Vipassana Meditation जिसे खोजा था भगवान महत्मा बुध ने,

Vipassana साधना के आचार्य पूज्य श्री S.N. Goenka *स्त्येनारायण गोयनका जी* भारत में १९६९ से Meditation की इस विद्या का प्रसिक्षण दे रहे हें । उन्होंने यह साधना विधि ब्रहादेश में पूज्य Sayagyi U Ba Khin  से सीखी और बहूत लाभान्वित हुए । तदंतर अपने गुरु के कुशल मार्ग दर्शन में निरन्तर अभ्याश करते हुए इस विद्या में पारंगत हुए । यह विद्या सार्वदेशिक, सर्वजन्नी, और सर्वकालिक हे — देश जाती और समय की सीमा से सर्वथा मुक्त इसमें सम्पूर्ण मानव जाती का कल्याण समाया देख पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी ने निरन्यें लिया की वो अब business से निर्व्रती लेकर अपना शेष जीवन इसी के शिक्षण कार्य में लगायेंगे उनके इस सुभ संकल्प में उनके पूज्य गुरुदेव का प्रोत्सहन और आग्रेह निहित था


 ध्यान की यह विधि भारत की पुरानी और अनमोल विद्या हे जो आज से लगभग २५०० वर्ष पूर्व भगवान बुध ने खोज निकाली थी किन्ही कारणों से यह हमारे देश से विलुप्त हो गई पड़ोसी ब्र्हंदेश ने गुरु शिष्य परमपरा द्वारा इसे सुरक्षित रखा और अब अपने देश की इस अनमोल धरोहर को वापश लाने का श्रय पूज्य श्री स्त्येनारायण गोयनकाजी को हे


हम धर्म शब्द का सही अर्थ भूल गये और सम्प्रदाए को ही धर्म मानने लगे हें आज जबकि धर्म के नाम पर इतनी अराजकता फेली हुई हे यह स्म्प्रदायेकता विहीन विद्या घोर अंधकार में प्रकाश सद्र्श स्तम्भ हे

आज का मनुष्ये तनाव, वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि विकारों से ग्रसित हे विपश्ना एक ऐसी विद्या हे जो हमारी इन सांसारिक विपदाओं को खतम करने में साहयक हे इसके आलावा यह विद्या हमें अध्यात्म के ऊँचे से ऊँचे धरातल तक ले जाने में पूर्णता सक्षम हे इस विधि से हमारे विकार वाशना, स्वार्थ, घिरणा, आदि पूर्णता नष्ट होते च्लेजाते हें और कुशल विर्तियाँ मैत्री, करुणा, शमा, शील, सेवा, आदि अंकुरित होती हें और फलती फूलती हे । 

सोभाग्येवश ऐसी दुर्लभ विद्या आज सुलभ हे और इसके द्वारा हमे अपना मंगल साधने की प्रेरणा मिले इसलिए ये विद्या फिर से भारत से पुरे विश्व में फेल रही हे   । 

विपश्यना ध्यान सिखने के लिए दस दिन के शिविर में भाग लेना जरूरी हे इन दस दिनों के दोरान शिविर स्थल पर ही रहना होता हे जन्हा भोजन और आवास की सम्पूर्ण व्येव्स्था रहती हे शिक्षण आवास सहित सम्पूर्ण सुविधा का कोई शुल्क नही लिया जाता । 

ध्यान की यह विधि सिखने के लिए हर सम्प्रदाए के लोग आते हें चाहे वो मुस्लिम, हिन्दू, सिख, बुध , जेन, इसाई सभी आते हें अत्यंत धन सम्पन भी आते हें और बिलकुल धनहिन भी किसी भी विपश्यना शिविर में समाज के हर वर्ग का यह अनूठा संगम देखा जा सकता हे 

इस विद्या के माध्यम से धर्म धारण कर अधिक से अधिक लोग अपना और अपने परिवारजनों का मंगल साध सकें ये ही मंगल कामना हे  ।  

विपश्यना सत्र्स के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/

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