मौत का व्यापार ……………….. एलोपेथी ………….

(जिन महापुरुष की फोटो मेने यंहा पर लगाई हे ये हमारे देश के सच्चे सपूत थे जिनकी हत्या करदी गई इन्होने भारत माता के लिए बहूत कुछ किया हे ये निचे जो लेख हे ये भी इनके ज्ञान के भंडार में से एक छोटा सा अंस हे  जय हिंद )  
हमारे भारत में एक मंत्रालय हुवा करता है जो परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य मंत्रालय कहलाता है| हमारी भारत सरकार प्रति वर्ष करीब 23700 करोड़ रुपये लोगों के स्वस्थ्य पर खर्च करती है | फिर भी हमारे देश में ये बीमारियाँ बढ़ रही है | आइये कुछ आंकड़ों पर नजर डालते है –

01 आबादी (जनसँख्या) – भारत सरकार के आंकड़े बताते है कि सन 1951 में भारत की आबादी करीब 33 करोड़ थी जो सन 2010 तक 118 करोड़ हो गई |
02 सन 1951 में पूरे भारत में 4780 डॉक्टर थे, जो सन 2010 तक बढ़कर करीब 18,00,000 (18 लाख) हो गए |
03 सन 1947 में भारत में एलोपेथी दवा बनाने वाली कम्पनियाँ करीब 10-12 कंपनिया हुवा करती थी जो आज बढ़कर करीब 20 हजार हो गई है |
04 सन 1951 में पूरे भारत में करीब 70 प्रकार की दवाइयां बिका करती थी और आज ये दवाइयां बढ़कर करीब 84000 (84 हजार) हो गई है |
05 सन 1951 में भारत में बीमार लोगों की संख्या करीब 5 करोड़ थी आज बीमार लोगों की तादाद करीब 100 करोड़ हो गई है |

हमारी भारत सरकार ने पिछले 64 सालों में अस्पताल पर, दवाओ पर, डॉक्टर और नर्सों पर, ट्रेनिंग वगेराह वगेरह में सरकार ने जितना खर्च किया उसका 5 गुना यानी करीब 50 लाख करोड़ रूपया खर्च कर चुकी है| आम जनता ने जो अपने इलाज के लिए पैसे खर्च किये वो अलग है | आम जनता का लगभग 50 लाख करोड़ रूपया बर्बाद हुवा है पिछले 64 सालों में इलाज के नाम पर, बिमारियों के नाम पर |  पूरा पढ़ें 
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2 thoughts on “मौत का व्यापार ……………….. एलोपेथी ………….

  1. ajeet

    बहुत अच्छा लगा स्व.राजिव दीक्षित के बारे मैं पढ़कर, नेट पर एक अखबार है चौथी दुनिया ये धर्म निरपेक्ष……….? लोग एक तथाकथित संत प्रमोद कृष्णं को पकड़ लाये जिसमे वह कह रहा है की राजिव दीक्षित की ह्त्या बाबा रामदेव ने कराई है,

  2. amit tomar

    भाई हमे भावुक होकर नहीं दिमाग और अध्यात्म से सोचना हे राजीवजी की चाहे हत्या हुई हो या चाहे कुछ भी राजीव जी जेसे म्हाप्रुशों को भगवान हमारे जेसे लोगों को नई रहा दिखाने भेजतें हें जितने दिन राजीव जी को हमारे साथ रहना था वो उतने ही दिन रहे राजीवजी फिर आएँगे और ये मेरा द्रिड विस्वास हे दोस्त में अध्यात्म से जुड़ा हुआ हु और मुझे इस्वर पर पूरा भरोसा हे और राजीवजी जरुर आएँगे अब हमे उनके विचारों को लोगो तक पोहचना हे यही उनको सची श्रधान्जली होगी और में ये भी कहना चाहूँगा की हमे इस विवाद में नही पड़ना चाहिए की किसने हत्या की बल्कि सिर्फ ज्यादासे ज्यादा समय लोगों को ये बताने में लगाना चाहिए की राजीवजी जेसे म्हाप्रुष भी हुए हें अभी भारत में हम सब राजीव दीक्षित ही हें कोई कितने राजीव दीक्षित को मरेगा हम तयार हें गर्दन काटने और कटवाने को जेय हिंद

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