कबीरदास जी का कथन है चतुराई हरि ना मिलै,

चतुराई हरि ना मिलै, बातां की बात
एक निस प्रेही निराधार का गाहक गोपीनाथ
कबीरदास
जी का कथन है कि चतुराई से परमात्मा को प्राप्त करने की बात तो व्यर्थ है। जो भक्त उनको निस्पृह और निराधार भाव से स्मरण करता है उसी को गोपीनाथ के दर्शन होते हैं।