आयुर्वेद का जनक भारत एक महान देश हे । जिस पर महापुरुष जनम लेते रहतें हें ।

आयुर्वेद का जनक भारत एक महान देश हे ।  जिस पर महापुरुष  जनम लेते रहतें हें ।  और भारत की भूमि पर एक से एक महान ऋषियों (आज की भाषा में वैज्ञानिक ) ने जनम लिया  हे ।  किसी ने योग की खोज की किसी ने स्वर विज्ञानं की खोज की किसी ने एयेक्युप्रेषर की खोज की एसी ही एक महान विद्या आयूर्वेद की खोज की हमारे महान ऋषियों ने आयूर्वेद एक एसी चिकित्षा पध्तिती हे जिससे हम अपने शारीर के समस्त रोग ख़तम कर सकते हें आज में आयूर्वेद के विशेए में एक सच्ची घटना लिख रहा हूँ आशा हे की आप इससे कुछ सिख लेंगे

एक राजा बहुत अधिक बीमार था ।  उसका पूरा शारीर पिला पड़ गया था और सारा शारीर सुख कर कंकाल हो गया था ।  दूर दूर के राज्यों से एक्से बढकर एक डाक्टर को बुलाया गया उनसब ने रजा को स्वस्थ करने की बहुत कोशिश की खूब एलोपेथी की दवाइयाँ दी गईं पर कोई फाएदा नही हुआ आखिर में सभी ने हार मानली और सभी ये सोचने लगे की अब रजा नहीं बचेंगे और ये बात पुरे नगर में फेल गई अचानक ही किसी गाँव से कोई बुजुर्ग वेध्जी नगर में आए उन्हें भी इस बात का पता चला तब उन्होंने सोचा की ये मेरा कर्त्वेये हे ।  की में अपने रजा के प्राणों की रक्षा करूं और वो महल की तरफ चल पड़े ।

महल पहोंच कर वो परधानमंत्री जी से मिले और उन्होंने रजा जी से मिलने के लिए पूछा परधानमंत्री ने उपेक्षा से उस बुजुर्ग को देखा जो साधारण धोती कुरते और माथे पर तिलक लगाए हुए था ।  फिर परधानमंत्री ने सोचा की इनको राजासे मिलवाने में हर्ज भी क्या हे ।  और वो उन्हें रजा के पास ले गए और उस बुजुर्ग वेध ने रजा की आंख देखि और उनकी नाडी देखि और वो मुस्कराकर बोले की में रोग को समाज गया हूँ और इनको अभी ठीक किये देता हूँ ।

कुछ देर चुप रहने के बाद वेध्जी ने कहा की आप १० यूवक, १० चाकू, १० निम्बुं मंगाइए ये सुनकर सभी अस्चर्येचकित रह गए वो सभी इतने ज्यादा निराश हो गए थे की सभी ने सोचा की ये वेध कोई सनकी हे परन्तु विचार विमर्श के बाद उनके नुस्खे को अजमाने की सोच ली गई ।

वेध जी ने १० युवको को एक लाइन में खड़ा कर दिया और कहा जब में बुलाऊ तो एक यूवक आएगा और रजा के चेहरे के आगे नीबूं कटेगा और बर्तन में निचोड़ देगा पहले यूवक ने एसा ही किया दुसरे ने भी और तीसरे ने भी तिन युवको के प्रयोग के बाद राजा ने जीभ चलाई चोथे यूवक ने जेसे ही नीबू काट कर रस निचोड़ा राजा की आँखों में चमक आने लगी नीबू के रस की धार को देखकर राजा के मुहमे पानी आने लगा देखते ही देखते रजा साहब का मुह लार से भर गया ।

वेध जी ने उन्हें नीबू के रस में तुलसीपत्र तथा कलि मिर्च डलवाकर पिल्वाई और कुछ ही देर में रजा साहब उठ कर बैठ गए उनके शारीर की लार बनाने वाली गरंथियाँ अपना काम करने लगी । 

अब तो रजा का पूरा परिवार उस ग्रामीण वेध के परती नतमस्तक हो गया जिस्काम को बड़े बड़े डॉक्टर नही कर सके वो काम वेध्जी ने कर दिखाया एक साधारण से आयूर्वेद के नुस्खे ने रजा को स्वस्थ कर दिया था ।

राजपरिवार के लोगो ने उनको स्वर्ण मुद्राएँ देनी चाही पर वेध्जी ने मना कर दिया और कहा ये मेरा क्रत्व्ये था ।

धन्ये हे भारत भूमि और धन्ये हे इसकी संताने जिसपर एसे महान ऋषि मुनियों ने जनम लिया और हमें आयूर्वेद जेसी विद्या दी अब हम पर हे की हम इसका सही इस्तेमाल केसे करते हें ।

One thought on “आयुर्वेद का जनक भारत एक महान देश हे । जिस पर महापुरुष जनम लेते रहतें हें ।

  1. वैज्ञानिक प्रार्थना

    आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा| आपकी भावाभिव्यक्ति बहुत सुन्दर है और सोच गहरी है! लेखन अपने आप में संवेदनशीलता का परिचायक है! शुभकामना और साधुवाद!

    "कुछ लोग असाध्य समझी जाने वाली बीमारी से भी बच जाते हैं और इसके बाद वे लम्बा और सुखी जीवन जीते हैं, जबकि अन्य अनेक लोग साधारण सी समझी जाने वाली बीमारियों से भी नहीं लड़ पाते और असमय प्राण त्यागकर अपने परिवार को मझधार में छोड़ जाते हैं! आखिर ऐसा क्यों?"

    "एक ही परिवार में, एक जैसा खाना खाने वाले, एक ही छत के नीचे निवास करने वाले और एक समान सुविधाओं और असुविधाओं में जीवन जीने वाले कुछ सदस्य अत्यन्त दुखी, अस्वस्थ, अप्रसन्न और तानवग्रस्त रहते हैं, उसी परिवार के दूसरे कुछ सदस्य उसी माहौल में पूरी तरह से प्रसन्न, स्वस्थ और खुश रहते हैं, जबकि कुछ या एक-दो सदस्य सामान्य या औसत जीवन जी रहे हैं| जो न कभी दुखी दिखते हैं, न कभी सुखी दिखते हैं! आखिर ऐसा क्यों?"

    यदि इस प्रकार के सवालों के उत्तर जानने में आपको रूचि है तो कृपया "वैज्ञानिक प्रार्थना" ब्लॉग पर आपका स्वागत है?

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