Science नें केवल वो ही पाया हे जो पहले से ही इश्वर में विधमान था *paramahansa yogananda*

Special:- दोस्तों यंहा जो कुछ भी लिखा गया हे वो 
paramahansa yogananda जी द्वारा दिये गए प्रवचन में से  हे जिसे में अपने इस blog पर लिख रहा हूँ बस एक कोसिस हे की ज्यादा से ज्यादा लोग अध्यात्म में आकर शांत और सुखी जीवन जी सकें और जान सकें एक सच्चे योगी के बारे में
तो पढ़िए लेख का पहला भाग

Science नें न तो किसी चीज की सृष्टी की हे और न ही किसी चीज का अविष्कार किया हे केवल वो ही पाया हे जो पहले से ही इश्वर में विधमान था यदि हम अपना मन केन्द्रित करें तो इसी परकार उन रहस्यों को भी सुलझा सकते हें जिनके बारे में मैं आज बोलने जारहा हूँ

जब में ऐसी बातों के बारे में आपसे कुछ कहता हूँ तो यह किसी पुस्तक से पढ़ा हुआ या अध्यन किया हुआ नही होता, बल्कि परम सत्ये के साथ मेरे अपने अनुभव से आता हे आप लोगों को कुछ अजीब सा लगेगा, लेकिन जब में बोल रहा होता हूँ उस शन में जिस बात का वर्णन कर रहा होता हूँ उसे में प्रत्यक्ष देख रहा होता हूँ और ऐसा हो भी क्यूँ नही? एक्सरे मशीन से आप शारीर के अस्थि पंजर और शरीर के अंगो को देख सकते हें निसंदेह मानव की अनुभूति चेतना किसी मशीन से कंही अधिक हे 

छोटासा दिमाग रहित रेडियो भी आकाश को भेद कर मिलो दूर से प्रक्षेपित किये गए संदेशों को ग्रेहन कर लेता हे हमारी चेतना इससे कंही अधिक सवेदनशील बन जाती हे जब हम सूक्षम स्तर पर उसका सुर मिलाना सिख लेते हें शारीर और उसके साथ जुड़े हुए समस्त विचारों के पिच्छे सूक्षम आन्तरिक जगत हे जो इस जगत के साथ मर्मिक रूप से जुड़ा हुआ हे अध्यात्मिक रूपसे उन्ती प्राप्त कर आप इस आंतरिक जगत को देख सकते हें 

दोस्तों आज बस इतना ही आगे और भी लेख बाकी हे धीरे धीरे सारे लेख आपके सामने होंगे बस इंतजार कीजिये

और ज्यादा जानकारी के लिए paramahansa yogananda जी की पुस्तक Autobiography of a Yogi पढ़िए इस पुस्तक के लिए यंहा क्लिक करें https://bookstore.yssofindia.org/product.php?catid=3&p=Other%20Languages