जब कोई वैय्क्ति सम्यक स्म्बुधं बनता हे

जब कोई वैय्क्ति सम्यक स्म्बुधं बनता हे , चाहे सिधारत गोतम हो या कोई और, तो वो कदापि कोई सम्प्रदाए स्थापित नही करता । शुद्ध धरम ही लोगों को  सिखाता हे  शुद्ध  धरम याने कुदरत का वो कानून जो सब पर एक जेसा लागु होता हे। जो किसी का पक्षपात नही करता विश्व में कोई बुध बने या न बने , यह कानून सदेव अपना काम करता हे। परन्तु जब कोई वैय्क्ति बुध बन जाता हे तो स्वानुभूति से इस कानून की बारीकियों को जान लेता हे । और दुखयारी जनता जो इसे भूल बेठी थी उसे समझता हे । धरम धारण करने की प्रेरणा और उपाए देता हे । कालन्तर में लोग अनुभूतियों से समझमें  आने वाली इन बारीकियों को खो बेठता  हे और उस विद्या को भावावेश या बुधिविलास का विषये बना लेता हे तब  इसी  से भीन  भीन सम्प्रदायों  का  प्रजनन  और सन्गठन  होने लगता हे ।
भगवान  महत्मा बुध  की विपश्ना विधि को जानने के लिए इस साईट पर जाएँ  http://www.dhamma.org/en/bycountry/ap/in/