे: स्कूलों मे नौकर रखें जाते हैं, जो टीचर का कार्य करते है, नौकर किसी को मालिक बनने का ज्ञान कैसे दे सकता है ? इसलिए यहाँ पड़ा लिखा व्यक्ति मानसिक रूप से गुलाम है नौकरी को हि श्रेष्ट समझता है|---------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: प्रधानमंत्री के पद से भी आचार्य का पड़ अधिक महत्व का माना जाता था (उदः आचार्य चाणक्य) जब आवश्यकता होती थी तो आचार्यो से प्रधानमंत्री बनने के लिए निबेदन होता था|इंडिया मे: शिक्षक अब टीचर हो गए है और पद भी मामूली, एक शिक्षक राष्ट्रपति बन जाता है तो उसे शिक्षक दिवस के रूप मे याद किया जाता है|--------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: पात्रता के आधार पर शिक्षा दी जाती थी, यह पात्रता सत्य-रज-तम और बात-पित्त-कफ के आधार पर तय होती थी और भारत का शिक्षक बिकाऊ नही होता था|इंडिया मे: शिक्षा पात्र-कुपात्र मे भेद के बिना, इंडिया का शिक्षित बिकाऊ है, अमिताभ, शाहरुख़ खान, आमिर खान, दारासिंह जैसे इंडिया के प्रिय भांड धन के लिए उनके चाहने वालों को जहर बेचने से भी नही हिचकते है कोई कोला बेच रहा है तो कोई अंडे खाने का प्रचार कर रहा है तो कोई मांस खाने के फायदे गिना रहा है|-------------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: शिक्षा के बदले मे गुरुदक्षिना दी जाती थी, यहाँ गुरु शिष्य संबंध प्रमुख था, धन गौण होता था|इंडिया मे: पैसे के बदले मे शिक्षा दी जाती है, रोज के ७०-८० करोड़ रूपए के विज्ञापन कमाई करने के लिए छपते है, गुरु शिष्य संबंध गौण है|--------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: समाज की प्रगति के लिए शिक्षा दी जाती है|इंडिया मे: कंपनियों के प्रगति के लिए शिक्षा दी जाती है, शेक्षिक काल खत्म होते हि कंपनियाँ इन पड़े लिखे पशुओं को खरीदने पोहुँच जाती है, और बोली लगाती है|----------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: गुरुकुल में सदाचार सम्पन्न आचार्यों से ब्रह्मचर्य धारण कर शिक्षा ग्रहण करते है|इंडिया मे: घर के भोगमय बातावरण, या हॉस्टल के कमरे की दीवारें भांडो की तस्वीरों से ढकी रहती है या शाम को फिल्म और मजे करना, यही मूल उदेश्य है|----------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: प्राकृतिक वातावरण मे ज्ञान की साधना होती है|इंडिया मे: अप्राकृतिक वातावरण में नर्सरी, किंडर गार्डन खोले जाते है, किताबों से गाय, बकरी, फुल, फल, सूर्य, चद्रमा समझाए जाते है इस ‘सेकंड-हैण्ड’ जानकारी को ज्ञान कहते है, और पेड़ के निचे बैठकर शिक्षा को सुविधाओं का और पिछड़ेपन का प्रतिक माना जाता है|----------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: गुरु केन्द्रित के साथ हि शिष्य केन्द्रित शिक्षा पद्धति थी|indiaइंडिया मे: केवल विषय केन्द्रित शिक्षा पद्धति|-----------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: पुरुषो को समाज की प्रगति की और स्त्रियों को प्रगति को स्थिरता प्रदान करने की शिक्षा दी जाती थी जैसे चलते समय एक पैर स्थिर रहता है|indiइंडिया मे: दोनों को एक सी शिक्षा दी जाती है जैसे दोनों पैर एक साथ बढाने पर जो दुर्गति होती है वैसे हि गति हो रही है|----------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: भारत मे शिक्षा आधारित परीक्षा होती थी|indiaइंडिया मे: यहाँ परीक्षा आधारित शिक्षा होती है|--------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: भारतीय शिक्षा का मनोविज्ञान त्रिगुण (सत्व-रज-तम) और प्रकृति (वात-पित्त-कफ) पर आधारित था – सत्य गुण का विकास, रजोगुण का नियंत्रण और तमोगुण का दमन शिक्षा के द्वारा साधा जाता था|इंडिया मे: इंडिया की शिक्षा का मनोविज्ञान व्यवहार पर आधारित है|-------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: प्रारम्भिक स्तर पर अपने आसपास की प्रकृति को समझने की शिक्षा दी जाती है|इंडिया मे: प्रारम्भिक स्तर पर देशी विदेशी पृथ्वी आकाश पाताल सबका भूगोल पड़ाया जाता है लेकिन दैनिक जीवन मे सर्वाधिक उपयोगी गाँव व जिले का भूगोल नहीं पड़ाया जाता है|--------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: आज की तरह इतिहास की शिक्षा नहीं होती, लेकिन लोगों को अपने पूर्वजों के बारे मे ज्ञान था|इंडिया मे: अंग्रेजो द्वारा भारत के स्वाभिमान को भंग करने के लिए लिखा गया मनघडन्त इतिहास पड़ाया जा रहा है, अंग्रेजो के सुधार कार्य (?) और बलात्कारी बादशाहों की लोरियां हि इतिहास मे मिलती है|------------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: मातृभाषा और अधिकतर राष्ट्रभाषा संस्कृत मे हि शिक्षा दी जाती थी, भाषा केवल व्यक्ति की अभिव्यक्ति का साधन हि नही यह संस्कृति व परंपरा के संरक्षण का भी साधन है|इंडिया मे: विदेशी भाषा अंग्रेजी मे शिक्षा दी जाती है हमारी संस्कृति के हजारो शब्द है जिनका अनुवाद अंग्रेजी नहीं कर सकती जैसे प्राण, प्रजा, यज्ञ, सती, सत्य-रज-तम, गलत अनुवाद धर्म – रिलिजन, विवाह-मेरिज, कृषि- एग्रीकल्चर, मक्खन-बटर, दर्शन- फिलोसोफी, तत्व-एलिमेंट, रसायन-केमिकल आदि ने बहुत नुकसान पहुँचाया इससे लोग ऋषि संस्कृति से कटकर आसुरी संस्कृति के प्रभाव मे फंस गया|-------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: प्रगति का विज्ञानं पड़ाया जाता है| इंडिया मे: दुर्गति का विज्ञानं पड़ाया जाता है|--------------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: अर्थशास्त्र पड़ाया जाता है|इंडिया मे: अनर्थशात्र पड़ाया जाता है, अर्थ शास्त्र पड़कर भी कितने हि छात्र उनकी बराबरी नही कर सकते जो कड़ी धुप मे मेहनत से बड़ा व्यापार खड़ा कर देते है जो कम पड़े लिखे होते है एमबीए धरी कम पड़े लिखों के निचे एडियाँ रगड़ते है|-------------------------------------------------------------------------------------भारत मे: हमारे समाज की मूल्यों की शिक्षा दी जाती है|इंडिया मे: भारत के मूल्यों की खिल्ली दी जाने वाली राष्ट्रद्रोही, बामपंथियों से भरी सोच और शिक्षा दी जाती है|-----------------------------------------------------------------------------------भारत मे: काम शिक्षा का उदेश्य था – काम उर्जा को ऊपर उठाकर पुस्तकीय ज्ञान से श्रेष्ठ ज्ञान की प्राप्ति, विवेक से काम के आवेश से मुक्त होना, संभव न हो तो गृहस्थ आश्रम मे प्रवेश कर काम सुख को भोग, उसकी क्षण भंगुरता का अनुभव कर शाश्वत सुख (प्रेम, भक्ति, ध्यान, समाधि की और बढना); श्रेष्ट संतान की प्राप्ति|इंडिया मे: यौन शिक्षा का उदेश्य है इंडिया की पश्चिम की तरह व्यभिचारी देश बनाना, ब्रह्मचर्य भंग करने, सुरक्षित यौन करने, यौन संबंधो के व्यावहारिक अनुभवों के लिए प्ररित करने वाली शिक्षा दी जाती है; क्या आपने कभी ‘नोट’ किया कभी मीडिया ने यह विषय उठाया या सरकार ने कही इन्टरनेट पर अश्लील सामग्री, विडियो पर प्रतिबंध लगे ? नहीं ! मेकोले यही चाहता था|


education (शिक्षा) के क्षेत्र मे Bharat और India का अंतर: राजीव दीक्षित Rajiv Dixit
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भारत मे: प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित था, प्रत्येक गाँव मे School थे , पड़ने वाले और पड़ाने वालों मे 50% से अधिक शुद्र थे, सेर्जेरी की शिक्षा नाइ जाती के लिए, आर्किटेक्चर की शिक्षा कुम्हार के लिए, इस्पात लकड़ी, उद्योग की शिक्षा लुहार और सुथार जाती, एवं वस्त्र उद्योग की शिक्षा जुलाहा जाती को दी जाती थी|
इंडिया मे (मेकोले की शिक्षा नीति): पड़े लिखे कम है, पड़े लिखों मे भी शिक्षित तो बहुत हि कम है, आरक्षण के नाम पर नेता शिक्षा के अन्दर घुसपैठ कर उसका सत्यानाश कर रहे है|
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भारत मे: विश्वभर से विद्यार्थी भारत के गुरुकुल मे पड़ने को अपने जीवन का सौभाग्य मानते थे और यहाँ पड़ने के लिए लालायित रहते थे|
इंडिया मे: विद्यार्थी विदेश मे पड़ कर गर्व महसूस कर रहे है, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशो मे मार खाकर भी स्वाभिमान शून्य एक भी विद्यार्थी वापस अपने राष्ट्र नहीं लौटा और ना हि वहिष्कार करते है विदेशी शिक्षा का|
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भारत मे: गुरु गुरुकुल चलाते थे समाज का सबसे प्रबुद्ध वर्ग उन्हें शिक्षा देता था|
इंडिया मे: स्कूलों मे नौकर रखें जाते हैं, जो टीचर का कार्य करते है, नौकर किसी को मालिक बनने का ज्ञान कैसे दे सकता है ? इसलिए यहाँ पड़ा लिखा व्यक्ति मानसिक रूप से गुलाम है नौकरी को हि श्रेष्ट समझता है|
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भारत मे: प्रधानमंत्री के पद से भी आचार्य का पड़ अधिक महत्व का माना जाता था (उदः आचार्य चाणक्य) जब आवश्यकता होती थी तो आचार्यो से प्रधानमंत्री बनने के लिए निबेदन होता था|
इंडिया मे: शिक्षक अब टीचर हो गए है और पद भी मामूली, एक शिक्षक राष्ट्रपति बन जाता है तो उसे शिक्षक दिवस के रूप मे याद किया जाता है|
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भारत मे: पात्रता के आधार पर शिक्षा दी जाती थी, यह पात्रता सत्य-रज-तम और बात-पित्त-कफ के आधार पर तय होती थी और भारत का शिक्षक बिकाऊ नही होता था|
इंडिया मे: शिक्षा पात्र-कुपात्र मे भेद के बिना, इंडिया का शिक्षित बिकाऊ है, अमिताभ, शाहरुख़ खान, आमिर खान, दारासिंह जैसे इंडिया के प्रिय भांड धन के लिए उनके चाहने वालों को जहर बेचने से भी नही हिचकते है कोई कोला बेच रहा है तो कोई अंडे खाने का प्रचार कर रहा है तो कोई मांस खाने के फायदे गिना रहा है|
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भारत मे: शिक्षा के बदले मे गुरुदक्षिना दी जाती थी, यहाँ गुरु शिष्य संबंध प्रमुख था, धन गौण होता था|
इंडिया मे: पैसे के बदले मे शिक्षा दी जाती है, रोज के ७०-८० करोड़ रूपए के विज्ञापन कमाई करने के लिए छपते है, गुरु शिष्य संबंध गौण है|
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भारत मे: समाज की प्रगति के लिए शिक्षा दी जाती है|
इंडिया मे: कंपनियों के प्रगति के लिए शिक्षा दी जाती है, शेक्षिक काल खत्म होते हि कंपनियाँ इन पड़े लिखे पशुओं को खरीदने पोहुँच जाती है, और बोली लगाती है|
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भारत मे: गुरुकुल में सदाचार सम्पन्न आचार्यों से ब्रह्मचर्य धारण कर शिक्षा ग्रहण करते है|
इंडिया मे: घर के भोगमय बातावरण, या हॉस्टल के कमरे की दीवारें भांडो की तस्वीरों से ढकी रहती है या शाम को फिल्म और मजे करना, यही मूल उदेश्य है|
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भारत मे: प्राकृतिक वातावरण मे ज्ञान की साधना होती है|
इंडिया मे: अप्राकृतिक वातावरण में नर्सरी, किंडर गार्डन खोले जाते है, किताबों से गाय, बकरी, फुल, फल, सूर्य, चद्रमा समझाए जाते है इस ‘सेकंड-हैण्ड’ जानकारी को ज्ञान कहते है, और पेड़ के निचे बैठकर शिक्षा को सुविधाओं का और पिछड़ेपन का प्रतिक माना जाता है|
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भारत मे: गुरु केन्द्रित के साथ हि शिष्य केन्द्रित शिक्षा पद्धति थी|
indiaइंडिया मे: केवल विषय केन्द्रित शिक्षा पद्धति|
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भारत मे: पुरुषो को समाज की प्रगति की और स्त्रियों को प्रगति को स्थिरता प्रदान करने की शिक्षा दी जाती थी जैसे चलते समय एक पैर स्थिर रहता है|
indiइंडिया मे: दोनों को एक सी शिक्षा दी जाती है जैसे दोनों पैर एक साथ बढाने पर जो दुर्गति होती है वैसे हि गति हो रही है|
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भारत मे: भारत मे शिक्षा आधारित परीक्षा होती थी|
indiaइंडिया मे: यहाँ परीक्षा आधारित शिक्षा होती है|
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भारत मे: भारतीय शिक्षा का मनोविज्ञान त्रिगुण (सत्व-रज-तम) और प्रकृति (वात-पित्त-कफ) पर आधारित था – सत्य गुण का विकास, रजोगुण का नियंत्रण और तमोगुण का दमन शिक्षा के द्वारा साधा जाता था|
इंडिया मे: इंडिया की शिक्षा का मनोविज्ञान व्यवहार पर आधारित है|
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भारत मे: प्रारम्भिक स्तर पर अपने आसपास की प्रकृति को समझने की शिक्षा दी जाती है|
इंडिया मे: प्रारम्भिक स्तर पर देशी विदेशी पृथ्वी आकाश पाताल सबका भूगोल पड़ाया जाता है लेकिन दैनिक जीवन मे सर्वाधिक उपयोगी गाँव व जिले का भूगोल नहीं पड़ाया जाता है|
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भारत मे: आज की तरह इतिहास की शिक्षा नहीं होती, लेकिन लोगों को अपने पूर्वजों के बारे मे ज्ञान था|
इंडिया मे: अंग्रेजो द्वारा भारत के स्वाभिमान को भंग करने के लिए लिखा गया मनघडन्त इतिहास पड़ाया जा रहा है, अंग्रेजो के सुधार कार्य (?) और बलात्कारी बादशाहों की लोरियां हि इतिहास मे मिलती है|
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भारत मे: मातृभाषा और अधिकतर राष्ट्रभाषा संस्कृत मे हि शिक्षा दी जाती थी, भाषा केवल व्यक्ति की अभिव्यक्ति का साधन हि नही यह संस्कृति व परंपरा के संरक्षण का भी साधन है|
इंडिया मे: विदेशी भाषा अंग्रेजी मे शिक्षा दी जाती है हमारी संस्कृति के हजारो शब्द है जिनका अनुवाद अंग्रेजी नहीं कर सकती जैसे प्राण, प्रजा, यज्ञ, सती, सत्य-रज-तम, गलत अनुवाद धर्म – रिलिजन, विवाह-मेरिज, कृषि- एग्रीकल्चर, मक्खन-बटर, दर्शन- फिलोसोफी, तत्व-एलिमेंट, रसायन-केमिकल आदि ने बहुत नुकसान पहुँचाया इससे लोग ऋषि संस्कृति से कटकर आसुरी संस्कृति के प्रभाव मे फंस गया|
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भारत मे: प्रगति का विज्ञानं पड़ाया जाता है|
इंडिया मे: दुर्गति का विज्ञानं पड़ाया जाता है|
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भारत मे: अर्थशास्त्र पड़ाया जाता है|
इंडिया मे: अनर्थशात्र पड़ाया जाता है, अर्थ शास्त्र पड़कर भी कितने हि छात्र उनकी बराबरी नही कर सकते जो कड़ी धुप मे मेहनत से बड़ा व्यापार खड़ा कर देते है जो कम पड़े लिखे होते है एमबीए धरी कम पड़े लिखों के निचे एडियाँ रगड़ते है|
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भारत मे: हमारे समाज की मूल्यों की शिक्षा दी जाती है|
इंडिया मे: भारत के मूल्यों की खिल्ली दी जाने वाली राष्ट्रद्रोही, बामपंथियों से भरी सोच और शिक्षा दी जाती है|
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भारत मे: काम शिक्षा का उदेश्य था – काम उर्जा को ऊपर उठाकर पुस्तकीय ज्ञान से श्रेष्ठ ज्ञान की प्राप्ति, विवेक से काम के आवेश से मुक्त होना, संभव न हो तो गृहस्थ आश्रम मे प्रवेश कर काम सुख को भोग, उसकी क्षण भंगुरता का अनुभव कर शाश्वत सुख (प्रेम, भक्ति, ध्यान, समाधि की और बढना); श्रेष्ट संतान की प्राप्ति|
इंडिया मे: यौन शिक्षा का उदेश्य है इंडिया की पश्चिम की तरह व्यभिचारी देश बनाना, ब्रह्मचर्य भंग करने, सुरक्षित यौन करने, यौन संबंधो के व्यावहारिक अनुभवों के लिए प्ररित करने वाली शिक्षा दी जाती है; क्या आपने कभी ‘नोट’ किया कभी मीडिया ने यह विषय उठाया या सरकार ने कही इन्टरनेट पर अश्लील सामग्री, विडियो पर प्रतिबंध लगे ? नहीं ! मेकोले यही चाहता था|