श्मशान में स्वर्ग

रसिक शर्मा, गोवर्धन (मथुरा): बृज धरा यूं तो मंदिरों के लिए विख्यात है, लेकिन यहां एक श्मशान घाट की बात भी कुछ खास है। यह जब उजड़ रहा था तो एक योग अकादमी ने इसका संरक्षण अपने हाथ में लिया। इसके बाद इसकी दशा परिवर्तित कर दी। श्रीकृष्ण को प्रिय कदम्ब के हजारों पौधे रोपित किए, जो अब वृक्ष बनकर स्वर्गिक आनंद का अहसास कराते हैं। रुद्राक्ष के करीब दो दर्जन पेड़ आध्यात्म से जोड़ते हैं। यही नहीं इस वनीकरण का नतीजा है कि यहां भूमिगत जल स्त्रोत आश्चर्यजनक से ऊपर आ गए हैं। यह सिर्फ पांच-छह फीट पर हैं।
मुकुट मुखारविंद (गोवर्धन मंदिर) के पास राधाकुंड परिक्रमा मार्ग में भरतपुर राज परिवार की छतरियों (समाधि स्थन) का निर्माण भरतपुर रियासत के राजा बलवंत, राजा बल्देव सिंह और राजा रंजीत सिंह की स्मृति में भरतपुर राजघराने ने सन् 1825 में कराया था। भूरे रंग के पत्थरों और छतरियों पर की गई स्वर्ण जड़ित पेंटिंग्स बस देखते ही बनती है। श्री कृष्ण भक्ति को दर्शाते कृष्ण की लीलाओं से प्रेरित चिन्हों पर जगमगाती रोशनी श्मशान स्थल को अनोखा सौंदर्य प्रदान करती है।

पूरी जानकारी के लिए इस साईट पर जाएँ www.hindi.vrindavantoday.org/2011/10/श्मशान-में-स्वर्ग/