यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥

जब जब इस धरती पर धरम ( सच्ची इंसानियत) की हनी होगी तब तब इश्वर जनम लेंगे साधू जनों (जो इन्सान तन मन वाणी से सच्चे हें) की रक्षा के लिए और दुष्टों का नाश करेंगे ( और वो इश्वर हम सभी में हे जिसदिन इन्सान खुद को जन्लेगा तो वो बुराई को खतम करदेगा इसलिए खुद को जानो फिर संसार को भी बदल सकोगे और खुद को जानने के लिए तुमको ध्यान के मार्ग पर आना पड़ेगा गीता में भगवान कृष्ण जी ने ध्यान करने पर बहूत जोर दिया हे आज भी लाखों लोग भगवान कृष्ण जी के बताए ध्यान के तरीकों से ध्यान कर रहे हे अगर आप भी सीखना चाहतें हे तो इस वेबसाईट पर जाएँ http://www.yssofindia.org/ ) अगर कोई दिक्त आए तो आप मुझसे पूछ सकते हे मुझे आपकी मदद करके खुसी होगी