पेप्सी बोली कोका कोला !! भारत का इन्सान है भोला !!!!

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पेप्सी बोली कोका कोला !! भारत का इन्सान है भोला !!!!
विदेश से मै आयी हूँ, साथ में मौत को लायी हूँ।
लहर नही ज़हर हूँ मै, गुर्दो पर बढ़ता कहर हूँ मै,
मेरा PH दो 2.7, मुझ में गिर कर घुल जाये दातँ।
ज़िंक आर्सेनिक लेड हूँ मै, काटे आन्तो को, वो बलेड हूँ मै।
मुझसे बढ़ती एसिडिटी है, ͩफिर क्यो पीते आपके भयैा-दीदी ?
ऐसी मेरी कहानी है, मुझसे अच्छा तो पानी है।
 दूध दवा है दूध दुवा है, मै जहरीला पानी हूँ।
है
दूध मुझ से ससता , तो फीर पीकर मुझको, यूं मरता है?
540 करोड़ कमाती हू ,अपने देश‘अमरीका’ लेजाती हूँ।
ͧशिव ने भी न जहर उतारा, कभी अपने कंठ के नीचे।
तुम मूर्ख नादान हो यारो ! पड़े हुए हो मेरे पीछे।
देखो इन्सान लालच में अंधा, बना ͧलया है मुझको धंधा ।
मै पहुंची हूँ आज वहाँ पर, पीने का नही पानी जहाँ पर ।
छोड़ो नकल अब अकल से जीयो, जो कुछ पीना सभंल के पीयो ।
इतना रखना अब तुम धयान, घर आये जब मेहमान ।
इतनी तो रस्म निभाना, उनको भी कुछ कसम दिलाना ।
दूध और गाजर रस पीना, डाल कर छाछ में जीरा पुदीना

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