गऊ माँ के लिए…….अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया

अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया अपने बच्चे से भी छीना पर तुमको मैंने दूध दिया. रूखी सूखी खाती थी मैं कभी न किसीको सताती थी मैं कोने में पड़ जाती थी मैं दूध नहीं दे सकती अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं मेरे उपलों की आग से तूने भोजन अपना पकाया था गोबर गैस से रोशन कर के तेरा घर उजलाया था क्यों मुझको बेच रहा रे उस कसाई के हाथों में ? पड़ी रहूंगी इक कोने में मत कर लालच माँ हूँ मैं. मर कर भी है कीमत मेरी खाल भी तेरे काम आए मेरी हड्डी की कुछ कीमत शायद तू ही घर लाए मैं हूँ तेरे क्रष्ण की प्यारी वह कहता था जग से न्यारी उसकी बंसी की धुन पर मैं भूली थी यह दुनिया सारी मत कर बेटा तू यह पाप अपनी माँ को न बेच आप रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसीको नहीं सताऊँगी मैं तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं. (मन भर आया हो तो शेयर करे, मेरे लिए नहीं अपनी माँ के लिए, गऊ माँ के लिए……..!

3 thoughts on “गऊ माँ के लिए…….अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया

  1. ZEAL

    हिन्दू धर्म अहिंसा सिखाता है। पशु हत्या और गो-हत्या से बड़ा जघन्य अपराध दूसरा कोई नहीं। एक मूक प्राणी जिस तरह अपने दुग्ध से सींचकर लाखों लोगों का पालन पोषण करती है, वो सिर्फ माँ ही कर सकती है।

  2. भारत योगी

    अगर वेय्क्ति करुणा करनी सिख जाये तो इस देश और दुनिया का उदधार निश्चित हे ये धरती स्वर्ग हो जाएगी

Comments are closed.