(जाने खेचरी मुद्रा के बारे में ) खेचरी मुद्रा को सिद्ध करने एवं अमृत के स्त्राव हेतु कुछ वर्ष भी लग सकते हें ।

खेचरी मुद्रा khechari mudra एक सरल किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण विधि हे ।  जो इसमें जिह्वा को मोडकर तालू के उपरी हिस्से से सटाना होता हे  । निरंतर अभ्यास करते रहने से जिह्वा जब लम्बी हो जाती हे  । तब उसे नासिका रंध्रों में प्रवेश कराया जा सकता हे  । तब कपाल मार्ग एवं बिन्दुं विसर्ग से सम्बन्धित कुछ ग्रन्थियों में उद्दीपन होता हे  । जिसके परिणाम स्वरूप अमृत का स्त्राव आरम्भ होता हे  । उसी अमृत का स्त्राव होते वक्त एक विशेष प्रकार का अध्यात्मिक या मस्तीभरा अनुभव होता हे  ।
      खेचरी मुद्रा को सिद्ध करने एवं अमृत के स्त्राव हेतु आवश्यक उद्दीपन में कुछ वर्ष भी लग सकते हें । किन्तु हो जाने पर ये जीवन के लिए एक बड़ी ही उपयोगी क्रिया हे । जब तुम ध्यान के लिए बैठोगे तो मन पूर्णत: एकग्र और स्थिर होगा। जिसमे किसी प्रकार के विचार नही होंगे । तब पूर्ण शुन्य का अनुभव होगा । यदि तुम मन्त्र का जप करोगे तो एसा लगेगा जेसे जप कोई और ही कर रहा हो और तुम स्वेम के प्रति पूर्ण सचेत रहते हुए भी बहारी और भीतरी अनुभव भी करते रहते हो । यदि नाड़ी मंडल में पूर्ण सामंजस हो, ह्रदय जडवत हो गया हो मस्तिष्क में अल्फ़ा तरंगे प्रबल हों तो मन चंचल केसे हो सकता हे । 
सावधानी:- मुद्राओं को किसी जानकार से सीख कर ही करें

7 thoughts on “(जाने खेचरी मुद्रा के बारे में ) खेचरी मुद्रा को सिद्ध करने एवं अमृत के स्त्राव हेतु कुछ वर्ष भी लग सकते हें ।

  1. तरुण भारतीय

    बहुत अच्छी जानकारी दी …..भारत की संस्कृति व् सभ्यता को यूँ ही विश्व पटल पर आगे बढ़ाते रहें |

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